भुवनेश्वर। रसोई की सबसे जरूरी चीजों में शामिल प्याज एक बार फिर आम लोगों की जेब पर भारी पड़ने लगा है। ओडिशा में प्याज की कीमतों में तेजी देखने को मिल रही है। राजधानी भुवनेश्वर में प्याज का सामान्य खुदरा भाव 60 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गया है, जबकि कुछ दुकानों पर ग्राहकों से 70 रुपये प्रति किलो तक वसूले जाने की बात सामने आई है। अचानक बढ़ी कीमतों ने घरों का रसोई बजट बिगाड़ दिया है और उपभोक्ताओं ने सरकार एवं प्रशासन से बाजार में कीमतों पर निगरानी बढ़ाने की मांग की है।

सबसे ज्यादा चिंता थोक और खुदरा कीमतों के बीच दिखाई दे रहे बड़े अंतर को लेकर है। भुवनेश्वर की प्रमुख कुबेरपुरी थोक मंडी में कुछ समय पहले तक 20 से 22 रुपये प्रति किलो बिकने वाला प्याज अब 38 से 42 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गया है। इसके मुकाबले खुदरा बाजार में इसकी कीमत 60 से 70 रुपये प्रति किलो तक पहुंचने से उपभोक्ता सवाल उठा रहे हैं।

थोक में 42 तो खुदरा बाजार में 70 रुपये तक भाव

कुबेरपुरी थोक मंडी में प्याज की मौजूदा कीमत करीब 38 से 42 रुपये प्रति किलो बताई जा रही है। व्यापारियों और ग्राहकों का कहना है कि इस थोक दर के आधार पर सामान्य परिस्थितियों में खुदरा बाजार में प्याज की कीमत लगभग 50 रुपये प्रति किलो से ज्यादा नहीं होनी चाहिए।

इसके बावजूद कई खुदरा दुकानों पर 60 रुपये और कुछ जगहों पर 70 रुपये प्रति किलो तक प्याज बेचा जा रहा है। इस तरह थोक और खुदरा कीमत के बीच कुछ स्थानों पर करीब 28 रुपये प्रति किलो तक का अंतर देखने को मिल रहा है।

कीमतों में इतना बड़ा अंतर सामने आने के बाद ग्राहक खुदरा बाजार की निगरानी की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि थोक कीमत बढ़ने का असर खुदरा बाजार में होना स्वाभाविक है, लेकिन बढ़ोतरी अनुपात से ज्यादा नहीं होनी चाहिए।

घरों का बिगड़ने लगा रसोई बजट

प्याज भारतीय रसोई में रोजाना इस्तेमाल होने वाली प्रमुख सब्जियों में शामिल है। ऐसे में इसकी कीमतों में अचानक बढ़ोतरी का सीधा असर आम परिवारों के मासिक खर्च पर पड़ता है। खासकर मध्यम और निम्न आय वर्ग के परिवारों के लिए 60 से 70 रुपये प्रति किलो की कीमत परेशानी बढ़ाने वाली साबित हो रही है।

उपभोक्ताओं का कहना है कि अन्य दैनिक जरूरतों के सामान की कीमतों के बीच अब प्याज की महंगाई अतिरिक्त बोझ बन रही है। कीमतें इसी तरह बढ़ती रहीं तो लोगों को प्याज की खरीदारी कम करनी पड़ सकती है।

ग्राहकों ने प्रशासन से की हस्तक्षेप की मांग

बाजार में बढ़ती कीमतों से परेशान ग्राहकों ने सरकार और स्थानीय प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप करने की मांग की है। उपभोक्ताओं का कहना है कि थोक और खुदरा बाजार के बीच कीमतों में इतना अंतर क्यों है, इसकी जांच की जानी चाहिए।

ग्राहकों की मांग है कि खुदरा दुकानों पर प्याज के भाव की नियमित निगरानी की जाए। यदि कहीं अनुचित तरीके से अधिक कीमत वसूली जा रही है तो उस पर कार्रवाई की जाए। इससे कृत्रिम मूल्य वृद्धि पर नियंत्रण लगाने और आम उपभोक्ताओं को राहत देने में मदद मिल सकती है।

बेंगलुरु की सप्लाई पर टिकी उम्मीद

कुबेरपुरी ट्रेडर्स एसोसिएशन के सचिव शक्तिशंकर मिश्रा ने प्याज की कीमतों में तेजी के पीछे आपूर्ति की स्थिति को महत्वपूर्ण बताया है। उनका कहना है कि यदि बेंगलुरु से प्याज की सप्लाई बढ़ती है तो बाजार में कीमतें नीचे आ सकती हैं।

हालांकि, उन्होंने इस संभावना को लेकर चिंता भी जताई। उनके अनुसार ऐसी खबरें हैं कि इस बार बेंगलुरु क्षेत्र में प्याज की फसल प्रभावित हुई है। यदि फसल को ज्यादा नुकसान हुआ है तो वहां से नई खेप पर्याप्त मात्रा में पहुंचने की संभावना कम हो सकती है।

ऐसी स्थिति में स्थानीय बाजार में मांग और आपूर्ति के बीच अंतर बने रहने की आशंका है। सप्लाई पर्याप्त नहीं बढ़ी तो प्याज की कीमतों पर दबाव जारी रह सकता है।

सप्लाई में कमी का सीधा असर बाजार पर

सब्जियों की कीमत काफी हद तक बाजार में आवक पर निर्भर करती है। प्याज जैसी वस्तु की सप्लाई कम होते ही थोक बाजार में भाव बढ़ने लगते हैं और इसका असर कुछ समय बाद खुदरा बाजार में दिखाई देता है।

ओडिशा के बाजारों में बाहर से आने वाले प्याज की आपूर्ति महत्वपूर्ण है। ऐसे में प्रमुख उत्पादक क्षेत्रों में मौसम या फसल संबंधी समस्या आने पर स्थानीय बाजार भी प्रभावित होता है। यदि आने वाले दिनों में आवक सामान्य होती है तो कीमतों में राहत मिल सकती है, लेकिन सप्लाई सीमित रही तो महंगाई जारी रहने की आशंका बनी रहेगी।

थोक और खुदरा कीमत का अंतर बना बड़ा सवाल

इस समय केवल प्याज के महंगे होने से ज्यादा चर्चा थोक और खुदरा बाजार के अंतर को लेकर है। जब थोक बाजार में अधिकतम भाव करीब 42 रुपये प्रति किलो है, तब खुदरा बाजार में 70 रुपये तक की कीमत उपभोक्ताओं को परेशान कर रही है।

हालांकि थोक से खुदरा बाजार तक माल पहुंचाने में परिवहन, खराब होने वाले माल का नुकसान और विक्रेताओं का मार्जिन जैसी लागत जुड़ती है, लेकिन ग्राहकों का कहना है कि करीब 28 रुपये प्रति किलो तक का अंतर बहुत अधिक है। इसी वजह से बाजार की निगरानी की मांग तेज हो गई है।

आने वाले दिनों में सप्लाई तय करेगी कीमत

अब प्याज की कीमतों का रुख काफी हद तक नई आपूर्ति पर निर्भर करेगा। व्यापारियों के अनुसार यदि बाहरी मंडियों से पर्याप्त प्याज पहुंचता है तो थोक कीमतों में कमी आ सकती है और इसका फायदा खुदरा ग्राहकों को भी मिल सकता है। लेकिन फसल प्रभावित होने और नई सप्लाई कम रहने की स्थिति में फिलहाल राहत मिलने में समय लग सकता है।

फिलहाल 60 से 70 रुपये प्रति किलो तक पहुंचा प्याज आम परिवारों की चिंता बढ़ा रहा है। उपभोक्ताओं की नजर अब प्रशासन की बाजार निगरानी और आने वाले दिनों में होने वाली नई आवक पर टिकी है।

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