Mumbai : आज भक्ति और उत्साह के रंग में रंगने जा रही है। गणेशोत्सव के मौके पर शहर के प्रसिद्ध गणपति मंडलों के भव्य आगमन जुलूस निकाले जाएंगे। खासतौर पर ‘चिंचपोकली चा चिंतामणि’ और ‘परेल चा राजा’ के आगमन को लेकर लालबाग और आसपास के इलाकों में भारी तैयारियां की गई हैं। सुरक्षा के लिहाज से पूरे क्षेत्र को किले में तब्दील कर दिया गया है। गणपति बप्पा मोरया के जयघोष के बीच हजारों श्रद्धालु अपने आराध्य के स्वागत के लिए सड़कों पर उतरेंगे। ढोल-ताशों, लेझिम और पारंपरिक संगीत के साथ गणेश प्रतिमाओं का स्वागत किया जाएगा।

लालबाग में सुरक्षा के कड़े इंतजाम
गणेश आगमन जुलूस को देखते हुए मुंबई पुलिस ने लालबाग, परेल और चिंचपोकली क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी है। बड़ी संख्या में पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई है। भीड़ नियंत्रण के लिए बैरिकेडिंग, सीसीटीवी कैमरे और ड्रोन निगरानी की व्यवस्था की गई है। प्रशासन ने श्रद्धालुओं से अपील की है कि वे व्यवस्था बनाए रखने में सहयोग करें और पुलिस के निर्देशों का पालन करें।
चिंचपोकली चा चिंतामणि की खास पहचान
मुंबई के सबसे पुराने और लोकप्रिय गणपति मंडलों में शामिल चिंचपोकली चा चिंतामणि का आगमन हर साल आकर्षण का केंद्र रहता है। इसकी भव्य प्रतिमा और पारंपरिक आयोजन देखने के लिए बड़ी संख्या में लोग पहुंचते हैं। श्रद्धालुओं में इस गणपति के प्रति विशेष आस्था है और आगमन के दौरान पूरा इलाका भक्ति के माहौल में डूब जाता है।
परेल चा राजा के स्वागत की तैयारी
वहीं परेल चा राजा के आगमन को लेकर भी भक्तों में जबरदस्त उत्साह है। मंडल की ओर से विशेष सजावट की गई है और जुलूस को भव्य बनाने के लिए कई तैयारियां की गई हैं। गणपति बप्पा के स्वागत के लिए स्थानीय लोग कई दिनों से तैयारियों में जुटे हुए हैं।
यातायात में बदलाव
भारी भीड़ को देखते हुए मुंबई ट्रैफिक पुलिस ने कई इलाकों में यातायात व्यवस्था में बदलाव किए हैं। कुछ मार्गों पर वाहनों की आवाजाही नियंत्रित की जा सकती है, जबकि श्रद्धालुओं के लिए अलग रास्तों की व्यवस्था की गई है। प्रशासन का कहना है कि श्रद्धालुओं की सुरक्षा और सुचारु व्यवस्था सर्वोच्च प्राथमिकता है।
आस्था और परंपरा का संगम
मुंबई का गणेशोत्सव देशभर में अपनी भव्यता और उत्साह के लिए प्रसिद्ध है। लालबाग क्षेत्र में होने वाले गणपति आगमन जुलूस सिर्फ धार्मिक आयोजन नहीं बल्कि मुंबई की सांस्कृतिक पहचान का हिस्सा बन चुके हैं। आज निकलने वाले जुलूसों में परंपरा, भक्ति और आधुनिक सुरक्षा व्यवस्था का अनोखा संगम देखने को मिलेगा।

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