Maharashtra महाराष्ट्र। भारत के राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम’ की 150वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में शनिवार को पुणे शहर में ‘वंदे मातरम ग्लोरी मार्च’ का भव्य आयोजन किया गया। इस ऐतिहासिक अवसर पर शहर के नागरिकों, विद्यार्थियों, समाजसेवी संस्थाओं और स्वयंसेवकों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। मार्च का उद्देश्य देशभक्ति, राष्ट्रीय एकता और सांस्कृतिक गौरव की भावना को सशक्त बनाना था। शहर के ऐतिहासिक शनिवारवाड़ा से शुरू होकर यह मार्च मुख्य मार्गों से होते हुए सरदार वल्लभभाई पटेल चौक तक पहुंचा। मार्ग में जगह-जगह लोगों ने पुष्पवर्षा कर प्रतिभागियों का स्वागत किया। कार्यक्रम में पारंपरिक ढोल-ताशों की गूंज, बैंड दल की लयबद्ध प्रस्तुति और देशभक्ति गीतों ने माहौल को भावनाओं से भर दिया।
इस आयोजन में स्कूली बच्चों ने तिरंगा झंडा लहराते हुए ‘वंदे मातरम’ और ‘भारत माता की जय’ के नारे लगाए। शहर के कई शिक्षण संस्थानों, एनसीसी कैडेट्स और सामाजिक संगठनों ने देशभक्ति झांकियां भी प्रस्तुत कीं, जिनमें भारत के स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़े प्रसंगों को दर्शाया गया था। कार्यक्रम के आयोजकों ने कहा कि “वंदे मातरम” केवल एक गीत नहीं बल्कि भारत की आत्मा का प्रतीक है, जिसने स्वतंत्रता संग्राम के दौरान करोड़ों भारतीयों को प्रेरित किया। 150 वर्ष पूरे होने पर इस गीत के माध्यम से नई पीढ़ी को देश की ऐतिहासिक धरोहर और एकता के संदेश से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है।
आयोजन समिति के संयोजक ने बताया कि इस मार्च का उद्देश्य युवाओं में देश के प्रति गर्व और जिम्मेदारी की भावना को मजबूत करना है। उन्होंने कहा कि “वंदे मातरम” का स्वर भारत के हर नागरिक को याद दिलाता है कि हमारा राष्ट्र केवल भौगोलिक सीमाओं से नहीं, बल्कि साझा संस्कृति, त्याग और बलिदान की भावना से एकजुट है। कार्यक्रम के अंत में राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम’ का सामूहिक गायन किया गया, जिसके साथ ही आसमान तिरंगे झंडों और देशभक्ति नारों से गूंज उठा। ‘वंदे मातरम ग्लोरी मार्च’ ने पुणे में न केवल 150 वर्षों की ऐतिहासिक विरासत का उत्सव मनाया, बल्कि यह भी साबित किया कि देशभक्ति आज भी भारतीय समाज की सबसे सशक्त प्रेरक शक्ति है।
Tags: