मुंबई। गणेशोत्सव के अवसर पर इस बार मुंबई में आस्था और वास्तुकला का अनोखा संगम देखने को मिलेगा। आजाद नगर पंडाल में प्रसिद्ध ‘अंधेरीचा राजा’ के लिए अयोध्या स्थित श्री राम जन्मभूमि मंदिर से प्रेरित एक भव्य ढांचा तैयार किया जा रहा है। इस पंडाल की खास डिजाइन और विशाल संरचना इसे गणेशोत्सव के प्रमुख आकर्षणों में शामिल कर रही है।

आयोजकों के अनुसार, इस साल का पंडाल केवल धार्मिक आयोजन का केंद्र नहीं होगा, बल्कि भारतीय वास्तुकला और आधुनिक तकनीक के मेल का उदाहरण भी बनेगा। इसे इस तरह डिजाइन किया गया है कि श्रद्धालुओं को मंदिर जैसी भव्यता और आध्यात्मिक अनुभव मिल सके।

14 हजार वर्ग फुट में तैयार हो रहा विशाल पंडाल

अंधेरीचा राजा के लिए तैयार किए जा रहे इस पंडाल का निर्माण 14,000 वर्ग फुट के प्लेटफॉर्म पर किया जा रहा है। इसकी संरचना को मजबूत बनाने के लिए लकड़ी और करीब चार टन स्टील का इस्तेमाल किया गया है।

पंडाल को आकर्षक रूप देने के लिए करीब 4,800 वर्ग फुट सजावटी सीलिंग फैब्रिक लगाया गया है। डिजाइन का मुख्य उद्देश्य अयोध्या मंदिर की पारंपरिक नागर शैली की वास्तुकला को दोहराना है।

आयोजकों ने बताया कि इस बार पंडाल निर्माण में पर्यावरण का भी विशेष ध्यान रखा गया है। इसे अधिक टिकाऊ और पर्यावरण अनुकूल बनाने के लिए ऐसी सामग्रियों का इस्तेमाल किया गया है जिन्हें भविष्य में दोबारा उपयोग में लाया जा सके।

46 सजावटी खंभे होंगे मुख्य आकर्षण

इस भव्य पंडाल की सबसे बड़ी विशेषताओं में इसके सजावटी खंभे शामिल हैं। पूरे ढांचे में 46 आकर्षक खंभे लगाए गए हैं। इनमें से प्रत्येक खंभे की ऊंचाई करीब 15 फीट है।

इसके अलावा पंडाल में भव्य प्रवेश द्वार के मेहराब, 20 साइड मेहराब, भगवान विष्णु की थीम पर आधारित विशेष मेहराब और बारीक जालीदार सजावटी पैनल तैयार किए जा रहे हैं।

पारंपरिक मंदिर शैली को दर्शाने के लिए गुंबदों को भी विशेष रूप से डिजाइन किया गया है। इन गुंबदों को कलश से सजाया जाएगा, जिससे पूरा ढांचा मंदिर जैसी भव्यता प्रदान करेगा।

धर्मेश शाह ने तैयार किया डिजाइन

इस अनोखे पंडाल का डिजाइन प्रसिद्ध आर्ट डायरेक्टर धर्मेश शाह ने तैयार किया है। उनकी टीम ने अयोध्या मंदिर की स्थापत्य शैली से प्रेरणा लेते हुए पंडाल को तैयार किया है।

धर्मेश शाह के अनुसार, इस डिजाइन का उद्देश्य केवल भव्यता दिखाना नहीं है, बल्कि भारतीय संस्कृति, परंपरा और वास्तुकला की खूबसूरती को लोगों तक पहुंचाना भी है।

उन्होंने बताया कि पंडाल में श्रद्धालुओं को ऐसा अनुभव देने का प्रयास किया गया है, जिससे उन्हें भारतीय मंदिर वास्तुकला की झलक देखने को मिले।

श्रद्धालुओं के लिए बनेगा विशेष अनुभव

मुंबई का गणेशोत्सव देशभर में अपनी भव्यता और उत्साह के लिए प्रसिद्ध है। हर साल अलग-अलग पंडाल अपनी अनोखी थीम और सजावट के कारण लोगों का ध्यान आकर्षित करते हैं।

अंधेरीचा राजा का यह पंडाल इस बार श्रद्धालुओं के लिए खास अनुभव लेकर आएगा। आयोजकों का कहना है कि यहां आने वाले भक्तों को धार्मिक आस्था के साथ-साथ कला और स्थापत्य का अद्भुत संगम देखने को मिलेगा।

पंडाल की सजावट में पारंपरिक भारतीय कला के साथ आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल किया गया है। रोशनी और सजावटी तत्वों के माध्यम से इसकी सुंदरता को और बढ़ाने की तैयारी की जा रही है।

पर्यावरण संरक्षण का भी रखा गया ध्यान

आयोजकों ने बताया कि इस बार पंडाल निर्माण में पर्यावरण को प्राथमिकता दी गई है। निर्माण में रीसायकल होने वाली सामग्रियों का उपयोग किया गया है, ताकि उत्सव के बाद भी सामग्री का बेहतर इस्तेमाल किया जा सके।

गणेशोत्सव के दौरान बड़े-बड़े पंडालों में इस्तेमाल होने वाली सामग्री को लेकर पर्यावरण संबंधी चिंताएं भी उठती रही हैं। ऐसे में टिकाऊ सामग्री का उपयोग एक सकारात्मक पहल माना जा रहा है।

मुंबई गणेशोत्सव में बढ़ेगा आकर्षण

मुंबई में गणेशोत्सव केवल धार्मिक पर्व नहीं बल्कि कला, संस्कृति और सामुदायिक उत्सव का प्रतीक माना जाता है। अंधेरीचा राजा का यह नया पंडाल इस परंपरा को और भव्य बनाने की दिशा में एक बड़ा प्रयास है।

आयोजकों को उम्मीद है कि अयोध्या मंदिर से प्रेरित यह पंडाल बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं को आकर्षित करेगा। इसकी वास्तुकला, सजावट और पर्यावरण अनुकूल निर्माण इसे इस साल के गणेशोत्सव के प्रमुख आकर्षणों में शामिल कर सकता है।

अंधेरीचा राजा का यह पंडाल श्रद्धा, भारतीय संस्कृति और आधुनिक डिजाइन का ऐसा मेल पेश करेगा, जो आने वाले दिनों में मुंबई के गणेशोत्सव की खास पहचान बन सकता है।

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