भारी बारिश के बीच रेलवे ट्रैक पर भूस्खलन, कोरापुट-रायगड़ा रेल मार्ग बाधित
रायगड़ा। ओडिशा के रायगड़ा जिले में लगातार हो रही भारी बारिश के बीच भूस्खलन के कारण कोरापुट-रायगड़ा (के-आर) रेलवे लाइन पर ट्रेनों की आवाजाही बाधित हो गई है। पहाड़ी क्षेत्र से बड़ी मात्रा में चट्टानें और मिट्टी खिसककर रेलवे ट्रैक पर आ गईं, जिससे रेल मार्ग अवरुद्ध हो गया। घटना के बाद रेलवे ने सुरक्षा को देखते हुए इस सेक्शन पर ट्रेनों की आवाजाही रोक दी है। रेलवे की इंजीनियरिंग और सुरक्षा टीमें मौके पर पहुंचकर मलबा हटाने तथा ट्रैक को दोबारा यातायात के लिए तैयार करने में जुटी हैं।
जानकारी के अनुसार भूस्खलन सिकिरापई और केउटगुडा रेलवे स्टेशनों के बीच हुआ है। इसका सबसे अधिक असर सिकिरापई स्टेशन के पास दिखाई दिया, जहां पहाड़ी से मिट्टी और चट्टानें रेलवे लाइन की ओर खिसक गईं। सुरंग नंबर 29 के पास मलबा ट्रैक पर गिरने के कारण रेलवे लाइन पूरी तरह बाधित हो गई।
भूस्खलन की सूचना मिलते ही रेलवे प्रशासन सक्रिय हुआ और प्रभावित सेक्शन पर ट्रेनों को आगे बढ़ने से रोक दिया गया। यात्रियों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए ट्रेनों को नजदीकी रेलवे स्टेशनों पर नियंत्रित किया गया। रेलवे अधिकारी लगातार मौके की स्थिति पर नजर रख रहे हैं।
घटना के कारण एक इंटरसिटी ट्रेन सिकिरापई रेलवे स्टेशन पर फंसी हुई है। वहीं हीराखंड एक्सप्रेस को केउटगुडा स्टेशन पर रोक दिया गया है। रेल मार्ग साफ होने और इंजीनियरिंग टीम की ओर से ट्रैक को सुरक्षित घोषित किए जाने के बाद ही इन ट्रेनों को आगे रवाना किए जाने की संभावना है।
कोरापुट-रायगड़ा रेल लाइन ओडिशा के पहाड़ी क्षेत्रों से होकर गुजरती है। इस रेल मार्ग के आसपास कई स्थानों पर ऊंची पहाड़ियां, घाटियां और सुरंगें मौजूद हैं। भारी बारिश के दौरान पहाड़ी ढलानों की मिट्टी कमजोर होने से चट्टानों और मिट्टी के खिसकने का खतरा बढ़ जाता है। इसी वजह से मानसून और अत्यधिक बारिश के दौरान रेलवे को इस मार्ग पर अतिरिक्त निगरानी रखनी पड़ती है।
सुरंग नंबर 29 के पास हुए भूस्खलन के बाद रेलवे सुरक्षाकर्मियों और इंजीनियरिंग विभाग की टीमों को मौके पर भेजा गया। कर्मचारी ट्रैक पर जमा चट्टानों और मिट्टी को हटाने में लगे हुए हैं। साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि भूस्खलन के कारण रेल पटरियों, स्लीपर, ओवरहेड या अन्य रेलवे संरचना को किसी तरह का नुकसान तो नहीं पहुंचा है।
रेलवे लाइन से केवल मलबा हटाना ही पर्याप्त नहीं होगा। ट्रेनों की आवाजाही बहाल करने से पहले इंजीनियरिंग अधिकारियों को ट्रैक की तकनीकी जांच करनी होगी। यह सुनिश्चित किया जाएगा कि पटरियों का संरेखण सुरक्षित है और भारी बारिश या भूस्खलन के कारण जमीन धंसने जैसी कोई समस्या नहीं हुई है। इसके बाद ही संबंधित सेक्शन पर ट्रेनों के संचालन की अनुमति दी जाएगी।
भारी बारिश के बीच बहाली का काम भी चुनौतीपूर्ण बना हुआ है। यदि बारिश लगातार जारी रहती है तो पहाड़ी से और मलबा नीचे आने का खतरा बना रह सकता है। ऐसे में मौके पर मौजूद कर्मचारियों की सुरक्षा के साथ ट्रैक को साफ करने का काम किया जा रहा है। रेलवे अधिकारी आसपास की पहाड़ियों और प्रभावित क्षेत्र की स्थिति का भी निरीक्षण कर रहे हैं।
कोरापुट-रायगड़ा रेलवे लाइन पर यातायात बाधित होने से इस मार्ग से गुजरने वाली दूसरी ट्रेनों के संचालन पर भी असर पड़ सकता है। स्थिति लंबे समय तक सामान्य नहीं होने पर कुछ ट्रेनों को अलग-अलग स्टेशनों पर नियंत्रित करने, समय में बदलाव करने या वैकल्पिक व्यवस्था करने की आवश्यकता पड़ सकती है। हालांकि रेलवे की ओर से आगे की स्थिति के अनुसार परिचालन संबंधी निर्णय लिए जाएंगे।
रेलवे प्रशासन की प्राथमिकता फिलहाल ट्रैक से मलबा हटाने और मार्ग को सुरक्षित तरीके से बहाल करने की है। बड़ी चट्टानों को हटाने के लिए आवश्यक मशीनों और कर्मचारियों की मदद ली जा रही है। पहाड़ी इलाके में काम होने के कारण बहाली में समय लग सकता है।
सिकिरापई और केउटगुडा के बीच का इलाका प्राकृतिक रूप से पहाड़ी है। यहां रेलवे लाइन कई कठिन भौगोलिक परिस्थितियों से होकर गुजरती है। ऐसे इलाकों में तेज बारिश के दौरान पहाड़ी ढलानों पर पानी जमा होने और मिट्टी में नमी बढ़ने से भूस्खलन का खतरा बढ़ जाता है। छोटी चट्टानों के साथ बड़ी शिलाएं भी ट्रैक की ओर गिर सकती हैं, जिससे रेल संचालन के लिए गंभीर खतरा पैदा हो सकता है।
इस घटना में राहत की बात यह है कि अब तक किसी ट्रेन के मलबे की चपेट में आने या यात्रियों के घायल होने की सूचना नहीं है। समय रहते रेल यातायात रोके जाने के कारण ट्रेनों को सुरक्षित स्टेशनों पर नियंत्रित किया गया है। इंटरसिटी ट्रेन के यात्रियों को सिकिरापई में और हीराखंड एक्सप्रेस को केउटगुडा में ट्रैक साफ होने का इंतजार करना पड़ रहा है।
रेलवे की सुरक्षा टीमें प्रभावित हिस्से की लगातार निगरानी कर रही हैं। मलबा हटाने के बाद ट्रैक की जांच के साथ आसपास की पहाड़ी ढलानों का निरीक्षण भी महत्वपूर्ण होगा। यदि किसी हिस्से में दोबारा चट्टान गिरने का खतरा पाया जाता है तो वहां अतिरिक्त सुरक्षा उपाय किए जा सकते हैं।
भारी बारिश के दौरान रेल मार्गों पर भूस्खलन जैसी घटनाएं यात्रियों के लिए परेशानी के साथ रेलवे प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बन जाती हैं। विशेष रूप से पहाड़ी इलाकों में रेल यातायात बहाल करने से पहले सुरक्षा के सभी पहलुओं की जांच जरूरी होती है। इसी वजह से रेलवे जल्दबाजी में परिचालन शुरू करने के बजाय ट्रैक की तकनीकी जांच पूरी करने पर जोर दे रहा है।
फिलहाल सिकिरापई और केउटगुडा के बीच सुरंग नंबर 29 के पास मलबा हटाने और रेलवे लाइन की बहाली का काम जारी है। रेलवे की इंजीनियरिंग और सुरक्षा टीमें मौके पर मौजूद हैं। ट्रैक पूरी तरह साफ होने और तकनीकी रूप से सुरक्षित पाए जाने के बाद ही कोरापुट-रायगड़ा रेल मार्ग पर ट्रेनों की सामान्य आवाजाही बहाल की जाएगी।