अमृतसर एयरपोर्ट के पास संदिग्ध ड्रोन से हड़कंप, 7 फ्लाइट दिल्ली-चंडीगढ़ डायवर्ट
अमृतसर। श्री गुरु रामदास जी अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट के ऑपरेशनल एरिया में रविवार रात संदिग्ध उड़ने वाली वस्तुएं दिखाई देने के बाद हड़कंप मच गया। शुरुआती जानकारी में इन्हें ड्रोन बताया जा रहा है। दावा है कि एयरपोर्ट के आसपास दो से चार संदिग्ध ड्रोन जैसी वस्तुएं देखी गईं। रनवे के आसपास संदिग्ध गतिविधि का पता चलते ही एयर ट्रैफिक कंट्रोल (ATC) ने अलर्ट जारी कर दिया। सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए अमृतसर आने वाली सात उड़ानों को दिल्ली और चंडीगढ़ की ओर डायवर्ट करना पड़ा।
घटना रविवार रात करीब 10 बजे की बताई जा रही है। एयरपोर्ट के ऑपरेशनल एरिया में संदिग्ध गतिविधि दिखाई देने के बाद एयर ट्रैफिक कंट्रोल और सुरक्षा एजेंसियां तत्काल सतर्क हो गईं। विमान संचालन की सुरक्षा को देखते हुए एयरपोर्ट पर आने वाली उड़ानों को दूसरे एयरपोर्ट की ओर भेजने का फैसला लिया गया।
हालांकि इस पूरे मामले में एक महत्वपूर्ण बात यह है कि अमृतसर एयरपोर्ट प्रशासन की ओर से अभी तक आधिकारिक रूप से यह पुष्टि नहीं की गई है कि दिखाई देने वाली संदिग्ध वस्तुएं वास्तव में ड्रोन ही थीं। ऐसे में दो से चार ड्रोन दिखाई देने की जानकारी को आधिकारिक पुष्टि होने तक प्रारंभिक दावे के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
एयरपोर्ट जैसे संवेदनशील क्षेत्र के आसपास किसी भी अज्ञात उड़ने वाली वस्तु की मौजूदगी को सुरक्षा के लिहाज से गंभीर माना जाता है। विशेष रूप से रनवे और विमानों के टेकऑफ तथा लैंडिंग के रास्ते के आसपास ड्रोन जैसी वस्तु दिखाई देने पर विमान संचालन प्रभावित हो सकता है। यही कारण है कि संदिग्ध गतिविधि सामने आते ही एहतियाती कदम उठाए गए।
जानकारी के मुताबिक अमृतसर आने वाली कुल सात उड़ानों को डायवर्ट किया गया। इनमें से उड़ानों को दिल्ली और चंडीगढ़ भेजे जाने की बात सामने आई है। इससे संबंधित उड़ानों में सफर कर रहे यात्रियों को भी परेशानी का सामना करना पड़ा होगा। हालांकि कौन-कौन सी उड़ानें डायवर्ट हुईं और उनका नया शेड्यूल क्या रहा, इसकी विस्तृत आधिकारिक जानकारी का इंतजार है।
एयर ट्रैफिक कंट्रोल की प्राथमिक जिम्मेदारी विमानों के सुरक्षित संचालन को सुनिश्चित करना है। यदि रनवे या उसके आसपास कोई ऐसी गतिविधि दिखाई देती है जिससे उड़ानों को खतरा हो सकता है तो विमानों को होल्ड करने, डायवर्ट करने या संचालन अस्थायी रूप से रोकने जैसे कदम उठाए जा सकते हैं। अमृतसर में भी सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए उड़ानों को दूसरे एयरपोर्ट की तरफ भेजा गया।
इस घटना के बाद सुरक्षा एजेंसियों के सामने सबसे बड़ा सवाल यह है कि आसमान में दिखाई देने वाली वस्तुएं आखिर क्या थीं। यदि जांच में उनके ड्रोन होने की पुष्टि होती है तो यह पता लगाना महत्वपूर्ण होगा कि उन्हें किसने उड़ाया, वे किस दिशा से आए थे और एयरपोर्ट के ऑपरेशनल एरिया के करीब पहुंचने का उद्देश्य क्या था।
ड्रोन के संभावित ऑपरेटर का पता लगाने के लिए आसपास के क्षेत्रों की जांच महत्वपूर्ण हो सकती है। सुरक्षा एजेंसियां उपलब्ध तकनीकी जानकारी, निगरानी व्यवस्था और अन्य संभावित साक्ष्यों के आधार पर पूरे घटनाक्रम की पड़ताल कर सकती हैं।
अमृतसर का श्री गुरु रामदास जी अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट सामरिक और यात्री यातायात दोनों दृष्टि से महत्वपूर्ण है। यहां से घरेलू और अंतरराष्ट्रीय उड़ानों का संचालन होता है। ऐसे में एयरपोर्ट के आसपास किसी भी संदिग्ध गतिविधि को गंभीरता से लिया जाना स्वाभाविक है।
घटना का समय रात करीब 10 बजे होने के कारण संदिग्ध वस्तुओं की सटीक पहचान भी चुनौतीपूर्ण हो सकती है। रात के अंधेरे में किसी उड़ती वस्तु को दूर से देखकर तत्काल उसकी प्रकृति निर्धारित करना आसान नहीं होता। यही कारण है कि एयरपोर्ट प्रशासन की आधिकारिक पुष्टि को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
यदि वस्तुएं ड्रोन थीं तो उनके आकार, उड़ान की ऊंचाई और गतिविधि से जुड़ी जानकारी जांच में महत्वपूर्ण होगी। यह भी देखा जा सकता है कि वे एयरपोर्ट के प्रतिबंधित क्षेत्र में कितनी देर तक मौजूद रहीं और क्या वे किसी विमान के निर्धारित उड़ान मार्ग के करीब पहुंची थीं।
एयरपोर्ट के आसपास अनधिकृत ड्रोन संचालन विमान सुरक्षा के लिए जोखिम पैदा कर सकता है। विमान के इंजन या अन्य हिस्सों से ड्रोन की टक्कर गंभीर परिणाम पैदा कर सकती है। इसी वजह से एयरपोर्ट के आसपास ड्रोन उड़ाने को लेकर कड़े प्रतिबंध और सुरक्षा नियम लागू रहते हैं।
अमृतसर की घटना में सुरक्षा एजेंसियों ने किसी संभावित खतरे को नजरअंदाज करने के बजाय एहतियाती कार्रवाई को प्राथमिकता दी। सात उड़ानों का डायवर्जन यात्रियों और एयरलाइंस के लिए असुविधाजनक जरूर रहा, लेकिन विमानन सुरक्षा के लिहाज से ऐसी परिस्थितियों में सावधानी जरूरी होती है।
घटना के बाद संबंधित क्षेत्र में सुरक्षा और निगरानी बढ़ाए जाने की संभावना है। आसपास लगे कैमरों और अन्य निगरानी उपकरणों से भी जानकारी जुटाई जा सकती है। यदि किसी संदिग्ध व्यक्ति या गतिविधि के संकेत मिलते हैं तो जांच को उसी दिशा में आगे बढ़ाया जा सकता है।
इस घटना का एक महत्वपूर्ण पहलू अमृतसर की भौगोलिक स्थिति भी है। सीमावर्ती क्षेत्र होने के कारण यहां सुरक्षा एजेंसियां पहले से सतर्क रहती हैं। ऐसे में एयरपोर्ट के ऑपरेशनल एरिया के आसपास संदिग्ध उड़ने वाली वस्तुएं दिखाई देने की सूचना को सामान्य घटना के रूप में नहीं लिया जा सकता।
हालांकि इस स्तर पर किसी तरह की सुरक्षा साजिश या सीमा पार गतिविधि से जोड़ना उचित नहीं होगा, क्योंकि इसकी पुष्टि करने वाली कोई आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है। जांच के बाद ही स्पष्ट होगा कि संदिग्ध वस्तुओं की वास्तविक प्रकृति क्या थी।
फिलहाल सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि एयरपोर्ट प्रशासन ने अभी यह पुष्टि नहीं की है कि दिखाई देने वाली वस्तुएं ड्रोन थीं। इसलिए जांच और आधिकारिक बयान का इंतजार किया जा रहा है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने में जुट सकती हैं कि रविवार रात एयरपोर्ट के आसपास वास्तव में क्या गतिविधि हुई थी।
संदिग्ध गतिविधि के कारण सात उड़ानों का दिल्ली और चंडीगढ़ की ओर डायवर्जन इस घटना की गंभीरता को दर्शाता है। अब आधिकारिक जांच के बाद ही साफ हो सकेगा कि एयरपोर्ट के आसपास ड्रोन उड़ रहे थे या कोई अन्य वस्तु थी और इसके पीछे कौन जिम्मेदार था।