सुप्रीम कोर्ट का मिजोरम ADC को निर्देश दोहरी सदस्यता नियम पर फिर से करें विचार
मिजोरम के चकमा और मारा ADC में दोहरी सदस्यता पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा निर्देश
आइजोल : सुप्रीम कोर्ट ने मिज़ोरम के चकमा और मारा स्वायत्त जिला परिषदों (ADCs) से ऐसे नियमों पर दोबारा विचार करने को कहा है, जो उनके सदस्यों को एक साथ राज्य विधानसभा और ADC की सदस्यता रखने की अनुमति देते हैं।
क्या है पूरा मामला?
मामला ADC के निर्वाचित सदस्यों के राज्य विधानसभा का सदस्य बनने के बाद भी जिला परिषद की सदस्यता बनाए रखने से जुड़ा है। सुप्रीम कोर्ट की तीन सदस्यीय पीठ ने रुस्तम चकमा की अपील पर सुनवाई करते हुए यह निर्देश दिया। पीठ में मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना शामिल थे।
दोहरी सदस्यता पर उठे सवाल
मामले में यह सवाल प्रमुख रहा कि क्या कोई व्यक्ति एक साथ स्वायत्त जिला परिषद और राज्य विधानसभा दोनों का सदस्य रह सकता है। सुप्रीम कोर्ट ने संबंधित ADCs को अपने नियमों पर पुनर्विचार करने को कहा है। यह मुद्दा इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि ADCs को संविधान की छठी अनुसूची के तहत विशेष प्रशासनिक अधिकार प्राप्त हैं और उनके कामकाज का राज्य विधानसभा से अलग संवैधानिक ढांचा है।
आगे क्या होगा?
सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद अब चकमा और मारा ADC को दोहरी सदस्यता से जुड़े अपने नियमों की समीक्षा करनी होगी। इस फैसले का असर मिज़ोरम के अलावा देश के अन्य स्वायत्त जिला परिषदों में भी दोहरी सदस्यता और पद धारण करने से जुड़े सवालों पर पड़ सकता है।