नई दिल्ली। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में चुनाव आयोग और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर जारी विरोध प्रदर्शनों के बीच राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। भारतीय जनता पार्टी के सांसद और राष्ट्रीय प्रवक्ता संबित पात्रा ने गुरुवार, 15 अक्टूबर 2026 को लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी और छात्र कार्यकर्ताओं पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार विरोधी प्रदर्शनों के जरिए देश में अस्थिरता पैदा करने की कोशिश की जा रही है और कुछ लोग विदेशी हितों को बढ़ावा दे रहे हैं।संबित पात्रा ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में राहुल गांधी द्वारा विपक्षी आंदोलन की तुलना भगवान शिव के तांडव से किए जाने पर आपत्ति जताई। उन्होंने इसे धार्मिक भावनाओं से जुड़ा संवेदनशील विषय बताते हुए कांग्रेस नेता की आलोचना की।
राहुल गांधी के बयान पर संबित पात्रा का हमला
बीजेपी सांसद संबित पात्रा ने कहा कि राहुल गांधी ने हाल ही में विपक्षी आंदोलन को भगवान शिव के नृत्य से जोड़कर प्रस्तुत किया था। उन्होंने इस तुलना पर आपत्ति जताते हुए कहा कि राजनीतिक प्रदर्शनों के संदर्भ में ऐसे धार्मिक प्रतीकों का इस्तेमाल उचित नहीं है।पात्रा ने आरोप लगाया कि राहुल गांधी और उनके समर्थक लोकतांत्रिक विरोध के नाम पर देश में अशांति का माहौल तैयार कर रहे हैं।उन्होंने राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए कहा कि देश की जनता इन राजनीतिक गतिविधियों को देख रही है और इसका जवाब देगी।
पाकिस्तान का जिक्र कर लगाए गंभीर आरोप
संबित पात्रा ने अपने बयान में पाकिस्तान का भी उल्लेख किया। उन्होंने राहुल गांधी और छात्र कार्यकर्ताओं पर विदेशी हितों को साधने का आरोप लगाया।पात्रा ने दावा किया कि राष्ट्रीय राजधानी में हो रहे विरोध प्रदर्शनों के पीछे केवल चुनावी मुद्दे नहीं, बल्कि व्यापक राजनीतिक उद्देश्य हैं।हालांकि, राहुल गांधी या प्रदर्शनकारी छात्र संगठनों के पाकिस्तान के साथ मिलकर काम करने के आरोपों की कोई स्वतंत्र पुष्टि सामने नहीं आई है। ये आरोप भाजपा सांसद के राजनीतिक बयान का हिस्सा हैं।
राहुल गांधी ने आंदोलन को बताया था 'शिव का तांडव'
राहुल गांधी ने 12 अक्टूबर को दिल्ली स्थित कांग्रेस मुख्यालय में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान विपक्ष के आंदोलन की तुलना भगवान शिव के तांडव से की थी।उन्होंने अपनी बहन और कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा के साथ हुई बातचीत का उल्लेख करते हुए कहा था कि प्रियंका ने उनसे आगे की रणनीति बनाने की बात कही थी।राहुल गांधी ने जवाब में कहा था कि यह आंदोलन किसी तय योजना के अनुसार नहीं चल रहा है। उन्होंने इसे भगवान शिव के तांडव की तरह बताया, जिसमें हर कोई शामिल हो सकता है।उनका कहना था कि विपक्षी आंदोलन में शामिल होने के इच्छुक लोगों के लिए रास्ते खुले हैं और इसका स्वरूप परिस्थितियों के अनुसार आगे बढ़ रहा है।इस राजनीतिक टकराव के बीच वरिष्ठ अधिवक्ता और नागरिक अधिकार कार्यकर्ता प्रशांत भूषण के सत्ता परिवर्तन संबंधी बयान ने भी विवाद को बढ़ा दिया है।संबित पात्रा ने प्रशांत भूषण की टिप्पणियों को लेकर आरोप लगाया कि विपक्ष के आंदोलन का वास्तविक उद्देश्य चुनावी सुधारों की मांग से आगे जाकर सत्ता परिवर्तन करना है।भाजपा नेता ने राहुल गांधी और उनके समर्थकों पर लोकतांत्रिक संस्थाओं को कमजोर करने का आरोप भी लगाया।हालांकि, लोकतांत्रिक और संवैधानिक तरीकों से सत्ता परिवर्तन की मांग करना तथा गैरकानूनी तरीकों से सत्ता हासिल करने का प्रयास करना अलग-अलग बातें हैं।
SIR प्रक्रिया को लेकर जारी है विरोध
इस पूरे विवाद के केंद्र में भारत निर्वाचन आयोग की विशेष गहन पुनरीक्षण प्रक्रिया है।विपक्षी दलों का आरोप है कि मतदाता सूचियों में संशोधन की प्रक्रिया के दौरान बड़ी संख्या में पात्र मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं।इसी मुद्दे को लेकर कांग्रेस और इंडिया गठबंधन के नेताओं ने विरोध प्रदर्शन किए और चुनाव आयोग से जवाबदेही की मांग की।12 अक्टूबर को राहुल गांधी सहित विपक्षी नेताओं ने दिल्ली में सुप्रीम कोर्ट की ओर विरोध मार्च भी निकाला था। विपक्ष ने मतदाता सूची संशोधन प्रक्रिया की न्यायिक समीक्षा की मांग की है।
सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा मामला
मतदाता सूची विवाद और दिल्ली में हुए प्रदर्शनों से संबंधित याचिकाएं सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच चुकी हैं।15 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट ने विरोध प्रदर्शनों और न्यायालय परिसर के आसपास हुई गतिविधियों से जुड़े मामलों में नोटिस जारी किए।अदालत ने न्यायिक कार्यवाही पर अनुचित दबाव नहीं बनाने की आवश्यकता पर जोर दिया। साथ ही प्रदर्शन से संबंधित कुछ मुद्दों पर संबंधित पक्षों से जवाब मांगा गया है।
भाजपा और कांग्रेस के बीच बढ़ा राजनीतिक टकराव
राहुल गांधी के तांडव वाले बयान और संबित पात्रा की प्रतिक्रिया के बाद राजनीतिक विवाद और गहरा गया है।एक तरफ कांग्रेस और अन्य विपक्षी दल SIR प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं को लेकर सवाल उठा रहे हैं, वहीं भाजपा इन विरोध प्रदर्शनों के स्वरूप और राजनीतिक उद्देश्य पर आपत्ति जता रही है।संबित पात्रा ने कांग्रेस नेतृत्व पर गंभीर आरोप लगाए हैं, जबकि राहुल गांधी ने अपने आंदोलन को चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता और लोकतांत्रिक अधिकारों से जुड़ा बताया है।फिलहाल SIR विवाद, विरोध प्रदर्शन और सत्ता परिवर्तन को लेकर विभिन्न राजनीतिक दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप जारी हैं।
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