मुंबई: मुंबई महानगर क्षेत्र में रेलवे के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए चल रहे विरार-दहानू चौगुनी लाइन प्रोजेक्ट में इंजीनियरों ने निर्माण सामग्री पहुंचाने का नया तरीका अपनाया है। जिन इलाकों तक सामान्य सड़क मार्ग से पहुंचना संभव नहीं है, वहां अब रेलवे लाइन को ही एक तरह के ‘कंस्ट्रक्शन हाईवे’ के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है। मुंबई रेलवे विकास कॉरपोरेशन (MRVC) ने इसके लिए विशेष RO-RO (रोल-ऑन रोल-ऑफ) ट्रॉली तैनात की है।

यह व्यवस्था खास तौर पर दलदली जमीन, ब्रिज 92, वाधिव आइलैंड और ब्रिज 93 के आसपास के उन क्षेत्रों के लिए की गई है, जहां पारंपरिक सड़क मार्ग उपलब्ध नहीं है। इन दुर्गम हिस्सों में निर्माण कार्य के लिए कंक्रीट, मिट्टी और अन्य जरूरी सामग्री पहुंचाना लंबे समय से चुनौती बना हुआ था। अब रेलवे के मौजूदा बुनियादी ढांचे का इस्तेमाल करते हुए निर्माण सामग्री सीधे कार्यस्थल के करीब पहुंचाई जा रही है।

सड़क की जगह रेलवे का सहारा

विरार-दहानू चौगुनी लाइन परियोजना पश्चिमी रेलवे के महत्वपूर्ण रेल कॉरिडोर को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम है। परियोजना के तहत अतिरिक्त रेलवे लाइनें विकसित की जा रही हैं। इसके लिए कई स्थानों पर बड़े पैमाने पर निर्माण कार्य चल रहा है।

हालांकि, परियोजना के कुछ हिस्से ऐसे हैं जहां भौगोलिक परिस्थितियां निर्माण एजेंसियों के लिए बड़ी चुनौती हैं। दलदली जमीन और आसपास के जलक्षेत्र के कारण वहां भारी वाहनों के लिए सड़क बनाना आसान नहीं है। कई स्थानों पर सड़क निर्माण के लिए जमीन तैयार करने में ही काफी समय और संसाधन लग सकते हैं।

ऐसे में MRVC ने रेलवे मार्ग का उपयोग निर्माण सामग्री की आवाजाही के लिए करने का फैसला किया। RO-RO ट्रॉली इस योजना का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

70 टन की सैद्धांतिक क्षमता

MRVC द्वारा इस्तेमाल की जा रही RO-RO ट्रॉली करीब 8 मीटर लंबी और 3 मीटर चौड़ी है। इसकी सैद्धांतिक भार क्षमता लगभग 70 मीट्रिक टन बताई गई है, जबकि काम के दौरान इसकी परिचालन क्षमता करीब 50 टन रखी गई है।

ट्रॉली पर निर्माण सामग्री लोड की जाती है और फिर इसे रेलवे के मौजूदा मार्ग के जरिए संबंधित निर्माण स्थल तक पहुंचाया जाता है। इससे भारी सामग्री को सड़क मार्ग से लंबी दूरी तक ले जाने की आवश्यकता कम हो जाती है।

कंस्ट्रक्शन टीम के लिए इसका सबसे बड़ा फायदा यह है कि जिस जगह तक ट्रक या अन्य भारी वाहन आसानी से नहीं पहुंच सकते, वहां रेलवे के जरिए सामग्री पहुंचाई जा सकती है।

DFCCIL के पुल का भी इस्तेमाल

इस व्यवस्था के तहत ट्रॉली को मौजूदा डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (DFCCIL) के पुल के ऊपर से ले जाया जाता है। इससे निर्माण टीमों को उन क्षेत्रों तक पहुंच मिल रही है, जहां सामान्य सड़क नेटवर्क तैयार करना मुश्किल है।

रेलवे ढांचे का इस तरह इस्तेमाल निर्माण कार्य की गति बढ़ाने में मदद कर सकता है। साथ ही, दुर्गम इलाकों में भारी निर्माण सामग्री पहुंचाने के लिए अस्थायी सड़क या लंबा वैकल्पिक मार्ग तैयार करने की जरूरत भी कम होती है।

दलदली जमीन सबसे बड़ी चुनौती

विरार-दहानू क्षेत्र में परियोजना के कुछ हिस्सों में दलदली जमीन निर्माण कार्य को जटिल बनाती है। ऐसी जमीन पर भारी ट्रकों की आवाजाही के लिए मजबूत सड़क या अस्थायी ट्रैक तैयार करना आसान नहीं होता। बारिश के दौरान समस्या और बढ़ सकती है।

इसके अलावा, पुलों और द्वीप जैसे भौगोलिक क्षेत्रों तक निर्माण सामग्री पहुंचाना भी चुनौतीपूर्ण होता है। वाधिव आइलैंड और ब्रिज 92 तथा ब्रिज 93 के आसपास के इलाकों में पारंपरिक सड़क संपर्क नहीं होने के कारण रेलवे मार्ग का उपयोग व्यावहारिक विकल्प के रूप में सामने आया है।

निर्माण सामग्री की आवाजाही में मिलेगी मदद

चौगुनी लाइन परियोजना में बड़ी मात्रा में कंक्रीट, मिट्टी और अन्य निर्माण सामग्री की जरूरत होती है। यदि इन्हें केवल उपलब्ध सड़क मार्गों के जरिए पहुंचाया जाए तो परिवहन में अधिक समय लग सकता है। साथ ही दुर्गम इलाकों में भारी वाहनों की आवाजाही के लिए अतिरिक्त व्यवस्था करनी पड़ सकती है।

RO-RO ट्रॉली के जरिए एक बार में बड़ी मात्रा में सामग्री पहुंचाई जा सकती है। इससे निर्माण स्थल तक सामग्री की आपूर्ति अधिक व्यवस्थित तरीके से करने में मदद मिलती है।

यह तरीका खासतौर पर उन क्षेत्रों में उपयोगी है जहां सड़क निर्माण स्वयं परियोजना के लिए एक अलग और महंगा काम बन सकता है।

रेलवे ढांचे का अभिनव इस्तेमाल

निर्माण कार्य में रेलवे नेटवर्क का इस तरह इस्तेमाल बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के लिए एक वैकल्पिक लॉजिस्टिक मॉडल भी प्रस्तुत करता है। आम तौर पर रेलवे का इस्तेमाल यात्रियों और माल की आवाजाही के लिए किया जाता है, लेकिन यहां मौजूदा रेल ढांचे को परियोजना निर्माण की जरूरतों के अनुरूप इस्तेमाल किया जा रहा है।

MRVC की यह व्यवस्था उन परिस्थितियों में उपयोगी साबित हो रही है, जहां प्राकृतिक और भौगोलिक बाधाओं के कारण सड़क मार्ग से निर्माण सामग्री पहुंचाना कठिन है। इससे निर्माण टीमों को कार्यस्थलों तक सीधी पहुंच मिल रही है और दुर्गम हिस्सों में काम जारी रखना आसान हो रहा है।

विरार-दहानू चौगुनी लाइन परियोजना के लिए अपनाई गई RO-RO ट्रॉली व्यवस्था इस बात का उदाहरण है कि बड़े बुनियादी ढांचा प्रोजेक्ट में स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार परिवहन के नए तरीके अपनाए जा सकते हैं। 8 मीटर लंबी और 3 मीटर चौड़ी ट्रॉली, जिसकी परिचालन क्षमता करीब 50 टन है, अब उन इलाकों तक निर्माण सामग्री पहुंचाने में मदद कर रही है जहां सड़कें नहीं पहुंच पातीं।

दलदली जमीन, द्वीप और पुलों के आसपास के दुर्गम क्षेत्रों में रेलवे को ‘कंस्ट्रक्शन हाईवे’ के तौर पर इस्तेमाल करने से परियोजना की लॉजिस्टिक चुनौतियों को कम करने की कोशिश की जा रही है। आने वाले समय में इस व्यवस्था से निर्माण कार्य की गति और सामग्री की आपूर्ति दोनों को बेहतर बनाने में मदद मिलने की उम्मीद है।

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