नई दिल्ली/भुवनेश्वर। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ओडिशा के देबरीगढ़ इलाके की महिलाओं के प्रयासों की जमकर सराहना की है। उन्होंने जंगल संरक्षण के साथ-साथ स्थानीय लोगों के लिए टिकाऊ रोजगार के अवसर पैदा करने की दिशा में किए जा रहे कार्यों को प्रेरणादायक बताया।

प्रधानमंत्री ने अपने मासिक रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ में ओडिशा के देबरीगढ़ क्षेत्र के धोड्रोकुसुम गांव की रहने वाली मैथिली भुए की कहानी साझा की। उन्होंने बताया कि किस तरह एक महिला, जो कभी जंगल से अपनी आजीविका के लिए संसाधन जुटाती थीं, आज जंगल बचाने और इको-टूरिज्म को बढ़ावा देने की मुहिम का हिस्सा बन गई हैं।

जंगल से आजीविका तक का सफर

प्रधानमंत्री मोदी ने बताया कि मैथिली भुए का जीवन लंबे समय तक जंगल से जुड़ा रहा। वह लगभग हर दिन जंगल जाती थीं और वहां से जलाऊ लकड़ी, महुआ के फूल, केंदू के पत्ते, बांस के कोंपल और अन्य वन उपज एकत्र करती थीं।

जंगल उनके परिवार की आजीविका का प्रमुख साधन था। उनके साथ क्षेत्र के कई अन्य परिवार भी वन संसाधनों पर निर्भर थे।

ग्रामीण इलाकों में रहने वाले लोगों के लिए जंगल केवल प्राकृतिक संपदा नहीं, बल्कि जीवन और रोजगार का महत्वपूर्ण आधार होता है। मैथिली का जीवन भी इसी परंपरा से जुड़ा हुआ था।

इको-टूरिज्म से बदली सोच

प्रधानमंत्री ने बताया कि देबरीगढ़ इको-टूरिज्म से जुड़ने के बाद मैथिली और अन्य महिलाओं की सोच में बड़ा बदलाव आया।

पहले जहां जंगल उनके लिए रोजमर्रा की जरूरतों को पूरा करने का माध्यम था, वहीं अब जंगल का संरक्षण ही उनके रोजगार का जरिया बन गया है।

इको-टूरिज्म गतिविधियों से जुड़कर स्थानीय महिलाओं को नए अवसर मिले। उन्होंने पर्यटकों के साथ जुड़ना, स्थानीय संस्कृति और प्राकृतिक विरासत को बढ़ावा देना शुरू किया।

महिलाओं ने संभाली जंगल संरक्षण की जिम्मेदारी

देबरीगढ़ क्षेत्र की महिलाओं ने जंगल बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उन्होंने समझा कि प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण न केवल पर्यावरण के लिए जरूरी है, बल्कि उनके भविष्य और रोजगार से भी जुड़ा हुआ है।

महिलाओं की भागीदारी से क्षेत्र में संरक्षण की भावना मजबूत हुई है। उन्होंने स्थानीय स्तर पर लोगों को जंगलों की सुरक्षा और पर्यावरण संतुलन के महत्व के बारे में जागरूक किया।

रोजगार के नए अवसर बने

प्रधानमंत्री ने कहा कि देबरीगढ़ की पहल यह दिखाती है कि पर्यावरण संरक्षण और आर्थिक विकास एक साथ आगे बढ़ सकते हैं।

इको-टूरिज्म के माध्यम से स्थानीय लोगों को रोजगार के नए अवसर मिले हैं। इससे महिलाओं की आर्थिक भागीदारी भी बढ़ी है और उन्हें आत्मनिर्भर बनने का मौका मिला है।

स्थानीय उत्पादों और वन आधारित संसाधनों को बढ़ावा मिलने से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिली है।

दूसरी महिलाओं को मिली प्रेरणा

मैथिली भुए की कहानी केवल एक महिला की सफलता की कहानी नहीं है, बल्कि पूरे क्षेत्र की महिलाओं के लिए प्रेरणा बन गई है।

उनके प्रयासों से इलाके की अन्य महिलाएं भी जंगल संरक्षण और इको-टूरिज्म से जुड़ने के लिए प्रेरित हुई हैं।

प्रधानमंत्री ने इस बदलाव को सामुदायिक भागीदारी का बेहतरीन उदाहरण बताया।

प्राकृतिक धरोहर को बचाने की कोशिश

देबरीगढ़ क्षेत्र अपनी जैव विविधता और प्राकृतिक सुंदरता के लिए जाना जाता है। यहां जंगल, वन्यजीव और प्राकृतिक संसाधन मौजूद हैं।

ऐसे क्षेत्रों में पर्यावरण संरक्षण के साथ पर्यटन को बढ़ावा देना स्थानीय लोगों के लिए आय का बेहतर माध्यम बन सकता है।

महिलाओं की सक्रिय भागीदारी से यह मॉडल और मजबूत हो रहा है।

पीएम मोदी ने की ग्रामीण महिलाओं की तारीफ

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि देश के अलग-अलग हिस्सों में लोग पर्यावरण संरक्षण और आत्मनिर्भरता की दिशा में शानदार काम कर रहे हैं।

देबरीगढ़ की महिलाओं का उदाहरण यह दिखाता है कि जब स्थानीय समुदाय किसी उद्देश्य के लिए आगे आता है तो बड़े बदलाव संभव होते हैं।

उन्होंने मैथिली भुए और देबरीगढ़ की महिलाओं के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे प्रयास पूरे देश के लिए प्रेरणा हैं।

संरक्षण और विकास का बेहतर उदाहरण

देबरीगढ़ की कहानी इस बात का उदाहरण है कि प्रकृति की रक्षा करते हुए भी रोजगार के अवसर पैदा किए जा सकते हैं।

जहां पहले जंगल से संसाधन जुटाना मजबूरी थी, वहीं अब जंगल को बचाना ही आजीविका का माध्यम बन गया है।

प्रधानमंत्री द्वारा ‘मन की बात’ में इस पहल का उल्लेख किए जाने से देबरीगढ़ की महिलाओं के प्रयासों को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिली है। यह पहल आने वाले समय में पर्यावरण संरक्षण और ग्रामीण विकास के लिए एक प्रेरणादायक मॉडल बन सकती है।

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