जयपुर। राजस्थान भाजपा अध्यक्ष मदन राठौड़ ने मंगलवार को मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विपक्ष के विरोध प्रदर्शन पर तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि SIR का विरोध करने वाले दल “गलत रास्ता” अपना रहे हैं और देश में चुनाव आयोग को लेकर गलत धारणा बनाने की कोशिश कर रहे हैं। राठौड़ ने कहा कि मतदाता सूची में केवल पात्र भारतीय नागरिकों के नाम होने चाहिए और वोट देने का अधिकार भी देश के नागरिकों को ही मिलना चाहिए।राठौड़ का बयान ऐसे समय आया है जब दिल्ली में INDIA ब्लॉक के सांसदों और नेताओं ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रदर्शन किया। विपक्षी दलों ने SIR प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं, मतदाता सूची से नाम हटाए जाने और चुनाव आयोग के कामकाज को लेकर सवाल उठाए हैं। मंगलवार को संसद से चुनाव आयोग मुख्यालय की ओर मार्च के दौरान कई विपक्षी नेताओं को पुलिस ने हिरासत में भी लिया।
मदन राठौड़ ने कहा, “SIR का विरोध करने वाले गलत रास्ता अपना रहे हैं और देश में चुनाव आयोग के बारे में गलत धारणा बनाने की कोशिश कर रहे हैं। केवल इस देश के नागरिक को वोट देने का अधिकार होना चाहिए।” उन्होंने कहा कि मतदाता सूची का पुनरीक्षण एक जरूरी प्रक्रिया है और इसका उद्देश्य ऐसे लोगों के नाम सूची में बनाए रखना है जो वास्तव में वोट देने के लिए पात्र हैं।उन्होंने कहा कि किसी भी चुनावी व्यवस्था की विश्वसनीयता इस बात पर निर्भर करती है कि मतदाता सूची सही और अपडेट हो। राठौड़ के मुताबिक यदि किसी मतदाता की मृत्यु हो गई है, कोई व्यक्ति किसी अन्य स्थान पर स्थायी रूप से स्थानांतरित हो गया है या किसी व्यक्ति का नाम एक से अधिक जगह दर्ज है, तो ऐसे मामलों को दुरुस्त करना जरूरी है। हालांकि विपक्ष का आरोप है कि मौजूदा SIR प्रक्रिया के दौरान पात्र मतदाताओं के नाम भी हटाए गए हैं।
विपक्षी INDIA ब्लॉक ने मंगलवार के प्रदर्शन के दौरान तीन प्रमुख मांगें रखीं। इनमें SIR प्रक्रिया को रोकना, कथित रूप से हटाए गए पात्र मतदाताओं के नाम फिर से सूची में शामिल करना और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग शामिल है। विपक्ष का आरोप है कि मतदाता सूची के पुनरीक्षण में पारदर्शिता की कमी रही है और इससे कई मतदाताओं के मतदान अधिकार प्रभावित हो सकते हैं।दूसरी ओर भाजपा नेताओं का कहना है कि SIR मतदाता सूची को शुद्ध और सटीक बनाने की प्रक्रिया है। मदन राठौड़ ने भी इसी तर्क को आगे बढ़ाते हुए कहा कि चुनावी प्रक्रिया में केवल पात्र नागरिकों की भागीदारी सुनिश्चित करना जरूरी है। उन्होंने विपक्ष पर आरोप लगाया कि वह इस प्रशासनिक प्रक्रिया को राजनीतिक मुद्दा बनाकर चुनाव आयोग की छवि खराब करने की कोशिश कर रहा है।
SIR को लेकर विवाद पिछले कुछ समय से लगातार बढ़ता जा रहा है। विपक्षी दलों का कहना है कि मतदाता सूची में बड़े पैमाने पर नाम हटाए गए हैं और इस पूरी प्रक्रिया की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। वहीं चुनाव आयोग का पक्ष रहा है कि मतदाता सूची को अपडेट करने का उद्देश्य मृत, स्थानांतरित, डुप्लीकेट या अन्य अपात्र प्रविष्टियों को हटाना तथा पात्र मतदाताओं को शामिल करना है।विवाद को और हवा तब मिली जब मतदाता पंजीकरण के लिए इस्तेमाल होने वाले Form 6 में कथित बदलाव का मुद्दा सामने आया। इस मामले को लेकर विपक्ष ने मुख्य चुनाव आयुक्त पर सवाल उठाए हैं और सुप्रीम कोर्ट में भी मामला पहुंचा है। शीर्ष अदालत ने संबंधित रिकॉर्ड और जवाब मांगे हैं, हालांकि अभी किसी अंतिम निष्कर्ष पर नहीं पहुंचा गया है।
मंगलवार को दिल्ली में हुए प्रदर्शन में कांग्रेस समेत कई विपक्षी दलों के सांसद शामिल हुए। कुछ समय पहले तक विपक्षी विरोध से दूरी बनाए रखने वाली बीजू जनता दल भी इस प्रदर्शन में शामिल हुई। BJD ने भी मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे और SIR से जुड़े सवालों पर विपक्ष के साथ अपना विरोध दर्ज कराया।प्रदर्शन के दौरान सुरक्षा व्यवस्था कड़ी रही। चुनाव आयोग मुख्यालय के आसपास बड़ी संख्या में पुलिसकर्मी तैनात किए गए और कई स्थानों पर बैरिकेड लगाए गए। जब प्रदर्शनकारी आगे बढ़ने की कोशिश करने लगे तो पुलिस ने कुछ नेताओं और कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया। विपक्ष ने इस कार्रवाई की आलोचना की, जबकि प्रशासन की ओर से कानून-व्यवस्था बनाए रखने की बात कही गई।
मदन राठौड़ ने विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि चुनाव आयोग एक संवैधानिक संस्था है और उसके खिलाफ गलत धारणा बनाना उचित नहीं है। उनका कहना है कि यदि मतदाता सूची में त्रुटियां हैं तो उन्हें सुधारना जरूरी है और इस प्रक्रिया को राजनीतिक नजरिए से नहीं देखा जाना चाहिए।फिलहाल SIR और मुख्य चुनाव आयुक्त को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच राजनीतिक टकराव तेज है। विपक्ष जहां मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों और नाम हटाए जाने के आरोपों को लेकर आंदोलन कर रहा है, वहीं भाजपा नेताओं का कहना है कि पुनरीक्षण का उद्देश्य योग्य मतदाताओं की सही सूची तैयार करना है।आने वाले दिनों में भी SIR का मुद्दा राजनीतिक बहस के केंद्र में रह सकता है। विपक्ष ने अपना विरोध जारी रखने का संकेत दिया है, जबकि भाजपा और उसके नेता चुनाव आयोग तथा मतदाता सूची पुनरीक्षण की प्रक्रिया का बचाव कर रहे हैं।