Udaipur Rajasthan : ग्रामीण रूटों पर फिर दौड़ेंगी बसें

Update: 2025-03-29 04:39 GMT

राजस्थान | राजस्थान रोडवेज ने ग्रामीण इलाकों में बंद पड़े बस रूटों को फिर से शुरू करने के लिए बड़ा कदम उठाया है। वर्षों से बंद पड़े इन रूटों पर अब अनुबंधित बसें (Contract Buses) चलाई जाएंगी, जिससे ग्रामीणों को बेहतर परिवहन सुविधा मिलेगी। इसके लिए रोडवेज प्रशासन ने नए टेंडर जारी किए हैं और जल्द ही बसों का संचालन शुरू होगा।

ग्रामीणों को मिलेगी राहत

उदयपुर और उसके आसपास के कई ग्रामीण क्षेत्रों में लंबे समय से रोडवेज बसों की कमी बनी हुई थी। खासकर दूर-दराज के इलाकों में बसे ग्रामीणों को यात्रा के लिए निजी वाहनों पर निर्भर रहना पड़ता था, जिससे उन्हें अधिक किराया देना पड़ता था। अब अनुबंधित बसों के संचालन से यात्रा सुविधाजनक और किफायती हो जाएगी।

किन रूटों पर चलेगी बसें?

रोडवेज अधिकारियों के मुताबिक, उदयपुर के आदिवासी बहुल इलाकों और प्रमुख ग्रामीण मार्गों पर पहले चरण में बसों को शुरू किया जाएगा। इसके लिए 50 से ज्यादा रूटों को चिन्हित किया गया है, जिनमें प्रमुख रूप से गोगुंदा, झाड़ोल, सलूंबर, कोटड़ा और खेरवाड़ा जैसे क्षेत्र शामिल हैं।

कैसे होगा अनुबंधित बसों का संचालन?

रोडवेज ने इन बसों के संचालन के लिए टेंडर जारी कर निजी ऑपरेटरों को आमंत्रित किया है। चुने गए ऑपरेटरों को निश्चित किराए और नियमों के तहत बसें चलाने की अनुमति दी जाएगी। इस पहल का मकसद रोडवेज पर वित्तीय भार कम करना और यात्रियों को बेहतर सुविधाएं देना है।

यात्रियों को क्या फायदा होगा?

  1. कम किराए में यात्रा: निजी बसों की तुलना में रोडवेज की बसों में किराया कम होगा।

  2. निश्चित समय पर बस सेवा: अब ग्रामीण यात्रियों को बसों की अनिश्चितता से राहत मिलेगी।

  3. सुरक्षित यात्रा: अनुबंधित बसें रोडवेज के नियमों के तहत संचालित होंगी, जिससे सुरक्षा बनी रहेगी।

अधिकारियों का क्या कहना है?

रोडवेज अधिकारियों के अनुसार, यह योजना जल्द ही लागू होगी। बसों के संचालन के लिए ऑपरेटरों का चयन अप्रैल के मध्य तक पूरा कर लिया जाएगा। इसके बाद, ग्रामीण रूटों पर नियमित बसें दौड़ने लगेंगी।

निष्कर्ष

राजस्थान रोडवेज का यह कदम ग्रामीण यात्रियों के लिए बड़ी राहत साबित होगा। वर्षों से बंद पड़े रूटों पर बसें फिर से दौड़ेंगी, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी बढ़ावा मिलेगा। अब देखना होगा कि यह योजना कितनी जल्दी प्रभावी होती है और यात्रियों को इसका कितना फायदा मिलता है।


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