शिल्लोंग : मेघालय सरकार ने राज्य में बढ़ रही सी-सेक्शन (Cesarean Section) डिलीवरी की संख्या को लेकर अध्ययन कराने का फैसला किया है। स्वास्थ्य मंत्री वेलादमिकी शायला ने विधानसभा में कहा कि सरकार यह पता लगाएगी कि सामान्य प्रसव की जगह ऑपरेशन से होने वाली डिलीवरी का चलन क्यों बढ़ रहा है।

यह मुद्दा विधानसभा में विपक्ष के नेता मुकुल संगमा ने उठाया था। उन्होंने कहा कि संस्थागत प्रसव को बढ़ावा देना जरूरी है, लेकिन साथ ही यह समझना भी जरूरी है कि राज्य में सामान्य प्रसव की तुलना में सी-सेक्शन मामलों में वृद्धि क्यों हो रही है।
स्वास्थ्य विभाग करेगा कारणों की जांच
स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि सरकार सी-सेक्शन डिलीवरी के बढ़ते मामलों के पीछे चिकित्सा कारणों, स्वास्थ्य सुविधाओं और अन्य पहलुओं का अध्ययन करेगी। इसके जरिए यह समझने की कोशिश की जाएगी कि किन परिस्थितियों में महिलाओं को ऑपरेशन की जरूरत पड़ रही है।
संस्थागत प्रसव में हुई बढ़ोतरी
मेघालय में संस्थागत प्रसव दर में भी सुधार हुआ है। अगस्त 2026 में राज्य में संस्थागत प्रसव दर करीब 80.49 प्रतिशत दर्ज की गई। हालांकि, स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि सुरक्षित प्रसव के साथ यह भी सुनिश्चित करना जरूरी है कि सी-सेक्शन केवल आवश्यक चिकित्सा परिस्थितियों में ही किया जाए।
सामान्य प्रसव को लेकर उठे सवाल
विधानसभा चर्चा के दौरान यह चिंता जताई गई कि कई जगहों पर सामान्य प्रसव की संभावना होने के बावजूद ऑपरेशन डिलीवरी की संख्या बढ़ रही है। नेताओं ने कहा कि इस विषय पर राज्य स्तर पर विस्तृत समीक्षा की जरूरत है।
मातृ स्वास्थ्य के लिए जरूरी है संतुलन
विशेषज्ञों के अनुसार, सी-सेक्शन एक जरूरी चिकित्सा प्रक्रिया है जो जटिल परिस्थितियों में मां और बच्चे की जान बचा सकती है। लेकिन बिना चिकित्सकीय आवश्यकता के बढ़ते ऑपरेशन को लेकर दुनिया भर में चिंता जताई जाती रही है।
मेघालय सरकार का यह अध्ययन भविष्य में मातृ स्वास्थ्य नीतियों को बेहतर बनाने और प्रसव सेवाओं को अधिक प्रभावी बनाने में मदद कर सकता है।

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