चंडीगढ़ : सरकारी स्वास्थ्य सुविधाओं के बीच मरीजों को एक अस्पताल से दूसरे अस्पताल के चक्कर लगाने की परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। खासकर एंडोस्कोपी जैसी महत्वपूर्ण जांच के लिए मरीजों को पहले सेक्टर-16 स्थित सरकारी अस्पताल, फिर गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल (GMCH) और जरूरत पड़ने पर PGI तक जाना पड़ रहा है। इससे मरीजों और उनके परिजनों की परेशानी बढ़ रही है।

पेट और पाचन तंत्र से जुड़ी कई बीमारियों का पता लगाने के लिए डॉक्टर एंडोस्कोपी जांच की सलाह देते हैं। इस जांच के जरिए भोजन नली, पेट और पाचन तंत्र के ऊपरी हिस्से में मौजूद समस्याओं का पता लगाया जाता है। लेकिन सरकारी अस्पताल में जांच की सुविधा आसानी से नहीं मिलने या मरीजों का दबाव अधिक होने की स्थिति में उन्हें दूसरे बड़े अस्पतालों में रेफर किया जा रहा है।
सबसे ज्यादा परेशानी उन मरीजों को होती है, जो पहले सेक्टर-16 के अस्पताल में इलाज के लिए पहुंचते हैं। डॉक्टर की सलाह के बाद एंडोस्कोपी की जरूरत पड़ने पर उन्हें दूसरे संस्थान भेजा जाता है। वहां भी तत्काल जांच नहीं होने की स्थिति में मरीज को PGI का रुख करना पड़ सकता है। इस पूरी प्रक्रिया में मरीज और उसके परिजन कई बार अलग-अलग अस्पतालों के बीच दौड़ लगाने को मजबूर हो जाते हैं।
मरीजों के लिए परेशानी केवल अस्पताल बदलने तक सीमित नहीं रहती। नए अस्पताल में पहुंचने के बाद पंजीकरण, डॉक्टर से परामर्श, पुरानी रिपोर्ट दिखाने और जांच के लिए तारीख लेने जैसी प्रक्रियाओं से दोबारा गुजरना पड़ सकता है। गंभीर बीमारी से जूझ रहे मरीजों और बुजुर्गों के लिए यह स्थिति और मुश्किल हो जाती है। PGI और GMCH जैसे बड़े संस्थानों पर पहले से ही मरीजों का भारी दबाव रहता है। चंडीगढ़ के अलावा पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश और आसपास के अन्य क्षेत्रों से भी बड़ी संख्या में मरीज यहां इलाज के लिए पहुंचते हैं। ऐसे में सामान्य जांच और विशेषज्ञ सेवाओं के लिए प्रतीक्षा बढ़ने से स्थानीय मरीजों को भी लंबा इंतजार करना पड़ सकता है।
स्वास्थ्य सुविधाओं की व्यवस्था में रेफरल सिस्टम का उद्देश्य मरीज को बेहतर और विशेषज्ञ उपचार उपलब्ध कराना होता है। हालांकि यदि सामान्य या नियमित जांच के लिए भी मरीज को कई संस्थानों के बीच जाना पड़े तो यह व्यवस्था उसके लिए परेशानी का कारण बन सकती है। मरीजों को उम्मीद रहती है कि जरूरी जांच उसी अस्पताल में उपलब्ध हो, जहां उनका प्राथमिक उपचार चल रहा है।
एंडोस्कोपी जांच की पर्याप्त सुविधा और प्रशिक्षित स्टाफ उपलब्ध होने से बड़े अस्पतालों पर पड़ने वाले अतिरिक्त दबाव को कम किया जा सकता है। इसके साथ ही मरीजों के लिए जांच की तारीख, रेफरल और रिपोर्ट से जुड़ी प्रक्रिया को बेहतर तरीके से समन्वित करने की जरूरत भी महसूस की जा रही है। फिलहाल एंडोस्कोपी के लिए एक अस्पताल से दूसरे अस्पताल भेजे जाने से मरीजों की मुश्किलें बढ़ रही हैं। ऐसे में सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों के बीच बेहतर समन्वय और जांच सुविधाओं के विस्तार से मरीजों को राहत मिल सकती है।
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