जालंधर। खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता बरकरार रखने और मिलावटी व निम्नस्तरीय पनीर तैयार करने वालों पर शिकंजा कसने के उद्देश्य से फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (एफडीए) पंजाब के निर्देश पर विशेष सैंपलिंग अभियान चलाया गया। फूड सेफ्टी टीम ने जालंधर शहर, जालंधर छावनी और रामा मंडी इलाके में छापेमारी की। अभियान के दौरान 75 किलो संदिग्ध पनीर सामने आया और पनीर सहित खाद्य पदार्थों के कुल 14 सैंपल लिए गए। संदिग्ध पनीर की गुणवत्ता को लेकर अंतिम निष्कर्ष जांच रिपोर्ट के आधार पर ही स्पष्ट होगा।
सिविल सर्जन डॉ. राजेश गर्ग ने बताया कि खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए फूड सेफ्टी टीम की ओर से यह विशेष अभियान चलाया गया। सहायक कमिश्नर फूड सेफ्टी राजिंदर पाल सिंह की निगरानी में टीम ने अलग-अलग इलाकों में कार्रवाई की। अभियान में फूड सेफ्टी अफसर रशू महाजन, मुकुल गिल और रोबिन कुमार शामिल रहे। टीम ने पनीर और अन्य खाद्य पदार्थों के नमूने एकत्र किए, ताकि उनकी गुणवत्ता की जांच के आधार पर स्थिति स्पष्ट की जा सके।
इस अभियान का मुख्य उद्देश्य मिलावटी और निम्नस्तरीय पनीर तैयार करने वालों की पहचान करना है। पनीर की गुणवत्ता को लेकर संदेह होने पर नमूने लेना महत्वपूर्ण होता है, क्योंकि केवल बाहरी रंग, बनावट या दिखावट के आधार पर मिलावट की पुष्टि नहीं की जा सकती। इस कार्रवाई में भी पनीर को संदिग्ध बताया गया है। उपलब्ध जानकारी में किसी नमूने की जांच रिपोर्ट का उल्लेख नहीं है। ऐसे में बरामद या मौके पर मिले पूरे पनीर को अभी मिलावटी घोषित करना उचित नहीं होगा।
फूड सेफ्टी टीम की कार्रवाई का दायरा शहर तक सीमित नहीं रहा। जालंधर छावनी और रामा मंडी इलाके को भी विशेष सैंपलिंग अभियान में शामिल किया गया। तीनों क्षेत्रों में कार्रवाई के जरिए पनीर और अन्य खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता पर निगरानी रखी गई। हालांकि, किन प्रतिष्ठानों पर छापेमारी हुई और प्रत्येक स्थान से कितने नमूने लिए गए, इसका अलग-अलग विवरण उपलब्ध नहीं है। अभियान में कुल 14 सैंपल लिए जाने की जानकारी दी गई है।
सिविल सर्जन की ओर से साझा विवरण में 75 किलो संदिग्ध पनीर का उल्लेख किया गया है। यह मात्रा अभियान में सामने आए पनीर से संबंधित है, जबकि 14 सैंपल पनीर और अन्य खाद्य पदार्थों को मिलाकर लिए गए हैं। अन्य खाद्य पदार्थ कौन-कौन से थे, इसकी सूची नहीं दी गई है। साथ ही, संदिग्ध पनीर को जब्त करने, बिक्री रोकने या नष्ट करने की किसी कार्रवाई का स्पष्ट उल्लेख भी उपलब्ध विवरण में नहीं है।
खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता से जुड़े अभियान में सैंपलिंग की भूमिका अहम होती है। नमूनों के परीक्षण से यह पता लगाने में मदद मिलती है कि संबंधित खाद्य पदार्थ निर्धारित गुणवत्ता के अनुरूप है या नहीं। इस मामले में आगे की स्थिति भी नमूनों की जांच के परिणामों पर निर्भर करेगी। फिलहाल टीम की कार्रवाई को संदिग्ध खाद्य पदार्थों की पहचान और उनकी गुणवत्ता के परीक्षण की प्रक्रिया के रूप में देखा जाना चाहिए। किसी प्रतिष्ठान के खिलाफ अंतिम निष्कर्ष का विवरण अभी सामने नहीं आया है।
एफडीए पंजाब की ओर से चलाए गए इस अभियान में पनीर तैयार करने वालों पर विशेष ध्यान दिया गया। उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि लोगों तक गुणवत्तापूर्ण खाद्य पदार्थ पहुंचें। पनीर कई तरह के व्यंजनों में इस्तेमाल होता है और इसकी खरीद घरेलू उपभोक्ताओं के साथ भोजन तैयार करने वाले प्रतिष्ठान भी करते हैं। इसलिए इसकी गुणवत्ता से जुड़ा सवाल आपूर्ति के विभिन्न स्तरों पर महत्व रखता है। हालांकि, इस कार्रवाई में पकड़े गए पनीर की आपूर्ति कहां होनी थी, इसकी जानकारी नहीं दी गई है।
सहायक कमिश्नर राजिंदर पाल सिंह की निगरानी और तीन फूड सेफ्टी अधिकारियों की भागीदारी में अभियान संचालित हुआ। अधिकारियों ने अलग-अलग क्षेत्रों से नमूने लेकर खाद्य गुणवत्ता की निगरानी की प्रक्रिया आगे बढ़ाई। कार्रवाई की जानकारी सिविल सर्जन डॉ. राजेश गर्ग ने साझा की। उपलब्ध विवरण में किसी व्यक्ति की गिरफ्तारी, जुर्माना लगाए जाने या किसी प्रतिष्ठान को बंद करने का उल्लेख नहीं है। इसलिए इस अभियान के संबंध में अभी छापेमारी, संदिग्ध पनीर और नमूनों तक की जानकारी ही स्पष्ट है।
इस कार्रवाई में आगे सबसे महत्वपूर्ण पहलू 14 नमूनों की जांच के नतीजे होंगे। रिपोर्ट से संबंधित खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता स्पष्ट हो सकेगी। अभी यह नहीं बताया गया है कि परिणाम कब तक उपलब्ध होंगे। जांच के निष्कर्ष सामने आने से पहले संदिग्ध पनीर और प्रमाणित मिलावटी पनीर के बीच अंतर बनाए रखना जरूरी है। टीम ने संदेह के आधार पर नमूने लिए हैं और गुणवत्ता संबंधी पुष्टि परीक्षण के बाद ही की जा सकेगी।
जालंधर शहर, छावनी और रामा मंडी में चलाया गया विशेष अभियान खाद्य गुणवत्ता की निगरानी से जुड़ी कार्रवाई है। इसमें 75 किलो संदिग्ध पनीर का उल्लेख और खाद्य पदार्थों के 14 नमूने लिए जाना प्रमुख तथ्य हैं। अब नमूनों के परिणाम से स्पष्ट होगा कि संबंधित सामग्री गुणवत्ता की कसौटी पर खरी उतरती है या नहीं। अभियान का उद्देश्य मिलावटी और निम्नस्तरीय पनीर तैयार करने वालों पर सख्ती करना तथा खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता बरकरार रखना है।