चंडीगढ़: ऐतिहासिक विरासत से जुड़े फर्नीचर को विदेश में नीलाम होने से बचाने के लिए प्रशासन के प्रयासों को बड़ी सफलता मिली है। चंडीगढ़ प्रशासन के हस्तक्षेप के बाद स्पेन में 22 जुलाई को प्रस्तावित हेरिटेज फर्नीचर की नीलामी को रोक दिया गया है। इससे पहले प्रशासन ने फ्रांस के पेरिस में होने वाली ऐसी ही नीलामी को भी रुकवाने में सफलता हासिल की थी। अब प्रशासन इन ऐतिहासिक वस्तुओं को भारत वापस लाने की दिशा में प्रयास कर रहा है।
चंडीगढ़ प्रशासन के संस्कृति विभाग ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए विदेश मंत्रालय से राजनयिक स्तर पर हस्तक्षेप की मांग की थी। विभाग ने अमेरिका और स्पेन में प्रस्तावित नीलामी को तत्काल रोकने तथा वहां मौजूद फर्नीचर को वापस भारत लाने के लिए आवश्यक कार्रवाई करने का अनुरोध किया था। प्रशासन का कहना है कि नीलामी के लिए रखे गए फर्नीचर पर सरकारी स्टेंसिल और पहचान चिह्न मौजूद हैं, जिससे यह संभावना जताई जा रही है कि यह चंडीगढ़ स्थित सरकारी भवनों की संपत्ति का हिस्सा रहा है।
प्रशासन के अनुसार, यह फर्नीचर केवल सामान्य सामान नहीं है, बल्कि चंडीगढ़ की स्थापत्य और सांस्कृतिक विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा है। शहर की डिजाइनिंग और वास्तुकला से जुड़े कई फर्नीचर प्रसिद्ध फ्रांसीसी वास्तुकार Le Corbusier और उनके सहयोगियों की सोच से जुड़े रहे हैं। चंडीगढ़ को यूनेस्को विश्व धरोहर वास्तुकला के रूप में पहचान मिली हुई है और यहां के हेरिटेज फर्नीचर को इसी विरासत का अहम प्रतीक माना जाता है।
चंडीगढ़ प्रशासन ने अपने पत्र में कहा था कि सरकारी संपत्ति को बिना अनुमति विदेश ले जाना नियमों का उल्लंघन है। प्रशासन का दावा है कि यह फर्नीचर पूर्व पंजाब विधानसभा सदस्य ब्लॉक सहित अन्य सरकारी परिसरों का हिस्सा रहा हो सकता है। इस संबंध में प्रशासन ने पुलिस में मामला भी दर्ज कराया है और पूरे मामले की जांच की जा रही है।
इससे पहले 25 जून को पेरिस में होने वाली हेरिटेज फर्नीचर की नीलामी को भी प्रशासन के प्रयासों से रोका गया था। उस नीलामी में पंजाब यूनिवर्सिटी और पीजीआई चंडीगढ़ से जुड़े फर्नीचर शामिल होने की बात सामने आई थी। प्रशासन के अनुसार, पिछले कई वर्षों में चंडीगढ़ का करोड़ों रुपये का हेरिटेज फर्नीचर विदेशों में नीलाम हो चुका है, जिसके बाद अब इन वस्तुओं को बचाने के लिए विशेष अभियान चलाया जा रहा है।
हेरिटेज संरक्षण से जुड़े लोगों की ओर से लंबे समय से इस मुद्दे को उठाया जाता रहा है। पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट के अधिवक्ता और विरासत संरक्षण कार्यकर्ता अजय जग्गा कई बार विदेशों में होने वाली नीलामी को लेकर शिकायतें दर्ज कराते रहे हैं। हालांकि इस वर्ष प्रशासन ने सक्रिय भूमिका निभाते हुए नीलामी रोकने और फर्नीचर को वापस लाने की प्रक्रिया शुरू की है।
प्रशासनिक अधिकारियों के मुताबिक, स्पेन में नीलामी रुकने के बाद अब अगला लक्ष्य इन ऐतिहासिक वस्तुओं को भारत वापस लाना है। इसके लिए कानूनी और राजनयिक प्रक्रिया पर काम किया जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि चंडीगढ़ की विरासत को संरक्षित करना प्रशासन की प्राथमिकता है और भविष्य में ऐसे मामलों को रोकने के लिए भी ठोस कदम उठाए जाएंगे।
चंडीगढ़ के हेरिटेज फर्नीचर को लेकर प्रशासन की यह पहल शहर की ऐतिहासिक पहचान और सांस्कृतिक संपदा को सुरक्षित रखने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।