Gurdaspur:इस समय सूखी और हल्की ठंड का दौर जारी है। पिछले कई दिनों से बारिश न होने के कारण सर्दी ने अभी तक पूरी तरह दस्तक नहीं दी है, हालांकि तापमान में लगातार गिरावट दर्ज की जा रही है। बारिश की कमी के कारण आसमान में धूल और मिट्टी के कण छाए रहते हैं, जिसका सीधा असर हवा की गुणवत्ता पर पड़ रहा है। जिले के भीतर दोपहर से पहले हवा गुणवत्ता सूचकांक 200 से ऊपर दर्ज किया गया, जबकि दोपहर बाद यह लगभग 150 के आस-पास रहा।
हवा गुणवत्ता के ये दोनों स्तर मानवीय स्वास्थ्य के लिए हानिकारक माने जाते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार बारिश न होने से धूल के बारीक कण हवा में बढ़ जाते हैं, जिस कारण प्रदूषण में इजाफा हो रहा है। इस क्षेत्र के भीतर का औसत तापमान 22 डिग्री सैंटीग्रेड के करीब दर्ज किया जा रहा है, जबकि रात का तापमान 8 से 9 डिग्री सैंटीग्रेड के करीब ही है। आने वाले पूरे हफ्ते तापमान इसी के आस-पास रहने की संभावना है और लोगों को घनी धुंध का सामना करना पड़ सकता है। मौसम विभाग अनुसार आने वाले दिनों में बारिश की ज्यादा संभावना नहीं बताई जा रही पर कुछ दिनों के दौरान बादल छाए रहने के कारण तापमान में गिरावट आ सकती है।
बारिश की कमी के कारण किसानों को फसलों की सिंचाई के लिए ट्यूबवेलों और नहरी पानी पर निर्भर रहना पड़ रहा है। खास करके गेहूं, सरसों और अन्य रबी फसलों के लिए नमी की जरूरत होती है। मौजूदा सूखे मौसम के कारण जहां मिट्टी में नमी घट रही है, वहीं फसल की शुरुआती वृद्धि पर भी असर पड़ सकता है। खेती विशेषज्ञों ने किसानों को सलाह दी है कि वे जरूरत अनुसार ही फसल की सिंचाई करें और ज्यादा भारी पानी देने से परहेज करें, ताकि मिट्टी की बनावट खराब न हो और फसलों को नुकसान न पहुंचे। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि आने वाले दिनों में भी बारिश नहीं होती, तो सिंचाई की योजना समझदारी से बनाना बहुत जरूरी होगा।