शिलॉन्ग: मेघालय में सर्वाइकल कैंसर से बचाव के लिए शुरू किया गया ह्यूमन पैपिलोमा वायरस (HPV) टीकाकरण अभियान शुरुआती दौर में ही धीमा पड़ता दिखाई दे रहा है। राज्य में तय लक्ष्य की तुलना में अब तक सिर्फ करीब 5 प्रतिशत पात्र लड़कियों तक ही वैक्सीन पहुंच पाई है, जिससे स्वास्थ्य विभाग की चिंता बढ़ गई है।

मेघालय में HPV वैक्सीनेशन अभियान 14 साल की उम्र वाली लड़कियों को ध्यान में रखकर शुरू किया गया था। राज्य सरकार ने इसके लिए बड़े स्तर पर तैयारी की थी और हजारों स्वास्थ्यकर्मियों को अभियान से जोड़ा गया था। राज्य में करीब 39 हजार पात्र लाभार्थियों को टीका लगाने का लक्ष्य रखा गया था। हालांकि अभियान की रफ्तार उम्मीद के मुताबिक नहीं रही। अब तक सीमित संख्या में ही किशोरियों को वैक्सीन लग पाई है। स्वास्थ्य अधिकारियों के अनुसार जागरूकता की कमी, अभिभावकों की झिझक और वैक्सीन को लेकर भ्रम जैसी वजहें कम कवरेज का कारण बन रही हैं।
सर्वाइकल कैंसर से बचाव के लिए अहम टीका
HPV वैक्सीन को सर्वाइकल कैंसर से बचाव का प्रभावी माध्यम माना जाता है। विशेषज्ञों के अनुसार ज्यादातर सर्वाइकल कैंसर के मामलों का संबंध हाई रिस्क HPV संक्रमण से होता है। समय पर टीकाकरण से भविष्य में इस बीमारी के खतरे को काफी कम किया जा सकता है। मेघालय में भी सर्वाइकल कैंसर के मामले सामने आ रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि बीमारी की रोकथाम के लिए टीकाकरण और नियमित जांच दोनों जरूरी हैं।
ग्रामीण इलाकों में बढ़ाई जाएगी जागरूकता
कम टीकाकरण दर को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग अब स्कूलों, सामुदायिक केंद्रों और स्थानीय संगठनों के माध्यम से जागरूकता बढ़ाने की तैयारी कर रहा है। अधिकारियों का लक्ष्य है कि अधिक से अधिक अभिभावकों को HPV वैक्सीन के फायदे और सुरक्षा के बारे में जानकारी दी जाए। स्वास्थ्य विभाग ने लोगों से अपील की है कि वे अफवाहों पर ध्यान न दें और योग्य उम्र की लड़कियों का टीकाकरण करवाएं। सरकार का कहना है कि यह अभियान स्वैच्छिक है और अभिभावकों की सहमति के बाद ही वैक्सीन लगाई जा रही है।
अभियान में तेजी लाने की चुनौती
मेघालय में HPV अभियान की धीमी शुरुआत ने स्वास्थ्य व्यवस्था के सामने चुनौती खड़ी कर दी है। आने वाले समय में विभाग को टीकाकरण केंद्रों की संख्या, जागरूकता कार्यक्रमों और समुदाय की भागीदारी बढ़ाकर लक्ष्य तक पहुंचने की कोशिश करनी होगी।
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