आइजोल। मिजोरम में 2026 के फेस्टिवल सीजन की शुरुआत गुरुवार को राज्य के पहले ‘प्लक एंड पे’ (Pluck & Pay) फेस्टिवल के साथ हुई। ख्वाजॉल जिले के तुआल्ते और च्वांग्टलाई गांवों में आयोजित इस तीन दिवसीय उत्सव का उद्देश्य ग्रामीण पर्यटन को बढ़ावा देने के साथ किसानों और स्थानीय उत्पादकों के लिए आय के नए अवसर तैयार करना है। इसमें पर्यटक सीधे खेतों और बगीचों में जाकर अपनी पसंद की ताजी उपज खुद तोड़ सकते हैं और उसका भुगतान सीधे उत्पादक को कर सकते हैं।मिजोरम सरकार के पर्यटन विभाग और ख्वाजॉल के डिप्टी कमिश्नर कार्यालय ने संयुक्त रूप से इस आयोजन की शुरुआत की है। 23 से 25 सितंबर तक चलने वाले फेस्टिवल को कृषि, बागवानी, पर्यटन, स्थानीय खानपान और सामुदायिक उद्यम को एक मंच पर लाने की कोशिश के रूप में पेश किया गया है।‘प्लक एंड पे’ का विचार बेहद सरल है। पर्यटक चयनित खेतों में जाते हैं, वहां उपलब्ध फल-सब्जियों और अन्य कृषि उत्पादों को देखते हैं, अपनी पसंद की उपज खुद तोड़ते हैं और जितनी उपज लेते हैं, उसके लिए किसान को भुगतान करते हैं। इस मॉडल में खेत केवल उत्पादन का स्थान नहीं रहता, बल्कि पर्यटन अनुभव का भी हिस्सा बन जाता है।
किसानों से सीधे जुड़ेंगे पर्यटक
फेस्टिवल की खासियत यह है कि पर्यटकों और स्थानीय किसानों के बीच सीधा संपर्क स्थापित होता है। पर्यटक यह देख सकते हैं कि ग्रामीण मिजोरम में खेती कैसे की जाती है, स्थानीय स्तर पर कौन-कौन सी फसलें उगाई जाती हैं और कृषि परिवारों का दैनिक जीवन किस तरह खेती से जुड़ा हुआ है।आयोजकों का उद्देश्य किसानों को केवल कृषि उपज बेचने तक सीमित न रखते हुए पर्यटन से भी आर्थिक लाभ दिलाना है। पर्यटकों के सीधे खेतों तक पहुंचने से स्थानीय उत्पादकों को अपने उत्पाद प्रदर्शित करने और बिना लंबे वितरण नेटवर्क के ग्राहकों तक पहुंचने का अवसर मिलता है।यह मॉडल ग्रामीण पर्यटन के उस स्वरूप को बढ़ावा देता है जिसमें स्थानीय समुदाय स्वयं पर्यटन गतिविधियों का प्रमुख हिस्सा बनता है। इससे होने वाला आर्थिक लाभ गांव के लोगों, किसानों और छोटे उद्यमियों तक पहुंचने की संभावना बढ़ती है।
स्थानीय उत्पादों का मिलेगा अनुभव
फेस्टिवल में आने वाले लोगों के लिए केवल खेतों से उपज तोड़ना ही आकर्षण नहीं है। आयोजन में स्थानीय भोजन, पारंपरिक व्यंजन और ग्रामीण जीवन से जुड़े अनुभवों को भी शामिल किया गया है। पर्यटक क्षेत्र की स्थानीय संस्कृति और खानपान को करीब से समझ सकते हैं।फेस्टिवल के दौरान उपलब्ध कृषि उत्पादों में मौसमी फल और सब्जियां शामिल हैं। स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार संतरे, ड्रैगन फ्रूट, पैशन फ्रूट और स्थानीय सब्जियों जैसी उपज को आयोजन का हिस्सा बनाया गया है।पर्यटकों को उत्पाद खरीदने के साथ उनके उत्पादन के बारे में किसानों से सीधे जानकारी लेने का भी अवसर मिलता है। इससे कृषि उत्पाद केवल बाजार में बिकने वाली वस्तु न रहकर एक अनुभव का हिस्सा बन जाते हैं।
ग्रामीण अर्थव्यवस्था को फायदा पहुंचाने की कोशिश
मिजोरम में कृषि और बागवानी बड़ी संख्या में ग्रामीण परिवारों की आजीविका से जुड़ी हुई है। ऐसे में पर्यटन को कृषि से जोड़कर अतिरिक्त आय के अवसर तैयार करने की संभावना देखी जा रही है।पारंपरिक व्यवस्था में किसान अपनी उपज को बाजार तक पहुंचाने के लिए परिवहन और बिचौलियों पर निर्भर हो सकते हैं। ‘प्लक एंड पे’ मॉडल में ग्राहक स्वयं खेत तक पहुंचता है और उत्पादक से सीधे खरीदारी करता है। इससे किसानों को अपने उत्पाद की बिक्री के लिए एक वैकल्पिक माध्यम मिलता है।हालांकि इस मॉडल का दीर्घकालीन आर्थिक प्रभाव इस बात पर निर्भर करेगा कि भविष्य में ऐसे आयोजनों में कितने पर्यटक पहुंचते हैं, किसानों की भागीदारी कितनी रहती है और इसे नियमित पर्यटन गतिविधि के रूप में विकसित किया जाता है या नहीं।
कम्युनिटी टूरिज्म पर जोर
फेस्टिवल का एक प्रमुख उद्देश्य समुदाय आधारित पर्यटन को बढ़ावा देना है। इसमें गांव के लोग केवल दर्शक या सेवा प्रदाता नहीं, बल्कि पूरे पर्यटन अनुभव के प्रमुख भागीदार होते हैं।तुआल्ते और च्वांग्टलाई गांवों में आयोजित कार्यक्रम के माध्यम से स्थानीय किसानों, छोटे कारोबारियों और ग्रामीण परिवारों को पर्यटन से जोड़ने की कोशिश की गई है। पर्यटक गांवों में समय बिताकर स्थानीय जीवनशैली को करीब से देख सकते हैं।इस तरह का पर्यटन बड़े होटल या व्यावसायिक केंद्रों तक सीमित रहने के बजाय गांवों तक पर्यटन से होने वाले आर्थिक अवसर पहुंचाने का माध्यम बन सकता है।
मिजोरम की प्राकृतिक खूबसूरती भी आकर्षण
पूर्वोत्तर भारत का मिजोरम अपने पहाड़ी भूगोल, हरियाली, जंगलों और स्थानीय संस्कृति के लिए जाना जाता है। राज्य सरकार पिछले कुछ वर्षों से पर्यटन को आर्थिक गतिविधियों से जोड़ने की कोशिश कर रही है। मिजोरम पर्यटन विभाग भी राज्य के विभिन्न क्षेत्रों में संस्कृति, प्रकृति और स्थानीय समुदाय आधारित पर्यटन को बढ़ावा देता रहा है।‘प्लक एंड पे’ फेस्टिवल इसी दिशा में एक नया प्रयोग है। इसमें प्राकृतिक पर्यटन के साथ खेती को भी अनुभव का हिस्सा बनाया गया है। पर्यटक खेतों में जाकर ताजी उपज तोड़ने के साथ ग्रामीण वातावरण में समय बिता सकते हैं।
तीन दिनों तक चलेगा आयोजन
23 सितंबर से शुरू हुआ यह फेस्टिवल 25 सितंबर तक चलेगा। तीन दिनों के दौरान पर्यटकों को कृषि और बागवानी गतिविधियों में भाग लेने, स्थानीय उत्पाद खरीदने और ग्रामीण समुदाय से सीधे संवाद करने का अवसर मिलेगा।राज्य के पहले ‘प्लक एंड पे’ फेस्टिवल के जरिए मिजोरम ने कृषि और पर्यटन को एक साथ जोड़ने का प्रयोग शुरू किया है। इस पहल का केंद्र स्थानीय समुदाय और किसान हैं। पर्यटक जहां खेतों से ताजी उपज लेने और ग्रामीण जीवन को करीब से देखने का अनुभव हासिल करते हैं, वहीं किसानों को सीधे ग्राहक और पर्यटन से अतिरिक्त आर्थिक अवसर मिलते हैं।यदि यह मॉडल सफल रहता है तो मिजोरम के दूसरे कृषि और बागवानी क्षेत्रों में भी समुदाय आधारित पर्यटन के ऐसे प्रयोगों के विस्तार की संभावना बन सकती है। फिलहाल तुआल्ते और च्वांग्टलाई गांवों से शुरू हुआ यह तीन दिवसीय आयोजन मिजोरम के 2026 फेस्टिवल सीजन में ग्रामीण पर्यटन का नया प्रयोग बनकर सामने आया है।
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