सरोवरों का शहर Amritsar, पारंपरिक खोहों की पुनर्स्थापना शुरू

Update: 2026-04-25 08:53 GMT
Punjab.पंजाब: पंजाब में अपने प्राचीन सरोवरों और ऐतिहासिक जल स्त्रोतों के लिए प्रसिद्ध अमृतसर में शहर की पानी की विरासत को पुनर्जीवित करने का प्रयास शुरू कर दिया गया है। नगर निगम और स्थानीय प्रशासन ने मिलकर शहर में पुराने ‘खोहों’ और जल स्त्रोतों को फिर से बनाने और संरक्षित करने की योजना तैयार की है। यह पहल शहर की ऐतिहासिक पहचान को संजोने के साथ-साथ पर्यावरण और जल संरक्षण के महत्व को भी उजागर करती है।
अमृतसर को सदियों से ‘सरोवरों का शहर’ कहा जाता रहा है। शहर में स्थित विभिन्न तालाब, सरोवर और कूहे स्थानीय लोगों के लिए पानी का मुख्य स्रोत रहे हैं। लेकिन समय के साथ शहरीकरण और अनियंत्रित निर्माण के कारण कई खोह और जल स्रोत बंद या भूले हुए हैं। प्रशासन अब इन्हें पुनर्जीवित करने के लिए विशेष योजना के तहत कदम उठा रहा है।
नगर निगम के अधिकारियों ने बताया कि इस योजना के तहत पुराने खोहों की पहचान, उनकी सफाई, संरचना की मरम्मत और उन्हें सार्वजनिक उपयोग के लिए सुरक्षित बनाने पर ध्यान दिया जाएगा। अधिकारी ने कहा, “हमारे लक्ष्य में न केवल इन खोहों को फिर से functional बनाना है, बल्कि शहर के लोगों को जल संरक्षण और पर्यावरण की जिम्मेदारी की समझ भी देना है।”
स्थानीय इतिहासकारों का कहना है कि अमृतसर में खोहों और सरोवरों का सामाजिक और सांस्कृतिक महत्व भी रहा है। ये स्थल न केवल पानी के स्रोत रहे हैं बल्कि लोगों की बैठक और सामाजिक मेलजोल का केंद्र भी रहे हैं। अब इनकी पुनर्स्थापना शहर की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत को फिर से जीवित करने का एक प्रयास है।
शहरवासियों ने भी इस पहल का स्वागत किया है। कई लोगों का कहना है कि यह परियोजना शहर की हरित छवि और पर्यावरण संरक्षण के लिए महत्वपूर्ण साबित होगी। बच्चों और युवा वर्ग को इन खोहों के माध्यम से पानी की महत्ता और पारंपरिक जल प्रबंधन की जानकारी दी जाएगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे ऐतिहासिक जल स्त्रोतों को पुनर्जीवित करने से शहरी जल संकट को भी कम किया जा सकता है। यह परियोजना अमृतसर में सतत विकास और जल सुरक्षा की दिशा में एक मिसाल साबित हो सकती है।
नगर निगम ने बताया कि इस परियोजना में स्थानीय समुदाय की भागीदारी भी सुनिश्चित की जाएगी। वे खोहों की देखभाल, सफाई और सुरक्षा में सक्रिय भूमिका निभाएंगे। साथ ही, पर्यटकों और शहरवासियों को इन खोहों के इतिहास और महत्व के बारे में जानकारी देने के लिए सूचना बोर्ड और मार्गदर्शन भी प्रदान किया जाएगा।
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