चंडीगढ़। पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने पानीपत के उरलाना कलां में 12 वर्षीय बच्ची के अपहरण, सामूहिक दुष्कर्म और हत्या के जघन्य मामले में बड़ा फैसला सुनाया है। हाई कोर्ट ने इस मामले में सत्र अदालत की ओर से सुनाई गई दो दोषियों की फांसी की सजा को रद कर दिया है। साथ ही मामले को नए सिरे से सुनवाई के लिए सत्र अदालत में भेज दिया गया है।

हाई कोर्ट के इस फैसले के बाद अब निचली अदालत में इस मामले की दोबारा सुनवाई होगी। अदालत ने मामले में कानूनी प्रक्रिया और सुनवाई से जुड़े पहलुओं को ध्यान में रखते हुए यह निर्णय लिया है। हालांकि, दोषियों के खिलाफ आरोप और मामले की गंभीरता पर अंतिम फैसला नए ट्रायल के बाद ही तय होगा।

मामला पानीपत जिले के उरलाना कलां गांव का है, जहां 12 वर्षीय बच्ची के अपहरण, सामूहिक दुष्कर्म और हत्या की घटना ने पूरे क्षेत्र को झकझोर दिया था। घटना के बाद पुलिस ने जांच शुरू की थी और आरोपियों को गिरफ्तार कर अदालत में पेश किया गया था।

जांच के बाद पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ गंभीर धाराओं में मामला दर्ज किया था। सत्र अदालत में चली सुनवाई के दौरान दोष सिद्ध होने पर दो आरोपियों को फांसी की सजा सुनाई गई थी। अदालत ने इस अपराध को बेहद गंभीर और दुर्लभतम श्रेणी का मानते हुए मृत्युदंड का फैसला दिया था।

सत्र अदालत के फैसले के बाद मामला हाई कोर्ट पहुंचा। हाई कोर्ट में दोषियों की ओर से सजा और ट्रायल से जुड़े विभिन्न कानूनी पहलुओं को चुनौती दी गई थी। सुनवाई के बाद हाई कोर्ट ने फांसी की सजा को रद करते हुए मामले को दोबारा विचार के लिए सत्र अदालत भेजने का आदेश दिया।

हाई कोर्ट के आदेश के अनुसार, अब सत्र अदालत में मामले की नए सिरे से सुनवाई होगी। इस दौरान अभियोजन और बचाव पक्ष को अपने-अपने पक्ष रखने का अवसर मिलेगा। अदालत सभी तथ्यों, साक्ष्यों और कानूनी पहलुओं की नए सिरे से समीक्षा करेगी।

कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, किसी मामले में हाई कोर्ट द्वारा मृत्युदंड को रद कर ट्रायल कोर्ट भेजने का मतलब यह नहीं होता कि आरोपी दोषमुक्त हो गए हैं। इसका अर्थ है कि मामले की सुनवाई में कुछ कानूनी या प्रक्रियात्मक पहलुओं को दोबारा जांचने की आवश्यकता महसूस हुई है।

इस घटना के बाद क्षेत्र में काफी आक्रोश देखने को मिला था। बच्ची के साथ हुई वारदात को लेकर लोगों ने आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की थी। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस और जांच एजेंसियों ने तेजी से कार्रवाई की थी।

पीड़ित पक्ष की नजर अब नए सिरे से होने वाली सुनवाई पर है। परिवार और स्थानीय लोगों की मांग है कि मामले में जल्द सुनवाई पूरी कर दोषियों को कड़ी सजा दी जाए।

हाई कोर्ट के फैसले के बाद अब सत्र अदालत को मामले की आगे की प्रक्रिया पूरी करनी होगी। नए ट्रायल में पहले से उपलब्ध साक्ष्यों के साथ-साथ सभी संबंधित पहलुओं पर विचार किया जाएगा।

इस मामले ने एक बार फिर गंभीर अपराधों में न्यायिक प्रक्रिया की भूमिका और कानूनी प्रावधानों पर चर्चा को तेज कर दिया है। अदालतों में ऐसे मामलों में दोष सिद्धि, सजा और न्यायिक प्रक्रिया के सभी पहलुओं को बेहद सावधानी से देखा जाता है।

फिलहाल, हाई कोर्ट के आदेश के बाद यह मामला दोबारा सत्र अदालत में पहुंचेगा और आगे की सुनवाई के बाद ही दोषियों की सजा को लेकर अंतिम स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

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