मुंबई। न्यूयॉर्क में प्रस्तावित राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की रैली को लेकर महाराष्ट्र कांग्रेस के विधायक नाना पटोले ने बुधवार को संगठन की वित्तीय व्यवस्था और उसकी गतिविधियों को लेकर सवाल उठाए। उन्होंने दावा किया कि RSS किसी NGO के रूप में पंजीकृत नहीं है और इसके फंड का ऑडिट नहीं होता। पटोले ने यह भी सवाल किया कि अमेरिका में संगठन को लेकर विरोध की स्थिति के बावजूद RSS प्रमुख मोहन भागवत वहां क्यों गए।

पटोले ने RSS की संगठनात्मक और वित्तीय गतिविधियों को लेकर कई गंभीर आरोप लगाए। हालांकि, उनके इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि यहां उपलब्ध जानकारी के आधार पर नहीं हुई है। RSS की ओर से इन आरोपों पर प्रतिक्रिया सामने आने पर मामले की स्थिति और स्पष्ट हो सकती है।

RSS के पंजीकरण पर उठाया सवाल

नाना पटोले ने दावा किया कि RSS महाराष्ट्र या देश के किसी अन्य हिस्से में किसी NGO के तौर पर पंजीकृत नहीं है। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि कोई संगठन बड़े स्तर पर सामाजिक और सार्वजनिक गतिविधियां संचालित करता है, तो उसकी वित्तीय व्यवस्था और फंड के स्रोतों में पारदर्शिता किस तरह सुनिश्चित की जाती है।

पटोले के मुताबिक, RSS लंबे समय से देश के सामाजिक और सार्वजनिक जीवन में सक्रिय रहा है। ऐसे में संगठन के आर्थिक संसाधनों, उनके स्रोत और खर्च की जानकारी सार्वजनिक होना जरूरी है।

उन्होंने संगठन की वित्तीय व्यवस्था को लेकर ऑडिट का मुद्दा भी उठाया और दावा किया कि फंड के स्रोत और उसके इस्तेमाल को लेकर कोई स्पष्ट ऑडिट व्यवस्था नहीं है।

36 देशों में बैंक खातों का दावा

कांग्रेस विधायक ने RSS की कथित अंतरराष्ट्रीय वित्तीय गतिविधियों का भी जिक्र किया। उन्होंने दावा किया कि संगठन से जुड़े 36 देशों में बैंक खाते हैं। पटोले ने सवाल उठाया कि इन खातों में आने वाले धन का स्रोत क्या है और इनका इस्तेमाल किन गतिविधियों के लिए किया जाता है।

हालांकि, 36 देशों में RSS के बैंक खातों से संबंधित इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध जानकारी के आधार पर नहीं हुई है।

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर काम करने वाले किसी भी संगठन की वित्तीय गतिविधियों को लेकर पारदर्शिता और नियामकीय अनुपालन महत्वपूर्ण विषय होते हैं। ऐसे में पटोले ने RSS की कथित विदेशों में वित्तीय गतिविधियों की भी जांच की जरूरत बताई।

मोहन भागवत के अमेरिका दौरे पर सवाल

नाना पटोले ने RSS प्रमुख मोहन भागवत के अमेरिका जाने को लेकर भी सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि जब अमेरिका में संगठन के कुछ वर्गों की ओर से विरोध किया जा रहा था, तो ऐसे समय में भागवत वहां क्यों गए।

पटोले ने कहा कि RSS प्रमुख का अमेरिका जाना और वहां प्रस्तावित गतिविधियों में शामिल होना ऐसा विषय है, जिस पर गंभीरता से अध्ययन किए जाने की जरूरत है।

उन्होंने अमेरिका में RSS को लेकर कथित विरोध का उल्लेख करते हुए संगठन की अंतरराष्ट्रीय गतिविधियों और उसके प्रभाव को लेकर भी सवाल खड़े किए।

आतंकवादी संगठन घोषित किए जाने का दावा

पटोले ने अपने बयान में यह दावा भी किया कि अमेरिका ने RSS को आतंकवादी संगठन घोषित किया है। हालांकि, इस दावे की भी स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध सामग्री के आधार पर नहीं हुई है।

इस तरह के आरोप बेहद गंभीर प्रकृति के होते हैं और इनके संबंध में आधिकारिक अमेरिकी रिकॉर्ड या संबंधित सरकारी दस्तावेज के आधार पर ही स्थिति स्पष्ट की जा सकती है। इसलिए पटोले के इस दावे को फिलहाल उनके बयान के तौर पर ही देखा जाना चाहिए।

राजनीतिक विवाद बढ़ने के संकेत

RSS को लेकर कांग्रेस और भाजपा के बीच राजनीतिक मतभेद लंबे समय से रहे हैं। RSS को भाजपा का वैचारिक आधार माना जाता है, जबकि कांग्रेस विभिन्न मौकों पर संगठन की विचारधारा और गतिविधियों को लेकर सवाल उठाती रही है।

नाना पटोले का ताजा बयान भी इसी व्यापक राजनीतिक बहस के बीच आया है। न्यूयॉर्क में RSS की रैली और मोहन भागवत की अमेरिका यात्रा को लेकर उनके सवालों से राजनीतिक विवाद और बढ़ने के संकेत मिल रहे हैं।

कांग्रेस नेता ने वित्तीय पारदर्शिता का मुद्दा उठाते हुए संगठन की गतिविधियों की निगरानी और उसके फंड के स्रोतों को लेकर सवाल किया है।

विदेशों में संगठन की गतिविधियों पर चर्चा

RSS की गतिविधियां भारत तक सीमित नहीं हैं और विदेशों में भारतीय समुदायों से जुड़े संगठनों तथा समर्थक समूहों की मौजूदगी को लेकर समय-समय पर चर्चा होती रही है। अमेरिका सहित कई देशों में भारतीय मूल के लोग सामाजिक और सांस्कृतिक गतिविधियों से जुड़े संगठनों के माध्यम से सक्रिय रहते हैं।

ऐसे में न्यूयॉर्क में होने वाली रैली को भी भारतीय प्रवासी समुदाय और RSS से जुड़े लोगों की गतिविधियों के संदर्भ में देखा जा रहा है। हालांकि, रैली का स्वरूप और उसमें शामिल होने वाले लोगों की संख्या से जुड़ी विस्तृत जानकारी सामने आने के बाद ही इसकी व्यापक तस्वीर स्पष्ट होगी।

वित्तीय पारदर्शिता का सवाल

नाना पटोले ने अपने बयान के जरिए मुख्य रूप से RSS की वित्तीय पारदर्शिता को बहस के केंद्र में ला दिया है। किसी भी बड़े संगठन के संदर्भ में फंड के स्रोत, खर्च और नियामकीय अनुपालन महत्वपूर्ण विषय होते हैं।

पटोले का कहना है कि RSS की वित्तीय व्यवस्था को लेकर स्पष्ट जानकारी सामने आनी चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल किया कि यदि संगठन बड़े पैमाने पर गतिविधियां चलाता है तो उसके फंड का ऑडिट किस तरह होता है।

यह मुद्दा अब राजनीतिक बयानबाजी से आगे बढ़कर तथ्यात्मक जांच और आधिकारिक दस्तावेजों के संदर्भ में भी चर्चा का विषय बन सकता है।

RSS की प्रतिक्रिया का इंतजार

नाना पटोले के आरोपों के बीच अब RSS की प्रतिक्रिया महत्वपूर्ण होगी। संगठन की ओर से यदि पंजीकरण, वित्तीय व्यवस्था, विदेशी गतिविधियों और कथित बैंक खातों से संबंधित जानकारी सामने रखी जाती है, तो इन आरोपों की वास्तविक स्थिति अधिक स्पष्ट हो सकेगी।

फिलहाल पटोले ने न्यूयॉर्क में प्रस्तावित RSS रैली को लेकर कई सवाल उठाकर राजनीतिक बहस को तेज कर दिया है। उनके बयान में संगठन के वित्तीय ढांचे, अंतरराष्ट्रीय गतिविधियों और मोहन भागवत की अमेरिका यात्रा को प्रमुख मुद्दा बनाया गया है।

आने वाले दिनों में यदि RSS इन आरोपों पर विस्तृत जवाब देता है, तो इससे विवाद के विभिन्न पहलुओं पर स्थिति स्पष्ट होने की संभावना है। फिलहाल यह मामला कांग्रेस और RSS के बीच राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का नया केंद्र बनता दिखाई दे रहा है।

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