ओडिशा में धीमी गति से बढ़ा मौसम सिस्टम, IMD ने भारी बारिश और बाढ़ के लिए इसे बताया मुख्य कारण
भुवनेश्वर। ओडिशा में लगातार हो रही भारी बारिश और कई इलाकों में बनी बाढ़ की स्थिति के पीछे मौसम प्रणाली की धीमी गति को मुख्य कारण बताया गया है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के मौसम वैज्ञानिक उमाशंकर दास ने कहा कि बंगाल की खाड़ी में बना कम दबाव का क्षेत्र तेजी से आगे बढ़ने के बजाय कई दिनों तक लगभग एक ही स्थान पर बना रहा, जिसके कारण राज्य के कई हिस्सों में लंबे समय तक भारी बारिश हुई।
मौसम वैज्ञानिक दास ने बताया कि 25 जुलाई को उत्तर-पश्चिम बंगाल की खाड़ी के ऊपर एक कम दबाव का क्षेत्र बना था। इसके बाद 26 जुलाई को यही सिस्टम और मजबूत होकर डिप्रेशन यानी गहरे कम दबाव वाले क्षेत्र में बदल गया। सामान्य स्थिति में ऐसे मौसम सिस्टम तेजी से जमीन की ओर बढ़ते हैं, लेकिन इस बार इसकी गति काफी धीमी रही।
एक ही क्षेत्र में लंबे समय तक सक्रिय रहा सिस्टम
उमाशंकर दास के अनुसार, डिप्रेशन बनने के बाद यह सिस्टम तेजी से ओडिशा की ओर आगे नहीं बढ़ा। इसके बजाय यह कई दिनों तक लगभग एक ही क्षेत्र में सक्रिय रहा। इसके कारण एक ही इलाके में लगातार नमी और बादलों का जमाव बना रहा, जिससे भारी बारिश की स्थिति पैदा हुई।
उन्होंने बताया कि जब कोई मौसम प्रणाली लंबे समय तक एक स्थान पर बनी रहती है तो उससे जुड़े क्षेत्रों में लगातार वर्षा होने की संभावना बढ़ जाती है। यही स्थिति ओडिशा में देखने को मिली, जहां कई जिलों में सामान्य जनजीवन प्रभावित हुआ और नदियों का जलस्तर बढ़ गया।
भारी बारिश से कई जिलों में बाढ़ की स्थिति
लगातार बारिश के कारण ओडिशा के कई जिलों में जलभराव और बाढ़ जैसी स्थिति बन गई है। नदियों का जलस्तर बढ़ने से निचले इलाकों में पानी भर गया है। कई स्थानों पर सड़कें, खेत और रिहायशी इलाके प्रभावित हुए हैं।
जाजपुर, क्योंझर, संबलपुर समेत कई जिलों में प्रशासन को राहत और बचाव कार्यों में जुटना पड़ा है। नदी किनारे रहने वाले लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है।
नदियों के बढ़ते जलस्तर ने बढ़ाई चिंता
भारी बारिश के कारण राज्य की प्रमुख नदियों में जलस्तर बढ़ रहा है। महानदी समेत कई नदियों में बाढ़ की आशंका को देखते हुए प्रशासन लगातार निगरानी कर रहा है।
अधिकारियों का कहना है कि जल संसाधन विभाग और जिला प्रशासन आपसी समन्वय के साथ स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं। कमजोर तटबंधों की निगरानी की जा रही है और जरूरत पड़ने पर मरम्मत के काम भी किए जा रहे हैं।
धीमी गति से आगे बढ़ने वाले सिस्टम का असर
मौसम विशेषज्ञों के अनुसार, किसी भी चक्रवाती या कम दबाव वाली प्रणाली की गति उसके प्रभाव को तय करती है। यदि सिस्टम तेजी से आगे बढ़ता है तो बारिश कम समय में खत्म हो सकती है, लेकिन धीमी गति होने पर लंबे समय तक बारिश जारी रहती है।
ओडिशा में बने इस डिप्रेशन के मामले में भी यही हुआ। सिस्टम के एक ही क्षेत्र में टिके रहने के कारण बादलों की गतिविधियां लगातार बनी रहीं और कई इलाकों में भारी बारिश दर्ज की गई।
प्रशासन ने बढ़ाई सतर्कता
मौसम विभाग की चेतावनी के बाद राज्य सरकार और जिला प्रशासन ने तैयारियां तेज कर दी हैं। बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में राहत सामग्री पहुंचाने, बचाव दलों को तैयार रखने और लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने के प्रयास किए जा रहे हैं।
प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे मौसम विभाग की चेतावनियों को गंभीरता से लें और नदी, नालों या जलभराव वाले क्षेत्रों से दूर रहें।
स्कूल बंद और कर्मचारियों की छुट्टियां रद्द
भारी बारिश और बाढ़ की स्थिति को देखते हुए कई जिलों में एहतियाती कदम उठाए गए हैं। कुछ स्थानों पर स्कूल बंद रखने के आदेश जारी किए गए हैं, जबकि बाढ़ प्रभावित जिलों में सरकारी कर्मचारियों की छुट्टियां भी रद्द की गई हैं ताकि राहत और बचाव कार्यों में किसी तरह की बाधा न आए।
अधिकारियों को अपने-अपने क्षेत्रों में मौजूद रहने और किसी भी आपात स्थिति में तुरंत कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं।
आगे भी मौसम पर नजर
IMD के अनुसार, मौसम प्रणाली के प्रभाव और बारिश की गतिविधियों पर लगातार नजर रखी जा रही है। मौसम विभाग समय-समय पर नए अपडेट जारी कर रहा है ताकि प्रशासन और आम लोगों को सही जानकारी मिल सके।
मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि बारिश की तीव्रता और अवधि इस बात पर निर्भर करेगी कि यह सिस्टम आगे किस दिशा में बढ़ता है और इसकी गति कैसी रहती है।
फिलहाल ओडिशा में प्रशासन पूरी तरह सतर्क है। धीमी गति से आगे बढ़े मौसम सिस्टम ने राज्य में भारी बारिश और बाढ़ की चुनौती बढ़ा दी है, लेकिन सरकारी एजेंसियां स्थिति को नियंत्रित करने के लिए लगातार काम कर रही हैं।