Mumbai मुंबई: ग्लोबल अनिश्चितता के कारण सेंटीमेंट कमजोर होने से, विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) ने पिछले तीन दिनों में 'फुली एक्सेसिबल रूट' (FAR) के तहत सरकारी सिक्योरिटीज से लगभग 5,109.21 करोड़ रुपये निकाले हैं। 'फुली एक्सेसिबल रूट' (FAR) के तहत, योग्य विदेशी निवेशकों को बिना किसी सीमा के कुछ सरकारी सिक्योरिटीज खरीदने और बेचने की अनुमति होती है।
क्लियरिंग कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (CCIL) के अनुसार, 15 सितंबर को FAR के तहत सरकारी सिक्योरिटीज में FPI का निवेश 366,806.286 करोड़ रुपये था, जबकि 9 सितंबर को यह 371,915.496 करोड़ रुपये था। डेटा से पता चलता है कि 10 सितंबर को निवेश 371,520.751 करोड़ रुपये और 11 सितंबर को 366,791.286 करोड़ रुपये था। चॉइस वेल्थ के वाइस प्रेसिडेंट माताप्रसाद पांडे ने कहा, "हमने FAR रूट के तहत G-Secs (सरकारी सिक्योरिटीज) में FPIs द्वारा काफी बिकवाली देखी। US-ईरान युद्ध की बिगड़ती स्थिति के बीच कच्चे तेल की कीमतें 110 डॉलर प्रति बैरल के आसपास बनी हुई हैं, साथ ही US ट्रेजरी यील्ड 5 प्रतिशत के स्तर के करीब पहुंच गई है और रुपये पर लगातार दबाव बना हुआ है। इन सब कारणों से विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों के लिए भारतीय सरकारी कर्ज (sovereign debt) कम आकर्षक हो गया है।"
अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमतें बढ़ गई हैं क्योंकि सऊदी अरब की ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन पर हमलों और खाड़ी अरब देशों व ईरान के बीच प्रस्तावित बातचीत के टलने के बाद ग्लोबल सप्लाई को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं।
फिलहाल, ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमतें 107.41 डॉलर प्रति बैरल हैं।
इसके अलावा, सोमवार को बेंचमार्क 10-वर्षीय US ट्रेजरी नोट की यील्ड 2023 के बाद पहली बार 5 प्रतिशत के स्तर को पार कर गई, क्योंकि तेल की कीमतों में तेज बढ़ोतरी के कारण ग्लोबल स्तर पर सरकारी बॉन्ड में बिकवाली तेज हो गई। यील्ड के इस अहम स्तर को पार करने की घटना बॉन्ड बाजार में बड़े पैमाने पर बिकवाली के बीच हुई है, जो लगातार महंगाई और बढ़ते सरकारी व कॉर्पोरेट कर्ज को लेकर चिंताओं से प्रेरित है। कर्ज लेने की ऊंची लागत ने UK, जर्मनी और अन्य अर्थव्यवस्थाओं में कर्ज चुकाने के खर्च को भी कई वर्षों के उच्चतम स्तर पर पहुंचा दिया है। आमतौर पर, विकसित अर्थव्यवस्थाओं में ब्याज दरों में बढ़ोतरी से उनके फाइनेंशियल एसेट्स ग्लोबल निवेशकों के लिए अधिक आकर्षक हो जाते हैं, जिससे वे उभरते बाजारों से अपना निवेश निकालने लगते हैं। इससे उभरते बाज़ारों के डेट (कर्ज़) से पूंजी बाहर जा सकती है, उधार लेने की लागत बढ़ सकती है और उनकी करेंसी पर दबाव पड़ सकता है। रुपये की कीमत घटने की वजह से भी पूंजी बाहर गई। ब्रेंट क्रूड ऑयल की ऊंची कीमतों और मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच, मंगलवार को अमेरिकी डॉलर के मुकाबले लोकल करेंसी 42 पैसे गिरकर 95.96 पर बंद हुई।
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