चेन्नई। तमिलनाडु सरकार ने बड़ी कंपनियों और उद्योग जगत से अपील की है कि वे माइक्रो एंटरप्राइज (बहुत छोटे उद्योगों) के साथ मजबूत और लंबे समय तक चलने वाली साझेदारी विकसित करें। सरकार का कहना है कि बड़ी कंपनियों के सहयोग से छोटे कारोबारियों को बाजार, तकनीक और सप्लाई चेन से जुड़ने में मदद मिलेगी, जिससे राज्य का MSME सेक्टर और अधिक मजबूत हो सकेगा।
चेन्नई में आयोजित CII सदर्न रीजन MSME प्रोक्योरमेंट समिट के पांचवें संस्करण को संबोधित करते हुए MSME विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव प्रदीप यादव ने कहा कि तमिलनाडु देश के प्रमुख MSME राज्यों में शामिल है। राज्य में 43 लाख से अधिक पंजीकृत MSME इकाइयां काम कर रही हैं।
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार छोटे उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए लगातार नई योजनाओं पर काम कर रही है। MSME सब्सिडी के लिए बजट को 320 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 600 करोड़ रुपये कर दिया गया है। इसके अलावा छोटे उद्योगों को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसी नई तकनीकों को अपनाने के लिए भी सहायता दी जा रही है।
99 प्रतिशत MSME माइक्रो कैटेगरी में
प्रदीप यादव ने बताया कि तमिलनाडु के लगभग 99 प्रतिशत MSME माइक्रो एंटरप्राइज श्रेणी में आते हैं। ये छोटे व्यवसाय बाजार में बदलाव, वित्तीय चुनौतियों और प्रतिस्पर्धा के प्रति ज्यादा संवेदनशील होते हैं। ऐसे उद्योगों को आगे बढ़ाने के लिए बड़े संस्थानों और उद्योगों के सहयोग की जरूरत है।
सरकार ने बड़ी कंपनियों से कहा है कि वे छोटे उद्यमों को प्रशिक्षण, मेंटरशिप, नए बाजारों तक पहुंच और सप्लाई चेन से जोड़ने में मदद करें। इससे माइक्रो एंटरप्राइज अपनी क्षमता बढ़ाकर बड़े स्तर पर कारोबार कर सकेंगे।
डिजिटल प्लेटफॉर्म के इस्तेमाल पर जोर
सरकार ने MSME और खरीदारों से डिजिटल प्लेटफॉर्म का अधिक इस्तेमाल करने की अपील की है। इसमें सरकारी ई-मार्केटप्लेस (GeM), ओपन नेटवर्क फॉर डिजिटल कॉमर्स (ONDC) और ट्रेड रिसीवेबल्स डिस्काउंटिंग सिस्टम (TReDS) जैसे प्लेटफॉर्म शामिल हैं।
अधिकारियों का कहना है कि इन प्लेटफॉर्म के जरिए छोटे उद्योगों को नए ग्राहक मिल सकते हैं, भुगतान प्रक्रिया बेहतर हो सकती है और कारोबार में पारदर्शिता बढ़ सकती है।
समिट में उद्योग जगत की भागीदारी
CII MSME प्रोक्योरमेंट समिट में सरकारी विभागों, सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों, कॉर्पोरेट संस्थानों, MSME उद्यमियों, नीति निर्माताओं और वित्तीय संस्थानों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया।
कार्यक्रम में सरकारी और PSU खरीद प्रक्रिया, कॉर्पोरेट सोर्सिंग, वित्तीय सहायता, रक्षा निर्माण और डीप-टेक क्षेत्र में MSME के लिए उपलब्ध अवसरों पर चर्चा हुई।
CII सदर्न रीजन के चेयरमैन रविचंद्रन पुरुषोत्तमन ने कहा कि MSME को अपनी उत्पादन क्षमता, तकनीकी कौशल और वैश्विक प्रतिस्पर्धा बढ़ाने पर ध्यान देना होगा। उन्होंने डिजिटल बदलाव, TReDS के उपयोग और निर्यात के अवसरों को बढ़ाने वाली पहलों पर जोर दिया।
समिट में ISRO, हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड, NLC इंडिया लिमिटेड, तमिलनाडु न्यूज़प्रिंट एंड पेपर्स लिमिटेड और एयरपोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया जैसे संस्थानों के प्रतिनिधि भी मौजूद रहे।