अमृतसर। फिल्मी दुनिया में कदम रखने और एक्ट्रेस बनने का सपना लेकर जम्मू से घर छोड़कर निकलीं दो नाबालिग छात्राएं मुंबई पहुंचने के बजाय अमृतसर रेलवे स्टेशन पहुंच गईं। करीब 17 वर्ष की दोनों छात्राओं ने मुंबई जाने की योजना बनाई थी, लेकिन जालंधर से गलत ट्रेन में बैठने के कारण उनका रास्ता बदल गया और वे अमृतसर पहुंच गईं।

जानकारी के मुताबिक, दोनों छात्राएं जम्मू की रहने वाली हैं। दोनों एक्ट्रेस बनना चाहती थीं और अपने इसी सपने को पूरा करने के लिए मुंबई जाने की तैयारी कर रही थीं। उन्होंने घर से निकलने के बाद जम्मू से पहले जालंधर पहुंचने की योजना बनाई।

दोनों छात्राएं घर से निकलकर जम्मू से जालंधर तक पहुंचने में सफल रहीं। जालंधर पहुंचने के बाद उन्हें मुंबई जाने वाली ट्रेन पकड़नी थी। यहीं उनसे गलती हो गई और मुंबई की तरफ जाने वाली ट्रेन में सवार होने के बजाय दोनों अमृतसर की ओर आने वाली ट्रेन में बैठ गईं।

ट्रेन आगे बढ़ने के बाद उन्हें अपने गलत दिशा में जाने का पता चला। इस तरह मुंबई जाने का सपना लेकर घर से निकली दोनों छात्राएं आखिरकार अमृतसर रेलवे स्टेशन पहुंच गईं।

दोनों नाबालिग थीं और घर से काफी दूर निकल चुकी थीं। ऐसे में उनके अमृतसर पहुंचने के बाद मामला उनकी सुरक्षा से भी जुड़ गया। किशोरावस्था में बिना परिवार को बताए इतनी लंबी यात्रा करना कई तरह के जोखिम पैदा कर सकता था।

दोनों छात्राओं की उम्र करीब 17 वर्ष बताई गई है। उन्होंने फिल्मी दुनिया में करियर बनाने के इरादे से मुंबई जाने का फैसला किया था। इसके लिए उन्होंने घर छोड़ने तक का कदम उठा लिया।

मुंबई देश के फिल्म और मनोरंजन उद्योग का प्रमुख केंद्र है। फिल्मों और टीवी में काम करने की इच्छा रखने वाले बड़ी संख्या में युवा मुंबई पहुंचते हैं। दोनों छात्राओं के मन में भी एक्ट्रेस बनने की इच्छा थी और इसी वजह से उन्होंने मुंबई जाने की योजना बनाई।

हालांकि मुंबई तक पहुंचने से पहले ही उनकी यात्रा का रास्ता बदल गया। जालंधर रेलवे स्टेशन पर ट्रेन की पहचान करने में हुई गलती उन्हें अमृतसर ले आई।

घटना यह भी बताती है कि नाबालिग बच्चों का बिना परिवार या किसी जिम्मेदार व्यक्ति के लंबी दूरी की यात्रा पर निकलना कितना जोखिमपूर्ण हो सकता है। अनजान शहर में पहुंचने के बाद उन्हें रहने, खाने और सुरक्षित स्थान की व्यवस्था करने में परेशानी हो सकती थी।

इसके अलावा रेलवे स्टेशनों और अन्य सार्वजनिक स्थानों पर नाबालिगों के अकेले होने की स्थिति में उनकी सुरक्षा का मुद्दा भी महत्वपूर्ण हो जाता है। किसी अनजान व्यक्ति के संपर्क में आने या गलत जानकारी के आधार पर कहीं और चले जाने से जोखिम बढ़ सकता है।

दोनों छात्राओं के मामले में जालंधर तक पहुंचने के बाद ही उनकी यात्रा योजना से भटक गई। उन्हें मुंबई की ओर जाने वाली ट्रेन पकड़नी थी, लेकिन गलती से अमृतसर जाने वाली ट्रेन में सवार हो गईं।

ट्रेन में बैठने के बाद वे अमृतसर पहुंच गईं। जम्मू से शुरू हुई उनकी यात्रा का उद्देश्य मुंबई जाना था, लेकिन गलत ट्रेन ने उन्हें पंजाब के अमृतसर पहुंचा दिया।

छात्राओं का इस तरह घर से निकल जाना परिवार के लिए भी चिंता का कारण बना। नाबालिग बच्चों के अचानक लापता होने पर परिवार के सामने सबसे बड़ी चिंता उनकी सुरक्षा को लेकर होती है।

फिल्मों में काम करने और अभिनेत्री बनने का सपना देखना दोनों छात्राओं को घर से सैकड़ों किलोमीटर दूर तक ले आया। हालांकि उन्होंने जिस तरह अकेले यात्रा शुरू की, उससे उनकी सुरक्षा को लेकर गंभीर खतरा पैदा हो सकता था।

ऐसे मामलों में बच्चों और किशोरों के साथ संवाद महत्वपूर्ण माना जाता है। करियर और भविष्य को लेकर उनकी इच्छाओं को समझने के साथ उन्हें सही प्रक्रिया, प्रशिक्षण और सुरक्षित विकल्पों की जानकारी देना जरूरी होता है।

फिल्म और मनोरंजन उद्योग में करियर बनाने के लिए अभिनय प्रशिक्षण, ऑडिशन और अन्य पेशेवर प्रक्रियाएं होती हैं। नाबालिगों के मामले में परिवार या अभिभावकों की भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो जाती है।

घर छोड़कर किसी अनजान शहर में पहुंचना करियर बनाने का सुरक्षित तरीका नहीं माना जा सकता। खासकर नाबालिग लड़कियों के लिए अनजान शहर में अकेले रहना कई तरह के सुरक्षा जोखिम पैदा कर सकता है।

दोनों छात्राओं ने संभवतः यह सोचा था कि मुंबई पहुंचने के बाद वे अपने अभिनेत्री बनने के सपने की दिशा में आगे बढ़ सकेंगी। लेकिन यात्रा के शुरुआती चरण में ही ट्रेन बदलने के दौरान हुई गलती से उनकी योजना पूरी तरह बदल गई।

जम्मू से जालंधर और फिर जालंधर से अमृतसर तक पहुंचने के दौरान दोनों अपने घर से काफी दूर निकल चुकी थीं। उन्हें मुंबई जाना था, लेकिन ट्रेन के रूट की सही जानकारी नहीं होने के कारण वे विपरीत दिशा में पहुंच गईं।

अमृतसर रेलवे स्टेशन जैसे व्यस्त स्थान पर पहुंचने के बाद दोनों छात्राओं की स्थिति ने ध्यान खींचा। कम उम्र और अकेले यात्रा करने के कारण उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करना सबसे महत्वपूर्ण था।

घटना में किसी अपराध या किसी व्यक्ति द्वारा छात्राओं को बहला-फुसलाकर ले जाने की जानकारी सामने नहीं आई है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार दोनों ने एक्ट्रेस बनने के अपने सपने के कारण स्वयं घर से निकलकर मुंबई जाने की योजना बनाई थी।

इस घटना ने एक बार फिर बच्चों और किशोरों के साथ करियर संबंधी आकांक्षाओं पर खुलकर बातचीत करने की जरूरत को सामने रखा है। कई बार युवा फिल्मों और मनोरंजन जगत से प्रभावित होकर जल्दबाजी में बड़े फैसले कर लेते हैं।

अभिभावकों के लिए भी जरूरी है कि बच्चों की रुचियों को समझें और उन्हें सुरक्षित तथा व्यावहारिक रास्ता दिखाएं। अभिनय में रुचि रखने वाले बच्चों को प्रशिक्षण और परिवार की देखरेख में अवसर तलाशने के लिए प्रोत्साहित किया जा सकता है।

दोनों छात्राओं की यात्रा जम्मू से शुरू हुई थी। उनका लक्ष्य मुंबई था और इसके लिए वे जालंधर तक पहुंच गई थीं। वहां से उन्हें मुंबई की ट्रेन पकड़नी थी, लेकिन गलती से अमृतसर जाने वाली ट्रेन में बैठ गईं।

इस तरह मायानगरी मुंबई में अभिनेत्री बनने का सपना लेकर निकलीं दोनों नाबालिग छात्राओं का सफर फिलहाल अमृतसर रेलवे स्टेशन तक ही पहुंच सका। घटना में सबसे अहम पहलू दोनों नाबालिगों की सुरक्षा और उन्हें सुरक्षित तरीके से परिवार तक पहुंचाना है।

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