Jalandhar: शिक्षा पहल ‘सिख्या क्रांति’ को ‘स्कूल ऑफ़ एमिनेंस’ में चुनौती

Update: 2026-05-03 09:28 GMT
Jalandhar.जालंधर: शिक्षा क्षेत्र में नवाचार और गुणवत्ता सुधार के लिए शुरू की गई ‘सिख्या क्रांति’ योजना को जालंधर के प्रसिद्ध ‘स्कूल ऑफ़ एमिनेंस’ में एक नया झटका लगा है। स्कूल प्रशासन और स्थानीय शिक्षकों का कहना है कि योजना के कार्यान्वयन में रुकावटें और प्रशासनिक अड़चनें सामने आई हैं, जिससे विद्यार्थियों और शिक्षकों दोनों पर असर पड़ा है।
‘सिख्या क्रांति’ का उद्देश्य शिक्षा में तकनीकी नवाचार, गुणवत्तापूर्ण शिक्षण और विद्यार्थियों की व्यक्तिगत प्रगति को बढ़ावा देना था। इसके तहत डिजिटल क्लासरूम, आधुनिक शिक्षण उपकरण और प्रशिक्षित शिक्षक शामिल किए गए थे। हालांकि, ‘स्कूल ऑफ़ एमिनेंस’ में योजना के क्रियान्वयन में तकनीकी और प्रशासनिक समस्याओं के कारण अपेक्षित परिणाम नहीं सामने आए।
स्कूल के प्रधानाचार्य ने बताया, “हमने ‘सिख्या क्रांति’ के सभी दिशा-निर्देशों का पालन किया, लेकिन संसाधनों की कमी और कुछ तकनीकी अड़चनें योजना के कार्यान्वयन में बाधा बनीं। इससे छात्रों और शिक्षकों दोनों की पढ़ाई और सीखने की प्रक्रिया प्रभावित हुई।”
शिक्षक संघ के प्रतिनिधियों का कहना है कि योजना के तहत पेश किए गए डिजिटल उपकरण और प्रशिक्षण कार्यक्रम पर्याप्त नहीं थे। उन्होंने प्रशासन से अनुरोध किया है कि जल्द से जल्द समस्याओं को हल किया जाए और योजना को सही ढंग से लागू किया जाए ताकि छात्रों को इसका वास्तविक लाभ मिल सके।
विद्यार्थियों के अभिभावकों ने भी चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि योजना के उद्देश्य और प्रचार के बावजूद स्कूल में इसके लाभ पर्याप्त रूप से दिखाई नहीं दे रहे। कई अभिभावकों ने सुझाव दिया कि बेहतर तकनीकी सहायता और शिक्षक प्रशिक्षण से स्थिति में सुधार हो सकता है।
शहर के शिक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि ‘सिख्या क्रांति’ जैसी पहलें विद्यार्थियों के शैक्षिक विकास के लिए महत्वपूर्ण हैं। हालांकि, इन पहलों की सफलता इस बात पर निर्भर करती है कि उनका कार्यान्वयन कितनी कुशलता और संसाधन के साथ किया गया है। विशेषज्ञों ने कहा कि ‘स्कूल ऑफ़ एमिनेंस’ में आई समस्याओं को जल्द से जल्द सुधारना आवश्यक है।
जालंधर शिक्षा विभाग ने मामले की गंभीरता को देखते हुए स्कूल प्रशासन और शिक्षक प्रतिनिधियों के साथ बैठक का आयोजन किया है। विभाग का कहना है कि योजना को बाधारहित ढंग से लागू करने के लिए तकनीकी और प्रशासनिक सहायता बढ़ाई जाएगी।
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