मुंबई। सामाजिक कार्यकर्ता एवं वकील सरिता खानचंदानी की कथित आत्महत्या से जुड़े मामले में ठाणे पुलिस ने जांच प्रक्रिया के दौरान केस डायरी के रखरखाव और उसकी निगरानी में हुई कमियों को स्वीकार किया है। पुलिस ने बॉम्बे हाई कोर्ट में 13 पन्नों का हलफनामा दाखिल कर बताया कि मामले से जुड़े चार अधिकारियों के विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू कर दी गई है। इसके साथ ही मामले की जांच दूसरे अधिकारी को सौंप दी गई है।

ठाणे पुलिस की ओर से यह हलफनामा संयुक्त पुलिस आयुक्त अपराध डॉ. पंजाबराव उगाले ने दाखिल किया है। यह जवाब मृत वकील के पति और अधिवक्ता पुरुषोत्तम लिलाराम खानचंदानी की रिट याचिका पर हाई कोर्ट द्वारा दिए गए निर्देश के बाद प्रस्तुत किया गया। याचिकाकर्ता ने जांच की निष्पक्षता और उसके तरीके पर सवाल उठाते हुए मामले को मौजूदा पुलिस जोन से किसी अन्य एजेंसी अथवा अधिकारी को सौंपने की मांग की थी।

हाई कोर्ट ने मांगी थी जांच की स्थिति

बॉम्बे हाई कोर्ट ने 21 अगस्त 2026 को मामले की सुनवाई के दौरान जांच की स्थिति और केस डायरी के रखरखाव को लेकर चिंता जताई थी। अदालत ने पुलिस को मामले की प्रगति से जुड़ी स्थिति रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया था। इसके बाद संयुक्त पुलिस आयुक्त डॉ. उगाले ने व्यक्तिगत रूप से केस डायरी की जांच की।

हलफनामे के मुताबिक, जांच करने वाले अधिकारियों ने केस डायरी को निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार व्यवस्थित रूप से तैयार नहीं किया था। पुलिस स्टेशन के प्रभारी की ओर से भी यह सुनिश्चित नहीं किया गया कि जांच शुरू होने के समय जांच अधिकारी को पन्नों की क्रम संख्या और आधिकारिक मुहर वाली केस डायरी उपलब्ध कराई जाए।

पुलिस ने स्वीकार किया कि केस डायरी के अंत में लगाया जाने वाला आवश्यक प्रमाणपत्र पूरा नहीं भरा गया था। इसके अलावा कई पन्नों पर क्रम संख्या दर्ज नहीं थी। अगस्त 2026 में की गई कुछ जांच प्रविष्टियां भी बिना पृष्ठ संख्या वाली पाई गईं। इन्हीं कमियों के कारण अदालत ने मामले की जांच प्रक्रिया और रिकॉर्ड के सुरक्षित रखरखाव पर सवाल उठाए थे।

दो जांच अधिकारियों के काम में मिली कमी

हलफनामे में बताया गया कि सहायक पुलिस निरीक्षक हर्षल कुलकर्णी ने 28 अगस्त 2025 से 22 जून 2026 तक मामले की जांच की थी। इसके बाद जांच की जिम्मेदारी सहायक पुलिस निरीक्षक अपेक्षा जाधव को दी गई। एक और 21 अगस्त 2026 की केस डायरी प्रविष्टियों में भी पन्नों का क्रमांकन नहीं पाया गया।

इस मामले में कराई गई विभागीय जांच के दौरान पुलिस उपायुक्त जोन चार ने कुलकर्णी और जाधव की ओर से केस डायरी का उचित रखरखाव नहीं किए जाने से संबंधित कमियां पाईं। इसके साथ दो अन्य अधिकारियों की निगरानी की भूमिका भी जांच के दायरे में आई। इसके बाद चारों के विरुद्ध विभागीय कार्रवाई की प्रक्रिया प्रारंभ की गई।

हर्षल कुलकर्णी का तबादला ठाणे ग्रामीण में हो चुका है। उनके संबंध में तैयार डिफॉल्ट रिपोर्ट ठाणे ग्रामीण के पुलिस अधीक्षक को भेजी गई है, ताकि सेवा नियमों के अनुसार उचित अनुशासनात्मक कार्रवाई की जा सके। अपेक्षा जाधव और दो अन्य अधिकारियों से संबंधित रिपोर्ट ठाणे शहर के पुलिस आयुक्त को भेजी गई है।

पुलिस ने दुर्भावनापूर्ण मंशा से किया इनकार

केस डायरी के रखरखाव में कमियां स्वीकार करने के बावजूद पुलिस ने कहा कि रिकॉर्ड से छेड़छाड़, जांच सामग्री को दबाने या तथ्यों को गलत रूप में पेश करने की कोई दुर्भावनापूर्ण मंशा नहीं थी। हलफनामे में बताया गया कि केस डायरी में शामिल सभी कागजात एक साथ बांधकर रिकॉर्ड के एक पूर्ण सेट के रूप में रखे गए थे।

पुलिस के मुताबिक, डायरी में दर्ज सामग्री से समय-समय पर जांच अधिकारियों द्वारा उठाए गए कदमों का पता चलता है। पन्नों का क्रमांकन नहीं किया जाना एक अनजानी प्रक्रियात्मक चूक थी। इसे जांच के किसी हिस्से को बदलने, छिपाने या गलत तरीके से प्रस्तुत करने के प्रयास के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

अधिकारी अपेक्षा जाधव की ओर से भी कहा गया कि केस डायरी में सामने आई विसंगति मानवीय भूल के कारण हुई और यह जानबूझकर नहीं की गई थी। अब अदालत पुलिस के स्पष्टीकरण और याचिकाकर्ता की दलीलों पर विचार करेगी।

दूसरे अधिकारी को सौंपी गई जांच

हलफनामे के अनुसार विट्ठलवाड़ी पुलिस स्टेशन के वरिष्ठ निरीक्षक ने 31 अगस्त 2026 को जांच स्थानांतरित करने का आदेश दिया। अब मामले की जांच उसी पुलिस स्टेशन के पुलिस निरीक्षक अपराध को सौंपी गई है। इस कदम को जांच में पारदर्शिता बनाए रखने और अदालत द्वारा जताई गई चिंताओं को दूर करने के प्रयास के रूप में देखा जा रहा है।

संयुक्त पुलिस आयुक्त ने हाई कोर्ट को यह भरोसा भी दिया है कि भविष्य में केस डायरी के रखरखाव की समय-समय पर समीक्षा के लिए मजबूत निगरानी व्यवस्था अपनाई जाएगी। जांच अधिकारियों द्वारा तैयार की जाने वाली डायरी की वरिष्ठ अधिकारियों से नियमित जांच कराई जाएगी और कोई कमी पाए जाने पर उसे तत्काल सुधारा जाएगा।

क्या है सरिता खानचंदानी मामला

वकील और सामाजिक कार्यकर्ता सरिता खानचंदानी की अगस्त 2025 में कथित तौर पर एक इमारत की सातवीं मंजिल से गिरने के बाद मौत हो गई थी। वह ध्वनि प्रदूषण सहित विभिन्न नागरिक मुद्दों को लेकर सक्रिय थीं। घटना के बाद उनके पति पुरुषोत्तम खानचंदानी ने कुछ लोगों पर उन्हें प्रताड़ित करने और आत्महत्या के लिए उकसाने के आरोप लगाए थे। संबंधित लोगों ने आरोपों से इनकार किया था।

मामले में सामने आए कथित सुसाइड नोट के आधार पर प्राथमिकी दर्ज की गई थी। मृतका के परिवार ने जांच पर सवाल उठाते हुए वरिष्ठ अधिकारी की निगरानी में निष्पक्ष जांच की मांग की। यह मामला फिलहाल न्यायिक विचाराधीन है और आरोपों पर अंतिम निष्कर्ष अदालत तथा जांच पूरी होने के बाद ही निकलेगा।

 पुलिस ने हलफनामे में प्रक्रियात्मक कमियां स्वीकार करते हुए भविष्य में केस डायरी की नियमित निगरानी का आश्वासन दिया है। इस घटनाक्रम के बाद अब हाई कोर्ट के अगले रुख और बदले गए जांच अधिकारी की रिपोर्ट पर नजर रहेगी।

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