रायगडा। ओडिशा के रायगडा जिले के पेंता इलाके में स्थित एक रेजिडेंशियल स्कूल में छठी कक्षा के छात्र के साथ कथित रैगिंग और मारपीट का गंभीर मामला सामने आया है। आरोप है कि स्कूल के कुछ सीनियर छात्र जूनियर विद्यार्थियों को परेशान करते थे और उनसे निजी काम करवाते थे। मामला उस समय सामने आया, जब इससे संबंधित एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। वीडियो में एक छात्र रोते हुए अपने साथ हुए कथित उत्पीड़न की जानकारी देता दिखाई दे रहा है।

वायरल वीडियो में लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि फिलहाल नहीं हुई है। जिला कल्याण अधिकारी ने मामले को गंभीरता से लेते हुए कहा है कि आरोपों से संबंधित रिपोर्ट मिलने के बाद आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।

रोते हुए छात्र ने सुनाई आपबीती

सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में एक व्यक्ति स्कूल में जूनियर विद्यार्थियों के साथ कथित रूप से हो रहे व्यवहार के बारे में सवाल करता दिखाई देता है। इसी दौरान छठी कक्षा का एक छात्र रोते हुए कथित घटनाओं के बारे में बताता है।

वीडियो में किए गए दावों के अनुसार, दसवीं कक्षा के एक छात्र पर जूनियर विद्यार्थियों को परेशान करने और उनके साथ मारपीट करने का आरोप लगाया गया है। पीड़ित बताए जा रहे छात्र ने कथित तौर पर कहा कि सीनियर छात्र उनसे अलग-अलग तरह के काम भी करवाते थे।

वीडियो सामने आने के बाद स्कूल के छात्रावास की व्यवस्था और वहां बच्चों की निगरानी को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं।

कपड़े धुलवाने का भी आरोप

छात्र की ओर से लगाए गए आरोपों में कहा गया है कि सीनियर विद्यार्थी जूनियर छात्रों से अपने कपड़े तक धुलवाते थे। छात्र ने दावा किया कि इनकार करने या बात नहीं मानने पर उन्हें परेशान किया जाता था।

इससे भी गंभीर आरोप यह है कि कथित रूप से कुछ जूनियर विद्यार्थियों को अपमानजनक स्थिति में डालने का प्रयास किया गया। छात्र ने वीडियो में दावा किया कि सीनियर छात्रों ने उन्हें अपनी पैंट उतारने के लिए मजबूर किया। इन आरोपों ने पूरे मामले की गंभीरता को और बढ़ा दिया है।

हालांकि, इन सभी आरोपों की सत्यता प्रशासनिक जांच और संबंधित पक्षों के बयान सामने आने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।

मारपीट करने का भी लगाया आरोप

वायरल वीडियो में दसवीं कक्षा के एक छात्र पर जूनियर विद्यार्थियों के साथ मारपीट करने का भी आरोप लगाया गया है। यदि जांच में इन आरोपों की पुष्टि होती है तो मामला केवल अनुशासनहीनता तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि स्कूल और छात्रावास में बच्चों की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े होंगे।

रेजिडेंशियल स्कूल में विद्यार्थी अधिकांश समय स्कूल परिसर और छात्रावास में ही रहते हैं। ऐसे में वहां वार्डन, शिक्षकों और अन्य जिम्मेदार कर्मचारियों की निगरानी बेहद महत्वपूर्ण होती है। किसी जूनियर छात्र को लगातार परेशान किए जाने की स्थिति में यह भी जांच का विषय होगा कि इसकी जानकारी जिम्मेदार अधिकारियों तक पहले क्यों नहीं पहुंची।

वीडियो बनाने वाले व्यक्ति की पहचान स्पष्ट नहीं

इस पूरे मामले में वायरल वीडियो रिकॉर्ड करने वाले व्यक्ति की पहचान फिलहाल स्पष्ट नहीं हो पाई है। वीडियो कब रिकॉर्ड किया गया और कथित घटनाएं कब हुईं, इसकी भी स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आई है।

यह भी पता नहीं चल सका है कि स्कूल में इस तरह की कथित घटनाएं कितने समय से हो रही थीं। क्या केवल एक छात्र को परेशान किया गया या अन्य जूनियर विद्यार्थियों के साथ भी ऐसी घटनाएं हुई हैं, यह जांच के बाद ही सामने आएगा।

वीडियो में सामने आए आरोपों के बाद अन्य विद्यार्थियों और उनके अभिभावकों से बातचीत भी महत्वपूर्ण हो सकती है। इससे यह पता लगाया जा सकेगा कि छात्रावास में पहले भी इस तरह की शिकायतें सामने आई थीं या नहीं।

स्कूल प्रशासन की निगरानी पर सवाल

रेजिडेंशियल स्कूल में कथित रैगिंग की घटना सामने आने के बाद छात्रावास की निगरानी व्यवस्था भी सवालों के घेरे में है। विद्यार्थियों के साथ दुर्व्यवहार जैसी घटनाओं को रोकने के लिए नियमित निगरानी और शिकायत की सुरक्षित व्यवस्था आवश्यक मानी जाती है।

छोटे बच्चों के लिए यह और भी महत्वपूर्ण हो जाता है, क्योंकि कई बार डर या दबाव के कारण वे अपने साथ हुई घटना के बारे में शिक्षकों या परिवार के सदस्यों को तत्काल जानकारी नहीं दे पाते। ऐसे में स्कूल प्रशासन की जिम्मेदारी होती है कि विद्यार्थियों के व्यवहार में बदलाव या परेशानी के संकेतों पर ध्यान दिया जाए।

रिपोर्ट मिलने के बाद होगी कार्रवाई

मामला सामने आने के बाद जिला कल्याण अधिकारी की प्रतिक्रिया भी आई है। अधिकारी ने कहा कि आरोपों से संबंधित रिपोर्ट प्राप्त होने के बाद आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। इससे संकेत मिलता है कि प्रशासन पूरे मामले की जानकारी जुटाने की प्रक्रिया में है।

अब यह देखा जाएगा कि स्कूल प्रबंधन, छात्रावास के जिम्मेदार कर्मचारियों और संबंधित विद्यार्थियों से पूछताछ के बाद क्या तथ्य सामने आते हैं। आरोप सही पाए जाने पर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ नियमानुसार कदम उठाए जा सकते हैं।

अभिभावकों की चिंता बढ़ना स्वाभाविक

रेजिडेंशियल स्कूलों में अभिभावक अपने बच्चों को इस भरोसे के साथ भेजते हैं कि वहां उनकी पढ़ाई के साथ सुरक्षा और देखभाल भी सुनिश्चित होगी। ऐसे में किसी छोटे छात्र के साथ कथित रैगिंग और मारपीट की शिकायत गंभीर चिंता का विषय बन जाती है।

फिलहाल सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो इस पूरे मामले का प्रमुख आधार है और उसमें लगाए गए आरोपों की आधिकारिक जांच बाकी है। जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि वास्तव में क्या हुआ था, किन विद्यार्थियों की भूमिका थी और स्कूल प्रशासन को इसकी जानकारी थी या नहीं।

मामले में प्रशासनिक रिपोर्ट और जांच के निष्कर्षों का इंतजार है। इस बीच वायरल वीडियो ने रेजिडेंशियल स्कूलों में जूनियर विद्यार्थियों की सुरक्षा, छात्रावास की निगरानी और शिकायत निवारण व्यवस्था को एक बार फिर चर्चा में ला दिया है।

 

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