विवेक जूनियर कॉलेज में लड़कियों पर बुर्का प्रतिबंध, हिजाब की अनुमति के बावजूद विवाद जारी

Update: 2025-12-03 17:23 GMT
Mumbai मुंबई: गोरेगांव वेस्ट स्थित विवेक जूनियर कॉलेज में एक विवादित मुद्दा सामने आया है, जिसमें लड़कियों को कक्षा में बुर्का पहनने पर प्रतिबंध है। हालांकि कॉलेज में हिजाब पहनने की अनुमति है, लेकिन कई छात्राएं इस नियम से असहज हैं और चाहती हैं कि उन्हें बुर्का पहनने की भी अनुमति दी जाए। इस मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए जाहनारा शेख, जो कि इस पार्टी की मुंबई महिला विंग की उपाध्यक्ष और वकील भी हैं, ने कहा, "यह विवेक जूनियर कॉलेज है। यहां लड़कियों को कक्षा में बुर्का पहनने की अनुमति नहीं है। हिजाब की अनुमति है, लेकिन कई छात्राएं इससे असहज हैं और चाहती हैं कि उन्हें बुर्का पहनने की अनुमति दी जाए।"
उन्होंने आगे कहा कि यह मामला महिला अधिकार और धार्मिक स्वतंत्रता के नजरिए से महत्वपूर्ण है। उनका कहना है कि छात्राओं को अपने धार्मिक विश्वासों के अनुसार पहनावे की स्वतंत्रता दी जानी चाहिए, बशर्ते यह कॉलेज के शिक्षण और अनुशासन में किसी तरह की बाधा न डाले। कॉलेज प्रशासन का कहना है कि उन्होंने सुरक्षा और अनुशासन के कारण बुर्का पर प्रतिबंध लगाया है। प्रशासन के अनुसार, बुर्का पहनने से छात्राओं की पहचान करना मुश्किल हो जाता है, और इसके चलते कैंपस में सुरक्षा और निगरानी पर असर पड़ सकता है। वहीं, छात्राएं यह मानती हैं कि उनका पहनावा उनके धार्मिक अधिकार और निजता से जुड़ा हुआ है।
मामले ने छात्रों और अभिभावकों के बीच भी चिंता और असंतोष बढ़ा दिया है। कई अभिभावक चाहते हैं कि कॉलेज में सभी मुस्लिम छात्राओं को हिजाब और बुर्का दोनों पहनने की अनुमति दी जाए। उनका कहना है कि किसी छात्रा को केवल उसके पहनावे के कारण असहज या अलग-थलग महसूस करना नहीं चाहिए। विशेषज्ञों का मानना है कि शिक्षा संस्थानों में धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान का सम्मान करना जरूरी है। वहीं, कुछ का यह भी मानना है कि सुरक्षा कारणों और कैंपस नियमों को ध्यान में रखते हुए इस तरह के प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं।
इस विवाद ने सामाजिक और राजनीतिक मंचों पर भी बहस को जन्म दिया है। कई महिला अधिकार कार्यकर्ता और समाजवादी संगठन कॉलेज के इस नियम पर सवाल उठा रहे हैं और छात्रों के धार्मिक स्वतंत्रता और अधिकारों के पक्ष में आवाज उठा रहे हैं। इस घटना ने यह स्पष्ट कर दिया है कि भारत के शिक्षा संस्थानों में धार्मिक पहचान और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के बीच संतुलन बनाए रखना अभी भी एक चुनौतीपूर्ण विषय है। छात्राओं, अभिभावकों और प्रशासन के बीच संवाद और समझौते की आवश्यकता बढ़ गई है, ताकि शिक्षा का अधिकार और धार्मिक स्वतंत्रता दोनों सुरक्षित रहें।
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