राउरकेला: नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी राउरकेला (NIT राउरकेला) के शोधकर्ताओं ने दूषित भूजल से अतिरिक्त फ्लोराइड हटाने के लिए कटहल के छिलके से बना एक सस्ता और नया पदार्थ विकसित किया है, जिसके लिए उन्हें पेटेंट मिला है।
इस तकनीक में कटहल के छिलके से बने 'एक्टिवेटेड कार्बन' का इस्तेमाल किया जाता है। इसमें ज़िरकोनियम मिलाकर इसकी फ्लोराइड सोखने की क्षमता को और बेहतर बनाया गया है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, पीने के पानी में फ्लोराइड की अधिक मात्रा मानव स्वास्थ्य पर बुरा असर डालती है, जिससे दांतों और हड्डियों से जुड़ी बीमारियां (डेंटल और स्केलेटल फ्लोरोसिस) हो सकती हैं।
देश के कई हिस्सों में फ्लोराइड का प्रदूषण एक आम समस्या है। ऐसे में, पानी को साफ करने के लिए किफायती और टिकाऊ तरीके खोजना जन स्वास्थ्य के लिए एक बड़ी प्राथमिकता है।
भूजल से फ्लोराइड हटाने के मौजूदा तरीकों में कुछ कमियां हैं, जिस वजह से इनका बड़े पैमाने पर इस्तेमाल नहीं हो पाता। उदाहरण के लिए, 'रिवर्स ऑस्मोसिस' (RO) प्रक्रिया में बहुत सारा पानी बर्बाद हो जाता है और पानी से कैल्शियम और मैग्नीशियम जैसे फायदेमंद खनिज भी निकल जाते हैं। वहीं, 'आयन एक्सचेंज' और 'एक्टिवेटेड एल्यूमिना' जैसी प्रक्रियाओं में कठोर रसायनों का इस्तेमाल होता है, जो पर्यावरण के अनुकूल नहीं हैं।