लुधियाना में उल्लास के साथ मनाई गई लोहड़ी, पतंगबाजी और अलाव ने बढ़ाया त्योहार का रंग
Punjab पंजाब: औद्योगिक शहर लुधियाना में मंगलवार को पारंपरिक उल्लास और जोश के साथ लोहड़ी का पर्व मनाया गया। सुबह से ही शहर में उत्सव का माहौल देखने को मिला। लोगों ने दिन की शुरुआत छतों पर पतंग उड़ाकर की, वहीं शाम होते-होते मोहल्लों, गलियों और खुले मैदानों में अलाव जलाकर लोहड़ी की खुशियां साझा की गईं। लोहड़ी के अवसर पर बच्चों, युवाओं, महिलाओं और बुजुर्गों में खास उत्साह नजर आया। सुबह-सुबह शहर की छतों पर रंग-बिरंगी पतंगों से आसमान भर गया। पतंगबाजी को लेकर युवाओं में खास जोश देखने को मिला। “बो-काटा” के नारों के बीच आसमान में पतंगों की होड़ लगी रही। कई इलाकों में पतंग उड़ाने की अनौपचारिक प्रतियोगिताएं भी हुईं, जिसमें बच्चों और युवाओं ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया।
शाम ढलते ही लुधियाना के अलग-अलग इलाकों में लोहड़ी के अलाव जलाए गए। लोग पारंपरिक परिधान पहनकर अलाव के चारों ओर एकत्र हुए और लोक गीत गाए। ढोल की थाप पर पुरुषों ने भांगड़ा किया, वहीं महिलाओं ने गिद्दा डालकर माहौल को और भी जीवंत बना दिया। “सुंदर मुंदरिए हो”, “तेरा कौन विचारा हो” जैसे पारंपरिक लोहड़ी गीतों से वातावरण गूंज उठा। लोहड़ी को खास तौर पर नई शुरुआत और समृद्धि के प्रतीक के रूप में मनाया जाता है। जिन घरों में इस साल नवविवाह हुआ था या नवजात शिशु का जन्म हुआ, वहां उत्सव और भी खास नजर आया। ऐसे परिवारों में रिश्तेदारों और पड़ोसियों को रेवड़ी, मूंगफली, तिल, गजक और मिठाइयां बांटी गईं। लोगों ने एक-दूसरे को लोहड़ी की बधाइयां दीं और सुख-समृद्धि की कामना की।
लुधियाना के कई रिहायशी इलाकों, सोसाइटियों और कॉलोनियों में सामूहिक रूप से लोहड़ी मनाई गई। कुछ स्थानों पर सांस्कृतिक कार्यक्रमों का भी आयोजन किया गया, जहां बच्चों ने पंजाबी लोक नृत्य और गीत प्रस्तुत किए। बुजुर्गों ने पारंपरिक किस्सों और लोक कथाओं के जरिए लोहड़ी के महत्व को नई पीढ़ी को समझाया। स्थानीय प्रशासन की ओर से भी सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए थे। आग से जुड़ी किसी भी अनहोनी को रोकने के लिए फायर ब्रिगेड को अलर्ट पर रखा गया। पुलिस ने भीड़भाड़ वाले इलाकों में गश्त बढ़ाई, ताकि त्योहार शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हो सके। कुल मिलाकर लुधियाना में लोहड़ी का पर्व आपसी भाईचारे, लोक संस्कृति और पारंपरिक उत्साह के साथ मनाया गया। पतंगों से सजा आसमान और अलाव के चारों ओर गूंजते गीत-नृत्य ने एक बार फिर पंजाबी संस्कृति की जीवंत झलक पेश की।