गणेश उत्सव राष्ट्रीय एकता का प्रतीक, सभी जाति-धर्म के लोग होते हैं शामिल: रामदास अठावले
Mumbai मुंबई। केंद्रीय मंत्री रामदास अठावले ने गणेश उत्सव को राष्ट्रीय एकता और सामाजिक समरसता से जोड़ते हुए कहा कि यह पर्व केवल महाराष्ट्र तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे देश में लोगों को एकजुट करने का संदेश देता है। उन्होंने गणेश उत्सव के अवसर पर सभी श्रद्धालुओं को शुभकामनाएं भी दीं। रामदास अठावले ने कहा कि लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक ने स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान सार्वजनिक गणेशोत्सव को लोगों को एक मंच पर लाने और आजादी के आंदोलन को मजबूत करने के माध्यम के रूप में आगे बढ़ाया था। उन्होंने कहा कि इसका उद्देश्य समाज के अलग-अलग वर्गों को जोड़कर राष्ट्रीय एकता की भावना को मजबूत करना था।
अठावले ने कहा कि गणेश उत्सव की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसमें सभी जाति और धर्म के लोग शामिल होते हैं। बड़ी संख्या में श्रद्धालु भगवान गणेश की पूजा-अर्चना करते हैं और सार्वजनिक आयोजनों में भाग लेते हैं। उन्होंने इसे सामाजिक एकता और भाईचारे का पर्व बताया। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र में गणेशोत्सव की विशेष परंपरा रही है। मुंबई समेत राज्य के विभिन्न हिस्सों में सार्वजनिक गणेश मंडलों के साथ घरों में भी भगवान गणेश की प्रतिमाएं स्थापित की जाती हैं। पूजा-अर्चना के साथ धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं और उत्सव के समापन पर प्रतिमाओं का विसर्जन किया जाता है।
केंद्रीय मंत्री ने लोकमान्य तिलक के योगदान को याद करते हुए कहा कि स्वतंत्रता आंदोलन के समय सार्वजनिक गणेशोत्सव ने लोगों को एक साथ लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। उस दौर में धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजनों के माध्यम से लोगों के बीच राष्ट्रीय चेतना को मजबूत करने का प्रयास किया गया था। अठावले ने कहा कि आज भी गणेश उत्सव सामाजिक सद्भाव और एकता का संदेश देता है। उन्होंने गणेश भक्तों को हार्दिक बधाई देते हुए सभी के जीवन में सुख, शांति और समृद्धि की कामना की। उन्होंने कहा कि इस तरह के आयोजन समाज के अलग-अलग वर्गों को एक मंच पर आने का अवसर देते हैं और आपसी भाईचारे की भावना को मजबूत करते हैं।