Maharashtra : जलाशयों में 44% पानी जमा, पिछले साल के मुकाबले जल भंडारण में कमी
मुंबई : महाराष्ट्र में मानसून के बीच राज्य के जलाशयों में पानी का स्तर बढ़ रहा है, लेकिन इस साल अब तक जल भंडारण पिछले वर्ष की तुलना में कम दर्ज किया गया है। राज्य जल संसाधन विभाग ने मंगलवार को जानकारी दी कि महाराष्ट्र के जलाशय अपनी कुल भंडारण क्षमता का करीब 44 प्रतिशत भर चुके हैं।
जल संसाधन विभाग ने राज्य मंत्रिमंडल के सामने अपनी प्रस्तुति में बताया कि 13 जुलाई तक राज्य के 3,029 बांधों में कुल 632.89 टीएमसी (हजार मिलियन क्यूबिक फीट) पानी उपलब्ध था। विभाग के अनुसार, यह मात्रा पिछले साल इसी अवधि में दर्ज जल स्तर से कम है।
महाराष्ट्र में जलाशयों का स्तर राज्य की कृषि, पेयजल आपूर्ति और औद्योगिक जरूरतों के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। राज्य के कई जिले खेती के लिए मानसूनी बारिश और बांधों से मिलने वाले पानी पर निर्भर रहते हैं। ऐसे में जल भंडारण की स्थिति पर सरकार और प्रशासन लगातार नजर बनाए हुए हैं।
जल संसाधन विभाग की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार, मानसून के कारण कई क्षेत्रों में जलाशयों में पानी की आवक शुरू हो गई है। हालांकि, अभी तक बारिश की गति और वितरण पिछले साल की तुलना में अलग रहा है, जिसके कारण कुल जल भंडारण में अंतर दिखाई दे रहा है।
अधिकारियों ने बताया कि राज्य के सभी प्रमुख बांधों और जलाशयों की स्थिति की नियमित समीक्षा की जा रही है। पानी की उपलब्धता के आधार पर विभिन्न क्षेत्रों में जल वितरण की योजना तैयार की जाएगी, ताकि किसी भी क्षेत्र में गंभीर जल संकट की स्थिति उत्पन्न न हो।
महाराष्ट्र में कुल 3,029 बांधों का नेटवर्क राज्य की जल व्यवस्था की रीढ़ माना जाता है। इन बांधों से किसानों को सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध कराया जाता है, साथ ही शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल आपूर्ति भी सुनिश्चित की जाती है।
विभाग की रिपोर्ट के बाद राज्य सरकार ने जल संसाधनों के बेहतर प्रबंधन पर जोर दिया है। अधिकारियों का कहना है कि मानसून के अगले चरण में यदि अच्छी बारिश होती है तो जलाशयों में पानी की आवक बढ़ सकती है और भंडारण स्तर में सुधार हो सकता है।
वहीं, कम बारिश की स्थिति को देखते हुए जल उपयोग में सावधानी बरतने की जरूरत बताई गई है। विशेषज्ञों के अनुसार, मानसून के शुरुआती महीनों में जलाशयों में पर्याप्त पानी जमा होना जरूरी होता है, ताकि गर्मी के मौसम तक पानी की उपलब्धता बनी रहे।
राज्य के कई हिस्सों में खरीफ फसलों की बुवाई पूरी हो चुकी है या जारी है। किसानों के लिए पर्याप्त सिंचाई जल की उपलब्धता महत्वपूर्ण है। जलाशयों में कम भंडारण होने की स्थिति में रबी सीजन और गर्मी के महीनों में पानी की मांग को पूरा करना चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
जल संसाधन विभाग ने बताया कि सरकार जल संरक्षण और पानी के उचित उपयोग को बढ़ावा देने के लिए कदम उठा रही है। स्थानीय प्रशासन को भी जल उपलब्धता के अनुसार योजना बनाने के निर्देश दिए जा सकते हैं।
मौसम विभाग के पूर्वानुमान और मानसून की स्थिति पर भी सरकार की नजर बनी हुई है। आने वाले हफ्तों में होने वाली बारिश यह तय करेगी कि राज्य के बांधों में पानी का स्तर कितना बढ़ता है।
पिछले कुछ वर्षों में महाराष्ट्र में जल प्रबंधन एक महत्वपूर्ण मुद्दा रहा है। कई क्षेत्रों में सूखे और जल संकट की स्थिति देखने को मिली है। इसके चलते सरकार बांधों की क्षमता, जल संरक्षण और सिंचाई परियोजनाओं पर लगातार ध्यान दे रही है।
फिलहाल राज्य के जलाशयों में 44 प्रतिशत जल भंडारण दर्ज किया गया है। हालांकि यह स्थिति नियंत्रण में है, लेकिन पिछले साल की तुलना में कमी को देखते हुए प्रशासन सतर्क है।
जल संसाधन विभाग आने वाले दिनों में बारिश और बांधों में पानी की आवक की समीक्षा करता रहेगा। सरकार का लक्ष्य है कि उपलब्ध जल संसाधनों का सही प्रबंधन कर किसानों, आम नागरिकों और उद्योगों की जरूरतों को पूरा किया जा सके।