मुंबई: भारत का डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर तेजी से विस्तार कर रहा है और इसका असर देश के प्रमुख शहरों की डेटा सेंटर क्षमता पर भी दिखाई दे रहा है। रियल एस्टेट कंसल्टेंट नाइट फ्रैंक की नई रिपोर्ट के अनुसार, कुल ऑपरेशनल डेटा सेंटर क्षमता के मामले में मुंबई दुनिया के प्रमुख डेटा सेंटर बाजारों में 15वें स्थान पर पहुंच गया है। वहीं, हैदराबाद को इस सूची में 27वां स्थान मिला है।
नाइट फ्रैंक ने गुरुवार को ‘नाइट फ्रैंक ग्लोबल डेटा सेंटर एटलस 2026’ रिपोर्ट जारी की। इस रिपोर्ट में नॉर्थ अमेरिका, यूरोप, एशिया-पैसिफिक, मिडिल ईस्ट और अफ्रीका के 36 प्रमुख वैश्विक डेटा सेंटर बाजारों का विश्लेषण किया गया है। रिपोर्ट में ऑपरेशनल क्षमता, भविष्य की विकास संभावनाओं और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर के विस्तार के आधार पर शहरों की स्थिति का आकलन किया गया है।
रिपोर्ट के मुताबिक, मुंबई ने भारत के प्रमुख डेटा सेंटर हब के रूप में अपनी स्थिति और मजबूत की है। शहर में वर्तमान में 774 मेगावाट (MW) की लाइव IT क्षमता उपलब्ध है। इसके अलावा लगभग 5 गीगावाट (GW) की विकास पाइपलाइन क्षमता भी मौजूद है। यह आंकड़े मुंबई को एशिया-पैसिफिक क्षेत्र के प्रमुख डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर केंद्रों में शामिल करते हैं।
नाइट फ्रैंक ने कहा कि मुंबई भारत के लिए एक महत्वपूर्ण गेटवे डेटा सेंटर मार्केट बन चुका है। शहर की बेहतर कनेक्टिविटी, समुद्री केबल नेटवर्क तक पहुंच, कारोबारी गतिविधियों का केंद्र होना और डिजिटल सेवाओं की बढ़ती मांग ने इसे डेटा सेंटर उद्योग के लिए आकर्षक स्थान बनाया है।
डेटा सेंटर आधुनिक डिजिटल अर्थव्यवस्था की रीढ़ माने जाते हैं। क्लाउड कंप्यूटिंग, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डिजिटल भुगतान, ई-कॉमर्स और ऑनलाइन सेवाओं के विस्तार के साथ डेटा स्टोरेज और प्रोसेसिंग की मांग तेजी से बढ़ रही है। इसी वजह से दुनिया भर में डेटा सेंटर इंफ्रास्ट्रक्चर में बड़े निवेश किए जा रहे हैं।
रिपोर्ट में बताया गया है कि मुंबई की विकास पाइपलाइन क्षमता भी काफी मजबूत है। डेवलपमेंट पाइपलाइन के मामले में मुंबई दुनिया में 11वें स्थान पर है। यह संकेत देता है कि आने वाले वर्षों में शहर में डेटा सेंटर क्षमता का विस्तार और तेज हो सकता है।
भारत में डिजिटल सेवाओं के बढ़ते इस्तेमाल ने डेटा सेंटर उद्योग को नई गति दी है। सरकारी सेवाओं के डिजिटलीकरण, ऑनलाइन कारोबार, फिनटेक क्षेत्र और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित सेवाओं के विस्तार से डेटा की मांग लगातार बढ़ रही है।
मुंबई की भौगोलिक स्थिति भी इसे डेटा सेंटर के लिए महत्वपूर्ण बनाती है। यह शहर देश के प्रमुख वित्तीय केंद्रों में शामिल है और बड़ी संख्या में बैंकिंग, वित्तीय सेवाओं और तकनीकी कंपनियों का आधार है। इन क्षेत्रों को तेज और सुरक्षित डेटा प्रोसेसिंग की जरूरत होती है, जिससे डेटा सेंटर निवेश को बढ़ावा मिलता है।
हालांकि, डेटा सेंटर उद्योग के सामने ऊर्जा खपत, भूमि उपलब्धता, पर्यावरणीय प्रभाव और बिजली आपूर्ति जैसी चुनौतियां भी मौजूद हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि भविष्य में डेटा सेंटर विकास के लिए स्थायी ऊर्जा स्रोतों और बेहतर बुनियादी ढांचे पर ध्यान देना जरूरी होगा।
हैदराबाद भी भारत के उभरते डेटा सेंटर बाजारों में शामिल है। रिपोर्ट में उसे ऑपरेशनल डेटा सेंटर क्षमता के मामले में 27वां स्थान मिला है। शहर में आईटी कंपनियों की बड़ी मौजूदगी और तकनीकी क्षेत्र के विस्तार के कारण डेटा सेंटर निवेश की संभावनाएं लगातार बढ़ रही हैं।
भारत सरकार भी डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने पर जोर दे रही है। डेटा लोकलाइजेशन, क्लाउड सेवाओं और डिजिटल अर्थव्यवस्था के विस्तार के कारण देश में डेटा सेंटर की मांग आने वाले वर्षों में और बढ़ने की उम्मीद है।
नाइट फ्रैंक की रिपोर्ट से संकेत मिलता है कि भारत के प्रमुख शहर वैश्विक डेटा सेंटर मानचित्र पर तेजी से अपनी जगह बना रहे हैं। मुंबई की बेहतर रैंकिंग इस बात का प्रमाण है कि भारत डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर के क्षेत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
कुल मिलाकर, मुंबई का दुनिया के शीर्ष डेटा सेंटर बाजारों में शामिल होना भारत की डिजिटल प्रगति का संकेत है। आने वाले वर्षों में नई परियोजनाओं और बढ़ते निवेश के साथ देश का डेटा सेंटर नेटवर्क और मजबूत होने की संभावना है।मुंबई: भारत का डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर तेजी से विस्तार कर रहा है और इसका असर देश के प्रमुख शहरों की डेटा सेंटर क्षमता पर भी दिखाई दे रहा है। रियल एस्टेट कंसल्टेंट नाइट फ्रैंक की नई रिपोर्ट के अनुसार, कुल ऑपरेशनल डेटा सेंटर क्षमता के मामले में मुंबई दुनिया के प्रमुख डेटा सेंटर बाजारों में 15वें स्थान पर पहुंच गया है। वहीं, हैदराबाद को इस सूची में 27वां स्थान मिला है।
नाइट फ्रैंक ने गुरुवार को ‘नाइट फ्रैंक ग्लोबल डेटा सेंटर एटलस 2026’ रिपोर्ट जारी की। इस रिपोर्ट में नॉर्थ अमेरिका, यूरोप, एशिया-पैसिफिक, मिडिल ईस्ट और अफ्रीका के 36 प्रमुख वैश्विक डेटा सेंटर बाजारों का विश्लेषण किया गया है। रिपोर्ट में ऑपरेशनल क्षमता, भविष्य की विकास संभावनाओं और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर के विस्तार के आधार पर शहरों की स्थिति का आकलन किया गया है।
रिपोर्ट के मुताबिक, मुंबई ने भारत के प्रमुख डेटा सेंटर हब के रूप में अपनी स्थिति और मजबूत की है। शहर में वर्तमान में 774 मेगावाट (MW) की लाइव IT क्षमता उपलब्ध है। इसके अलावा लगभग 5 गीगावाट (GW) की विकास पाइपलाइन क्षमता भी मौजूद है। यह आंकड़े मुंबई को एशिया-पैसिफिक क्षेत्र के प्रमुख डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर केंद्रों में शामिल करते हैं।
नाइट फ्रैंक ने कहा कि मुंबई भारत के लिए एक महत्वपूर्ण गेटवे डेटा सेंटर मार्केट बन चुका है। शहर की बेहतर कनेक्टिविटी, समुद्री केबल नेटवर्क तक पहुंच, कारोबारी गतिविधियों का केंद्र होना और डिजिटल सेवाओं की बढ़ती मांग ने इसे डेटा सेंटर उद्योग के लिए आकर्षक स्थान बनाया है।
डेटा सेंटर आधुनिक डिजिटल अर्थव्यवस्था की रीढ़ माने जाते हैं। क्लाउड कंप्यूटिंग, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डिजिटल भुगतान, ई-कॉमर्स और ऑनलाइन सेवाओं के विस्तार के साथ डेटा स्टोरेज और प्रोसेसिंग की मांग तेजी से बढ़ रही है। इसी वजह से दुनिया भर में डेटा सेंटर इंफ्रास्ट्रक्चर में बड़े निवेश किए जा रहे हैं।
रिपोर्ट में बताया गया है कि मुंबई की विकास पाइपलाइन क्षमता भी काफी मजबूत है। डेवलपमेंट पाइपलाइन के मामले में मुंबई दुनिया में 11वें स्थान पर है। यह संकेत देता है कि आने वाले वर्षों में शहर में डेटा सेंटर क्षमता का विस्तार और तेज हो सकता है।
भारत में डिजिटल सेवाओं के बढ़ते इस्तेमाल ने डेटा सेंटर उद्योग को नई गति दी है। सरकारी सेवाओं के डिजिटलीकरण, ऑनलाइन कारोबार, फिनटेक क्षेत्र और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित सेवाओं के विस्तार से डेटा की मांग लगातार बढ़ रही है।
मुंबई की भौगोलिक स्थिति भी इसे डेटा सेंटर के लिए महत्वपूर्ण बनाती है। यह शहर देश के प्रमुख वित्तीय केंद्रों में शामिल है और बड़ी संख्या में बैंकिंग, वित्तीय सेवाओं और तकनीकी कंपनियों का आधार है। इन क्षेत्रों को तेज और सुरक्षित डेटा प्रोसेसिंग की जरूरत होती है, जिससे डेटा सेंटर निवेश को बढ़ावा मिलता है।
हालांकि, डेटा सेंटर उद्योग के सामने ऊर्जा खपत, भूमि उपलब्धता, पर्यावरणीय प्रभाव और बिजली आपूर्ति जैसी चुनौतियां भी मौजूद हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि भविष्य में डेटा सेंटर विकास के लिए स्थायी ऊर्जा स्रोतों और बेहतर बुनियादी ढांचे पर ध्यान देना जरूरी होगा।
हैदराबाद भी भारत के उभरते डेटा सेंटर बाजारों में शामिल है। रिपोर्ट में उसे ऑपरेशनल डेटा सेंटर क्षमता के मामले में 27वां स्थान मिला है। शहर में आईटी कंपनियों की बड़ी मौजूदगी और तकनीकी क्षेत्र के विस्तार के कारण डेटा सेंटर निवेश की संभावनाएं लगातार बढ़ रही हैं।
भारत सरकार भी डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने पर जोर दे रही है। डेटा लोकलाइजेशन, क्लाउड सेवाओं और डिजिटल अर्थव्यवस्था के विस्तार के कारण देश में डेटा सेंटर की मांग आने वाले वर्षों में और बढ़ने की उम्मीद है।
नाइट फ्रैंक की रिपोर्ट से संकेत मिलता है कि भारत के प्रमुख शहर वैश्विक डेटा सेंटर मानचित्र पर तेजी से अपनी जगह बना रहे हैं। मुंबई की बेहतर रैंकिंग इस बात का प्रमाण है कि भारत डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर के क्षेत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
कुल मिलाकर, मुंबई का दुनिया के शीर्ष डेटा सेंटर बाजारों में शामिल होना भारत की डिजिटल प्रगति का संकेत है। आने वाले वर्षों में नई परियोजनाओं और बढ़ते निवेश के साथ देश का डेटा सेंटर नेटवर्क और मजबूत होने की संभावना है।