भुवनेश्वर। उपमुख्यमंत्री प्रवती परिदा ने महिला सशक्तिकरण को लेकर बड़ा संदेश देते हुए कहा कि अब महिलाओं को केवल कल्याणकारी योजनाओं की लाभार्थी के रूप में देखने की सोच से आगे बढ़ने की जरूरत है। महिलाओं को विकास प्रक्रिया में सहयोगी, नेतृत्वकर्ता और परिवर्तन को आगे बढ़ाने वाली शक्ति के रूप में स्वीकार किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि राज्य को विकसित बनाने और विकसित भारत के राष्ट्रीय लक्ष्य को हासिल करने में महिला-नेतृत्व वाला विकास केंद्रीय भूमिका निभाएगा।
प्रवती परिदा रविवार को 'द न्यू इंडियन एक्सप्रेस' (TNIE) की ओर से आयोजित 'देवी अवार्ड' समारोह को संबोधित कर रही थीं। कार्यक्रम में अलग-अलग क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान देने वाली महिलाओं और उनके प्रयासों को सम्मानित किया गया। इस दौरान TNIE के एडिटोरियल डायरेक्टर प्रभु चावला और ग्रुप CEO लक्ष्मी मेनन भी मौजूद रहे।
उपमुख्यमंत्री ने कहा कि महिलाओं के लिए बनाई जाने वाली योजनाएं महत्वपूर्ण हैं, लेकिन महिला सशक्तिकरण को केवल योजनाओं और सहायता तक सीमित नहीं किया जा सकता। वास्तविक बदलाव तब आएगा, जब महिलाएं आर्थिक, सामाजिक और प्रशासनिक विकास की प्रक्रिया में बराबर की भागीदार बनेंगी और नेतृत्वकारी भूमिकाओं में आगे आएंगी।
महिलाओं के नेतृत्व वाला विकास जरूरी
महिला एवं बाल विकास और मिशन शक्ति मंत्री प्रवती परिदा ने कहा कि भविष्य के विकास की दिशा में महिलाओं की भागीदारी को केंद्र में रखना होगा। महिलाओं को निर्णय लेने की प्रक्रिया में पर्याप्त अवसर मिलने चाहिए, ताकि वे अपने अनुभव और क्षमताओं के आधार पर समाज के विकास में योगदान दे सकें।
उन्होंने कहा कि किसी भी राज्य या देश का समग्र विकास तब तक संभव नहीं है, जब तक उसकी आधी आबादी को विकास प्रक्रिया में सक्रिय भागीदारी का अवसर नहीं मिलता। महिलाओं को शिक्षा, रोजगार, उद्यमिता और नेतृत्व के क्षेत्र में आगे बढ़ाने से न केवल उनका व्यक्तिगत सशक्तिकरण होगा, बल्कि इसका प्रभाव पूरे समाज और अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा।
'देवी अवार्ड आधुनिक शक्ति का सम्मान'
देवी अवार्ड का उल्लेख करते हुए परिदा ने कहा, "देवी अवार्ड 'शक्ति' के आधुनिक रूप का सम्मान करते हैं—वे महिलाएं जो समाज का निर्माण करती हैं, उसका नेतृत्व करती हैं और उसमें बदलाव लाती हैं।"
उन्होंने कहा कि भारतीय परंपरा में देवी शक्ति की पूजा की जाती है और महिलाओं की शक्ति को सदियों से सम्मान दिया जाता रहा है। अब इस सांस्कृतिक सम्मान को महिलाओं के वास्तविक जीवन में उपलब्ध अवसरों और अधिकारों से जोड़ने की आवश्यकता है।
उनके मुताबिक, समाज में महिलाओं को सम्मान देने का अर्थ केवल उनकी उपलब्धियों की प्रशंसा करना नहीं होना चाहिए, बल्कि ऐसा वातावरण तैयार करना भी होना चाहिए जहां प्रत्येक महिला को अपनी क्षमता दिखाने का मौका मिल सके।
अवसर संसाधन और स्वतंत्रता पर जोर
उपमुख्यमंत्री ने कहा कि समाज को ऐसा वातावरण बनाना चाहिए, जो महिलाओं को अपनी क्षमता साबित करने के लिए आवश्यक अवसर, संसाधन और स्वतंत्रता उपलब्ध कराए। यदि महिलाओं को सही अवसर और संसाधन मिलें तो वे हर क्षेत्र में नेतृत्व करने की क्षमता रखती हैं।
उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि महिला सशक्तिकरण के लिए शिक्षा और आर्थिक आत्मनिर्भरता के साथ निर्णय लेने की स्वतंत्रता भी जरूरी है। महिलाओं के सामने मौजूद सामाजिक और आर्थिक बाधाओं को दूर करने के लिए सरकार, समाज और संस्थानों को मिलकर काम करना होगा।
योजनाओं की लाभार्थी से निर्णयकर्ता बनने की जरूरत
परिदा के संबोधन का प्रमुख संदेश महिलाओं की भूमिका को लेकर सोच में बदलाव का रहा। उन्होंने कहा कि लंबे समय तक सरकारी योजनाओं में महिलाओं को मुख्य रूप से लाभार्थी के तौर पर देखा जाता रहा है। अब इस दृष्टिकोण को बदलकर महिलाओं को विकास की साझेदार के रूप में देखने का समय है।
महिलाएं स्वयं सहायता समूहों, उद्यमिता, शिक्षा, स्वास्थ्य, प्रशासन, विज्ञान, तकनीक और अन्य क्षेत्रों में अपनी क्षमता साबित कर रही हैं। ऐसे में उन्हें नीति और विकास प्रक्रिया में भी अधिक भागीदारी मिलनी चाहिए।
उपमुख्यमंत्री ने कहा कि महिलाओं के नेतृत्व में होने वाला विकास केवल महिलाओं के हित तक सीमित नहीं रहता। इसका लाभ परिवार, समुदाय और अंततः पूरे समाज को मिलता है।
मिशन शक्ति की भूमिका महत्वपूर्ण
महिला एवं बाल विकास के साथ मिशन शक्ति विभाग संभाल रहीं प्रवती परिदा ने महिला सशक्तिकरण को आर्थिक स्वतंत्रता से जोड़ने पर भी जोर दिया। स्वयं सहायता समूहों और विभिन्न महिला केंद्रित कार्यक्रमों के माध्यम से महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के प्रयास किए जा रहे हैं।
उन्होंने संकेत दिया कि आने वाले समय में महिलाओं को केवल सरकारी सहायता प्राप्त करने वाला वर्ग मानने के बजाय उन्हें आर्थिक गतिविधियों और उद्यमिता में सक्रिय भागीदार बनाने पर ज्यादा जोर दिया जाना चाहिए। इससे महिलाएं रोजगार प्राप्त करने के साथ रोजगार देने वाली भी बन सकती हैं।
विकसित भारत में महिलाओं की बड़ी भूमिका
परिदा ने विकसित भारत के लक्ष्य का जिक्र करते हुए कहा कि राष्ट्रीय विकास की यात्रा में महिलाओं की भागीदारी निर्णायक होगी। यदि महिलाओं को नेतृत्व के पर्याप्त अवसर दिए जाते हैं तो विकास की गति को और तेज किया जा सकता है।
उनका कहना था कि राज्य के विकास और राष्ट्रीय लक्ष्यों को हासिल करने के लिए महिलाओं की प्रतिभा और क्षमता का पूरा उपयोग जरूरी है। महिला-नेतृत्व वाला विकास केवल सामाजिक न्याय का विषय नहीं, बल्कि आर्थिक और सामाजिक प्रगति की आवश्यकता भी है।
देवी अवार्ड समारोह के मंच से प्रवती परिदा का संदेश महिला सशक्तिकरण की परिभाषा को कल्याणकारी योजनाओं से आगे ले जाने पर केंद्रित रहा। उन्होंने महिलाओं को लाभार्थी से भागीदार, भागीदार से नेतृत्वकर्ता और नेतृत्वकर्ता से परिवर्तन की वाहक बनाने पर जोर दिया।
उनके अनुसार, मंदिरों और परंपराओं में जिस 'शक्ति' का सम्मान किया जाता है, उसी भावना को वास्तविक सामाजिक व्यवस्था में भी जगह मिलनी चाहिए। महिलाओं को अवसर, संसाधन और निर्णय की स्वतंत्रता देकर ही महिला सशक्तिकरण को वास्तविक अर्थों में हासिल किया जा सकता है।