जाजपुर में बाढ़ से बिगड़े हालात 65 स्कूलों में कक्षाएं बंद और 60 गांव जलमग्न
जाजपुर। ओडिशा के जाजपुर जिले में बाढ़ की स्थिति गंभीर होने के कारण जनजीवन के साथ बच्चों की पढ़ाई भी प्रभावित हो रही है। दशरथपुर ब्लॉक में नदियों का जलस्तर बढ़ने और कई इलाकों में पानी भरने के बाद बुधवार को 65 स्कूलों में कक्षाएं बंद करने का फैसला लिया गया। बाढ़ की ताजा लहर से ब्लॉक की 19 ग्राम पंचायतें प्रभावित हुई हैं और करीब 60 गांव जलमग्न बताए जा रहे हैं।
जिला शिक्षा कार्यालय ने स्थिति को देखते हुए दशरथपुर ब्लॉक के चिन्हित सरकारी, सरकारी सहायता प्राप्त और निजी स्कूलों में कक्षाएं बंद रखने का निर्देश दिया है। आदेश के दायरे में प्राथमिक, माध्यमिक और उच्च माध्यमिक स्कूलों को शामिल किया गया है। हालांकि स्कूल परिसरों को पूरी तरह बंद नहीं किया जाएगा। जरूरत पड़ने पर इनका इस्तेमाल बाढ़ प्रभावित लोगों के बचाव और पुनर्वास कार्यों के लिए किया जा सकता है।
प्रशासन का यह फैसला बैतरणी नदी का जलस्तर खतरे के निशान से ऊपर पहुंचने के बाद लिया गया है। अखुआपाड़ा में बैतरणी नदी का खतरे का स्तर 18.33 मीटर है। ऊपरी जलग्रहण क्षेत्रों में लगातार बारिश के बाद नदी का पानी इस स्तर को पार कर गया, जिससे निचले इलाकों में बाढ़ का खतरा बढ़ गया है।
हजारों विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित
दशरथपुर ब्लॉक के 65 स्कूलों में कक्षाएं बंद होने से हजारों छात्र प्रभावित हुए हैं। कई गांवों में सड़कों और रास्तों पर पानी भर जाने के कारण बच्चों का स्कूल पहुंचना भी जोखिम भरा हो सकता है। इसे देखते हुए जिला शिक्षा कार्यालय ने एहतियात के तौर पर कक्षाओं को बंद करने का निर्णय लिया।
सरकारी स्कूलों के साथ सहायता प्राप्त और निजी स्कूलों को भी आदेश के दायरे में रखा गया है। प्रशासन की प्राथमिकता विद्यार्थियों और शिक्षकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।
हालांकि स्कूल खुले रहेंगे ताकि आवश्यकता पड़ने पर प्रशासन उनका उपयोग राहत केंद्र या अस्थायी आश्रय स्थल के रूप में कर सके। बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में स्कूल और अन्य सरकारी भवन अक्सर लोगों को सुरक्षित स्थान उपलब्ध कराने के लिए इस्तेमाल किए जाते हैं।
खतरे के निशान के ऊपर बैतरणी
बाढ़ की मौजूदा स्थिति के पीछे बैतरणी नदी का बढ़ा जलस्तर प्रमुख कारण बताया जा रहा है। अखुआपाड़ा में नदी के लिए खतरे का स्तर 18.33 मीटर निर्धारित है। ऊपरी क्षेत्रों में लगातार बारिश के कारण नदी में तेजी से पानी बढ़ा और जलस्तर खतरे के निशान को पार कर गया।
नदी का जलस्तर बढ़ने के बाद आसपास के निचले इलाकों में पानी फैलने लगा। इसके कारण दशरथपुर ब्लॉक की कई ग्राम पंचायतें प्रभावित हुई हैं। प्रशासन नदी के जलस्तर और संवेदनशील इलाकों पर नजर बनाए हुए है।
यदि ऊपरी जलग्रहण क्षेत्रों में बारिश जारी रहती है तो नदी में पानी का दबाव और बढ़ सकता है। ऐसे में प्रभावित गांवों में स्थिति और चुनौतीपूर्ण हो सकती है।
19 ग्राम पंचायतों में बाढ़ का असर
बाढ़ की ताजा लहर ने दशरथपुर ब्लॉक की 19 ग्राम पंचायतों को अपनी चपेट में लिया है। करीब 60 गांवों में पानी भरने की स्थिति सामने आई है। कई स्थानों पर खेत, सड़कें और निचले इलाके पानी में डूब गए हैं।
गांवों में पानी भरने के कारण लोगों की रोजमर्रा की गतिविधियां प्रभावित हो रही हैं। आवाजाही के रास्ते जलमग्न होने से जरूरी सामान की आपूर्ति और लोगों के सुरक्षित स्थानों तक पहुंचने में भी परेशानी हो सकती है।
बाढ़ प्रभावित इलाकों में प्रशासन को लगातार स्थिति की निगरानी करनी पड़ रही है। पानी बढ़ने की स्थिति में लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाना और भोजन, पेयजल तथा अन्य जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराना महत्वपूर्ण चुनौती होगी।
कानी नदी के किनारे भी बढ़ी चिंता
बैतरणी के साथ उसकी सहायक नदी कानी के किनारे मौजूद कई संवेदनशील स्थानों ने प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है। नदी के किनारे तटबंधों पर पानी का दबाव बढ़ने से आसपास के गांवों में बाढ़ का खतरा और बढ़ सकता है।
तारपाड़ा पंचायत के डोबाबिल पटना और कांटापाड़ा में तटबंध टूटने की स्थिति चिंता का कारण बनी हुई है। इसके अलावा जयनतारा महापात्रा साही के पास तटबंध को लेकर भी खतरा बना हुआ है।
तटबंधों में टूट-फूट होने से नदी का पानी तेजी से आबादी वाले इलाकों और खेतों की ओर बढ़ सकता है। इसलिए ऐसे स्थानों की लगातार निगरानी और समय रहते मरम्मत जरूरी है।
बचाव और पुनर्वास के लिए तैयार रहेंगे स्कूल
प्रशासन ने प्रभावित स्कूलों में केवल कक्षाएं बंद करने का आदेश दिया है। स्कूल भवनों को आवश्यकता के अनुसार राहत और पुनर्वास गतिविधियों के लिए उपलब्ध रखा जाएगा। यदि किसी गांव से लोगों को सुरक्षित स्थान पर ले जाने की जरूरत पड़ती है तो नजदीकी स्कूल भवनों का इस्तेमाल अस्थायी राहत केंद्र के रूप में किया जा सकता है।
स्कूलों में आमतौर पर बड़े कमरे, खुले परिसर और बुनियादी सुविधाएं मौजूद होती हैं। इसलिए आपदा के समय इन्हें अस्थायी आश्रय केंद्रों में बदला जा सकता है।
बाढ़ की स्थिति सामान्य होने के बाद ही प्रभावित स्कूलों में नियमित कक्षाएं शुरू किए जाने की संभावना है। फिलहाल जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग हालात पर नजर बनाए हुए हैं।
ग्रामीण क्षेत्रों में बढ़ी मुश्किलें
लगभग 60 गांवों के जलमग्न होने से स्थानीय लोगों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। बाढ़ का पानी घरों और सड़कों के आसपास पहुंचने पर लोगों को सुरक्षित स्थानों की ओर जाना पड़ सकता है। वहीं खेतों में पानी भरने से फसलों को भी नुकसान होने की आशंका रहती है।
बाढ़ के दौरान साफ पेयजल और स्वच्छता बनाए रखना भी बड़ी चुनौती होती है। दूषित पानी के कारण बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है। इसलिए राहत कार्यों के दौरान पीने के पानी और स्वास्थ्य सुविधाओं पर विशेष ध्यान देना जरूरी होगा।
बच्चों, बुजुर्गों और गर्भवती महिलाओं जैसे संवेदनशील लोगों की सुरक्षा के लिए भी अतिरिक्त व्यवस्था की जरूरत पड़ सकती है।
प्रशासन की नजर जलस्तर पर
बैतरणी और कानी नदियों के आसपास स्थिति को देखते हुए प्रशासन के लिए अगले कुछ समय तक जलस्तर की निगरानी बेहद महत्वपूर्ण होगी। ऊपरी जलग्रहण क्षेत्रों में होने वाली बारिश सीधे तौर पर नदी के जलस्तर को प्रभावित कर सकती है।
अगर पानी कम होता है तो प्रभावित इलाकों को धीरे-धीरे राहत मिल सकती है। लेकिन बारिश जारी रहने या नदी का जलस्तर और बढ़ने पर अतिरिक्त गांवों के प्रभावित होने का खतरा बना रहेगा।
फिलहाल दशरथपुर ब्लॉक में 65 स्कूलों की कक्षाएं बंद कर विद्यार्थियों की सुरक्षा को प्राथमिकता दी गई है। 19 ग्राम पंचायतों और करीब 60 गांवों में फैले बाढ़ के पानी के बीच प्रशासन राहत, बचाव और पुनर्वास की तैयारियों में जुटा है। बैतरणी नदी के खतरे के निशान से ऊपर बहने और कानी नदी के तटबंधों पर बढ़ते दबाव के कारण आने वाला समय बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।