पंजाब में बाढ़ से नाव और मोटर बोट की मांग में ऐतिहासिक उछाल

Update: 2025-09-05 17:40 GMT
Chandigarh चंडीगढ़: पंजाब में बाढ़ से बिगड़े हालात ने लोगों की जिंदगी पूरी तरह बदल दी है। गांवों में पानी घुसने और कई इलाकों के टापुओं में तब्दील होने के बाद राहत और बचाव कार्यों में नाव और मोटर बोट सबसे बड़ी जरूरत बनकर उभरी हैं। यही वजह है कि राज्यभर में नाव और मोटर बोट की मांग अचानक कई गुना बढ़ गई है।
सामाजिक संगठन, समाजसेवी, एनजीओ और विदेशों में बसे एनआरआई (Non-Resident Indians) लगातार ऑर्डर दे रहे हैं, ताकि अपने गांवों तक मदद पहुंचा सकें। पंजाब सरकार ने भी नावों की खरीद और पुरानी नावों की मरम्मत के लिए ऑर्डर जारी किए हैं।
फैक्ट्रियों में बढ़ा काम का बोझ
रोपड़, फाजिल्का और अन्य जिलों की फैक्ट्रियों में मजदूर दिन-रात नाव और मोटर बोट बनाने में जुटे हैं। बिशन सिंह एंड संस फैक्ट्री, जो 1966 से इस व्यवसाय में है, इन दिनों सबसे व्यस्त हो चुकी है। 78 वर्षीय मोहन सिंह और उनके बेटे चरणजीत सिंह का कहना है कि इस बार की मांग 1988 की बाढ़ से भी कई गुना ज्यादा है।
मोहन सिंह के अनुसार,
“हमारे पास रोजाना लगभग 150 फोन कॉल आ रहे हैं। कई लोग तुरंत नाव की डिलीवरी चाहते हैं। बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए हमें अतिरिक्त मजदूर रखने पड़े हैं।”
एनआरआई और समाजसेवियों की पहल
विदेशों में बसे पंजाबी एनआरआई बड़ी संख्या में नावें खरीदकर अपने गांव भेज रहे हैं। उनका मकसद बाढ़ प्रभावित परिवारों तक राशन, दवाइयां और पशुओं के लिए चारा पहुंचाना है। समाजसेवी भी स्थानीय स्तर पर नावें खरीदकर फंसे लोगों तक मदद पहुंचाने में लगे हैं।
सरकार भी सक्रिय
पंजाब सरकार ने नावों की मांग देखते हुए कई ऑर्डर जारी किए हैं। इसके अलावा, पुरानी नावों की मरम्मत और मेंटेनेंस भी कराई जा रही है, ताकि राहत कार्यों में तेजी लाई जा सके।
ऐतिहासिक स्तर पर बढ़ी मांग
विशेषज्ञों का कहना है कि 1988 की बाढ़ में भी इतनी बड़ी संख्या में नावों की जरूरत नहीं पड़ी थी। इस बार हालात ज्यादा गंभीर हैं और कई इलाकों में पानी उतरने के आसार अभी कम दिखाई दे रहे हैं। फैक्ट्रियों के मालिकों का कहना है कि अगर बारिश और पानी का स्तर इसी तरह बढ़ता रहा, तो नावों की मांग और दोगुनी हो सकती है।
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