पंजाब में गहराता भूजल संकट, खतरे की आखिरी दहलीज पर पहुंचा पानी
पंजाब का पानी संकट
PUNJAB: तेजी से गिरता भूजल स्तर अब गंभीर चिंता का विषय बन गया है। राज्य में पानी के अत्यधिक दोहन के कारण हालात लगातार बिगड़ रहे हैं। रिपोर्ट के अनुसार, पंजाब में भूजल का इस्तेमाल तय सीमा से 56 प्रतिशत अधिक हो चुका है। राज्य के 111 ब्लॉक रेड जोन में पहुंच गए हैं, जहां भूजल का दोहन प्राकृतिक पुनर्भरण (Recharge) की क्षमता से कहीं ज्यादा हो रहा है।
कभी देश का अन्न भंडार कहलाने वाला पंजाब अब जल संकट की चुनौती का सामना कर रहा है। कृषि में ट्यूबवेल पर बढ़ती निर्भरता, धान की अधिक खेती और भूजल रिचार्ज में कमी ने स्थिति को और गंभीर बना दिया है।
111 ब्लॉक पहुंचे रेड जोन में
भूजल की स्थिति का आकलन करने वाली रिपोर्टों के अनुसार, पंजाब के कई हिस्सों में भूजल स्तर लगातार नीचे जा रहा है। राज्य के बड़ी संख्या में ब्लॉक ऐसे हैं जहां पानी निकालने की दर बहुत अधिक हो गई है।
रेड जोन का मतलब है कि इन क्षेत्रों में भूजल का दोहन इतना अधिक हो चुका है कि भविष्य में जल संकट की स्थिति गंभीर हो सकती है।
तय सीमा से 56 फीसदी ज्यादा दोहन
भूजल दोहन का स्तर तब चिंताजनक माना जाता है जब पानी निकालने की मात्रा उसके प्राकृतिक पुनर्भरण से अधिक हो जाती है। पंजाब में कृषि और घरेलू जरूरतों के लिए बड़े पैमाने पर भूजल निकाला जा रहा है।
धान जैसी अधिक पानी वाली फसल की खेती के कारण गर्मियों में लाखों ट्यूबवेल लगातार चलते हैं, जिससे जमीन के अंदर मौजूद पानी तेजी से कम हो रहा है।
धान की खेती बनी बड़ी वजह
पंजाब की कृषि अर्थव्यवस्था लंबे समय से धान और गेहूं की फसल पर आधारित रही है। हालांकि, धान की खेती में अधिक पानी की जरूरत होती है।
किसान सिंचाई के लिए मुख्य रूप से ट्यूबवेल पर निर्भर रहते हैं। इससे भूजल स्तर पर लगातार दबाव बढ़ा है।
किन कारणों से बढ़ रहा जल संकट?
पंजाब में भूजल संकट के पीछे कई कारण जिम्मेदार माने जा रहे हैं—
धान की अधिक खेती।
बारिश के पानी का पर्याप्त संरक्षण न होना।
भूजल रिचार्ज की धीमी गति।
ट्यूबवेल की बढ़ती संख्या।
शहरीकरण और कंक्रीट का विस्तार।
जल संरक्षण उपायों की कमी।
किसानों के सामने बढ़ी चुनौती
भूजल स्तर गिरने का सीधा असर किसानों पर पड़ रहा है। कई क्षेत्रों में अब पहले की तुलना में अधिक गहराई तक बोरवेल लगाने पड़ रहे हैं, जिससे खेती की लागत बढ़ रही है।
छोटे किसानों के लिए महंगी सिंचाई व्यवस्था बड़ी समस्या बन सकती है।
सरकार के सामने बड़ी चुनौती
राज्य सरकार के लिए सबसे बड़ी चुनौती किसानों की आय और जल संरक्षण के बीच संतुलन बनाना है। इसके लिए सरकार की ओर से जल बचाने वाली तकनीकों, फसल विविधीकरण और सूक्ष्म सिंचाई को बढ़ावा देने की कोशिश की जा रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि केवल योजनाएं बनाना पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि जमीन पर प्रभावी तरीके से लागू करना भी जरूरी है।
फसल विविधीकरण पर जोर
भूजल संकट को कम करने के लिए विशेषज्ञ धान के विकल्प के रूप में कम पानी वाली फसलों को बढ़ावा देने की सलाह देते हैं।
मक्का, दालें, तिलहन और अन्य वैकल्पिक फसलों की खेती से पानी की खपत कम की जा सकती है।
बारिश के पानी को बचाने की जरूरत
विशेषज्ञों का कहना है कि पंजाब में वर्षा जल संरक्षण और भूजल रिचार्ज के उपायों को बड़े स्तर पर लागू करने की जरूरत है।
तालाबों, जलाशयों और पारंपरिक जल स्रोतों का संरक्षण भी भूजल स्तर सुधारने में मदद कर सकता है।
आने वाले समय के लिए चेतावनी
यदि भूजल दोहन की मौजूदा गति जारी रही तो आने वाले वर्षों में पंजाब के कई इलाकों में पीने के पानी और खेती दोनों पर गंभीर असर पड़ सकता है।
जल विशेषज्ञों का कहना है कि अभी भी समय है कि पानी के उपयोग को नियंत्रित किया जाए और टिकाऊ कृषि मॉडल अपनाया जाए।