आइजोल: मिजोरम के एक दूरदराज गांव की महिला किसान ने स्ट्रॉबेरी की खेती से न केवल अपनी जिंदगी बदली, बल्कि अब उनकी मेहनत को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिलने जा रही है। लॉन्गतलाई जिले के सांगाउ गांव की 35 वर्षीय जेड टी लालरिथांगी, जिन्हें स्थानीय तौर पर पि मारी-ई के नाम से जाना जाता है, को संयुक्त राष्ट्र के खाद्य एवं कृषि संगठन (FAO) ने ‘100 Women Heroes in Agrifood Systems and Rural Development’ के लिए चुना है।
यह सम्मान International Year of Women Farmers 2026 के तहत दिया जा रहा है। लालरिथांगी के मुताबिक इस सम्मान के लिए 131 देशों की 600 से ज्यादा महिलाओं को नामित किया गया था, जिनमें से 100 महिलाओं का चयन हुआ। वह भारत से चुनी गई दो महिलाओं में शामिल हैं।
1000 पौधों से शुरू किया सफर
लालरिथांगी ने साल 2024 में स्ट्रॉबेरी की खेती शुरू की थी। पड़ोसी सियाहा जिले के किसानों को सफलतापूर्वक स्ट्रॉबेरी उगाते देखकर उन्हें भी इस खेती को आजमाने का विचार आया।
शुरुआत में उन्होंने सांगाउ से करीब पांच किलोमीटर दूर अपने खेत में लगभग 1000 स्ट्रॉबेरी के पौधे लगाए। पहले ही साल इस प्रयोग से उन्हें करीब 1.5 लाख रुपये की कमाई हुई। अच्छे परिणाम मिलने के बाद उन्होंने खेती का दायरा बढ़ाने का फैसला किया।
आज उनके पास दो हेक्टेयर क्षेत्र में 10 हजार से ज्यादा स्ट्रॉबेरी के पौधे हैं। स्ट्रॉबेरी के साथ वह एवोकाडो, केला और अन्य फल-सब्जियों की खेती भी करती हैं।
एक साल में 10 लाख से ज्यादा कमाई
स्ट्रॉबेरी की खेती ने लालरिथांगी को आर्थिक रूप से भी बड़ी सफलता दिलाई। साल 2025 में उन्होंने स्ट्रॉबेरी से 10 लाख रुपये से ज्यादा की कमाई की। उन्होंने केवल ताजी स्ट्रॉबेरी बेचने तक खुद को सीमित नहीं रखा, बल्कि इससे वैल्यू एडेड प्रोडक्ट तैयार करने पर भी काम किया।
वह स्ट्रॉबेरी से स्थानीय बाजार के लिए वाइन भी तैयार करती हैं। इसके अलावा उनकी खेती में दूसरे फलों और सब्जियों को भी जगह दी गई है, जिससे आय के अलग-अलग स्रोत तैयार हुए हैं।
कभी करती थीं स्कूल में पढ़ाने का काम
लालरिथांगी का किसान बनने का सफर भी खास है। उन्होंने IGNOU से समाजशास्त्र में पोस्ट ग्रेजुएशन किया है और पहले एक निजी स्कूल में शिक्षिका के रूप में काम करती थीं। सरकारी नौकरी हासिल करने के लिए उन्होंने कई प्रतियोगी परीक्षाएं भी दीं, लेकिन बाद में उन्होंने खेती को अपना पेशा बनाने का फैसला किया।
स्ट्रॉबेरी की खेती शुरू करते समय उनके पास इसकी कोई औपचारिक ट्रेनिंग नहीं थी। उन्होंने इंटरनेट पर उपलब्ध खेती से जुड़े वीडियो और दूसरे किसानों के अनुभवों से तकनीक सीखी। परिवार ने भी खेती को आगे बढ़ाने में उनका साथ दिया।
रोम में मिलेगा सम्मान
FAO ने लालरिथांगी को 21 सितंबर को ईमेल के जरिए उनके चयन की जानकारी दी। उन्हें इटली की राजधानी रोम स्थित FAO मुख्यालय में होने वाले World Food Forum में सम्मान ग्रहण करने के लिए आमंत्रित किया गया है। यह कार्यक्रम 12 से 16 अक्टूबर 2026 के बीच आयोजित होगा।
इससे पहले लालरिथांगी को Mizoram Horti Fair 2026 में लॉन्गतलाई जिले की सर्वश्रेष्ठ किसान भी चुना जा चुका है। अब FAO की अंतरराष्ट्रीय मान्यता ने उनकी सफलता को वैश्विक मंच तक पहुंचा दिया है।
मेहनत से बनाई अलग पहचान
एक हजार पौधों के छोटे से प्रयोग से शुरू हुआ लालरिथांगी का सफर आज 10 हजार से ज्यादा स्ट्रॉबेरी पौधों तक पहुंच चुका है। सरकारी नौकरी की तलाश छोड़कर खेती अपनाने और बिना औपचारिक प्रशिक्षण के नई तकनीक सीखने का उनका फैसला अब उनके लिए अंतरराष्ट्रीय पहचान लेकर आया है।
FAO के ‘100 Women Heroes’ में जगह मिलने के साथ लालरिथांगी की कहानी मिजोरम के ग्रामीण क्षेत्र से निकलकर दुनिया के सामने पहुंची है। उनकी सफलता दिखाती है कि उच्च मूल्य वाली बागवानी फसलों और वैल्यू एडिशन के जरिए ग्रामीण क्षेत्रों में खेती को बेहतर आमदनी के अवसर में बदला जा सकता है।
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