महाराष्ट्र : लासलगांव से दिल्ली के आदर्श नगर तक प्याज पहुंचाने के लिए चलाई गई खास ‘अनियन एक्सप्रेस’ आखिरकार बुधवार दोपहर रवाना हो गई। यह ट्रेन करीब 42 घंटे की देरी के बाद दोपहर 3:10 बजे लासलगांव रेलवे स्टेशन से दिल्ली के लिए रवाना हुई।
केंद्र सरकार की ‘प्राइस स्टेबलाइज़ेशन फंड’ यानी कीमतों को स्थिर रखने वाली योजना के तहत इस विशेष मालगाड़ी को चलाया गया है। इसका उद्देश्य दिल्ली के बाजारों में प्याज की पर्याप्त आपूर्ति सुनिश्चित करना और बढ़ती खुदरा कीमतों पर नियंत्रण रखने में मदद करना है।
हालांकि, इस विशेष ट्रेन के संचालन में देरी और तय मात्रा से कम प्याज की ढुलाई को लेकर अब सवाल उठने लगे हैं।
840 टन की योजना लेकिन भेजा गया 500 टन प्याज
अनियन एक्सप्रेस में शुरुआत में करीब 840 मीट्रिक टन प्याज लोड करने की योजना बनाई गई थी। लेकिन अंतिम समय में केवल 500 मीट्रिक टन प्याज ही ट्रेन में लोड हो सका।
इस वजह से तय क्षमता के मुकाबले करीब 340 टन कम प्याज दिल्ली के लिए भेजा गया। कम मात्रा में प्याज की ढुलाई होने से नेशनल कोऑपरेटिव कंज्यूमर्स फेडरेशन (NCCF) और सेंट्रल वेयरहाउसिंग कॉरपोरेशन की तैयारी और आपसी तालमेल को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं।
अधिकारियों के अनुसार, प्याज की ग्रेडिंग, पैकिंग और लोडिंग प्रक्रिया में देरी के कारण तय समय पर ट्रेन रवाना नहीं हो सकी।
लासलगांव स्टेशन पर 42 घंटे खड़ी रही ट्रेन
21 डिब्बों वाली यह मालगाड़ी सोमवार रात करीब 11:50 बजे लासलगांव रेलवे स्टेशन पहुंची थी। योजना के अनुसार इसे मंगलवार सुबह 7 बजे दिल्ली के आदर्श नगर के लिए रवाना होना था।
लेकिन वेयरहाउस में प्याज की छंटाई, गुणवत्ता जांच, पैकिंग और लोडिंग का काम धीमी गति से चला। इसके चलते ट्रेन को स्टेशन पर ही करीब 42 घंटे तक इंतजार करना पड़ा।
लंबी देरी के बाद बुधवार दोपहर प्याज एक्सप्रेस को दिल्ली के लिए रवाना किया गया।
दिल्ली में प्याज की कीमतों को नियंत्रित करने की कोशिश
देश के कई हिस्सों में प्याज की कीमतों में उतार-चढ़ाव देखने को मिलता है। खासकर बड़े शहरों में प्याज की मांग और आपूर्ति के बीच अंतर आने पर खुदरा कीमतों में तेजी आ जाती है।
इसी को देखते हुए केंद्र सरकार ने प्याज की उपलब्धता बनाए रखने के लिए बफर स्टॉक और सप्लाई व्यवस्था को मजबूत करने का प्रयास किया है।
प्राइस स्टेबलाइज़ेशन फंड के तहत किसानों और उपभोक्ताओं दोनों के हितों को ध्यान में रखते हुए प्याज की खरीद और वितरण किया जाता है।
NCCF और वेयरहाउसिंग कॉरपोरेशन की भूमिका
इस पूरी व्यवस्था में नेशनल कोऑपरेटिव कंज्यूमर्स फेडरेशन और सेंट्रल वेयरहाउसिंग कॉरपोरेशन की अहम भूमिका है। प्याज को सुरक्षित तरीके से स्टोर करने, उसकी गुणवत्ता बनाए रखने और समय पर बाजार तक पहुंचाने की जिम्मेदारी इन संस्थाओं की है।
हालांकि, इस बार लोडिंग में हुई देरी और कम मात्रा में प्याज भेजे जाने के कारण दोनों संस्थाओं की तैयारी पर सवाल उठाए जा रहे हैं।
किसानों और उपभोक्ताओं दोनों पर नजर
प्याज की कीमतों को नियंत्रित करना सरकार के लिए हमेशा एक चुनौती रहा है। जहां किसानों को उचित कीमत दिलाना जरूरी है, वहीं उपभोक्ताओं को महंगी प्याज से राहत देना भी सरकार की प्राथमिकता होती है।
विशेष ट्रेन के माध्यम से प्याज की आपूर्ति बढ़ाने का उद्देश्य यही है कि बाजार में पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध रहे और कीमतों में अचानक बढ़ोतरी न हो।
आगे भी जारी रह सकती है सप्लाई व्यवस्था
अधिकारियों का कहना है कि प्याज की मांग और बाजार की स्थिति को देखते हुए आगे भी सप्लाई व्यवस्था को मजबूत किया जा सकता है। सरकार की कोशिश है कि बड़े शहरों में प्याज की उपलब्धता बनी रहे।
अनियन एक्सप्रेस का संचालन इसी दिशा में उठाया गया कदम है। हालांकि पहली खेप में हुई देरी और कम मात्रा में ढुलाई ने इस व्यवस्था की तैयारियों पर जरूर सवाल खड़े किए हैं।
अब देखना होगा कि दिल्ली पहुंचने के बाद यह प्याज बाजार में किस तरह असर डालता है और क्या इससे बढ़ती कीमतों पर नियंत्रण पाने में मदद मिलती है।