NAFED के गोदाम में सड़े प्याज का आरोप, छावा क्रांतिवीर सेना ने उठाए सवाल
नासिक। लासलगांव के पास ताकली-विंचूर क्षेत्र स्थित NAFED के गोदाम में बड़ी मात्रा में खराब और सड़े हुए प्याज के भंडारण का मामला सामने आया है। छावा क्रांतिवीर सेना के पदाधिकारियों ने गोदाम का निरीक्षण करने के बाद आरोप लगाया कि यहां लंबे समय से बड़ी मात्रा में खराब प्याज जमा है, जिसके कारण आसपास के इलाके में तेज बदबू फैल रही है। संगठन ने इस मामले में प्रशासन से तत्काल कार्रवाई की मांग की है।
संगठन के प्रतिनिधियों के अनुसार, गोदाम में रखे प्याज के कई स्टॉक खराब स्थिति में दिखाई दिए। उनका दावा है कि प्याज के सड़ने के कारण गोदाम और उसके आसपास के क्षेत्र में दुर्गंध का वातावरण बना हुआ है। इससे स्थानीय लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। संगठन ने इस स्थिति को लेकर संबंधित अधिकारियों का ध्यान आकर्षित करते हुए मौके का निरीक्षण कराया।
निरीक्षण के दौरान लासलगांव के प्रभारी तलाठी जनार्दन उशिर और ताकली-विंचूर के तलाठी लक्ष्मणराव शिंदे भी मौजूद थे। संगठन के पदाधिकारियों का कहना है कि अधिकारियों की मौजूदगी में गोदाम की स्थिति देखी गई और खराब प्याज के स्टॉक को लेकर चर्चा हुई। हालांकि, निरीक्षण के बाद भी संबंधित प्याज के स्टॉक का औपचारिक पंचनामा तैयार नहीं किए जाने पर संगठन ने सवाल खड़े किए हैं।
छावा क्रांतिवीर सेना के पदाधिकारियों का कहना है कि यदि किसी सरकारी या संबंधित एजेंसी के गोदाम में बड़ी मात्रा में कृषि उपज खराब अवस्था में पाई जाती है, तो उसकी स्थिति का आधिकारिक रिकॉर्ड तैयार किया जाना चाहिए। इससे खराब हुए माल की मात्रा, उसकी स्थिति और नुकसान का आकलन करने में मदद मिलती है। संगठन का आरोप है कि मौके पर निरीक्षण होने के बावजूद पंचनामा नहीं बनाया गया, जिससे मामले की पारदर्शिता को लेकर सवाल पैदा हो रहे हैं।
संगठन ने मांग की है कि गोदाम में रखे पूरे प्याज स्टॉक की जांच कराई जाए। खराब प्याज की मात्रा का आकलन करने के साथ यह भी पता लगाया जाए कि वह किस अवधि से गोदाम में रखा हुआ है और किन परिस्थितियों में खराब हुआ। इसके अलावा, यदि प्याज के खराब होने के लिए किसी स्तर पर लापरवाही जिम्मेदार है तो संबंधित लोगों की जवाबदेही तय की जानी चाहिए।
प्याज उत्पादन के लिए लासलगांव क्षेत्र देशभर में महत्वपूर्ण माना जाता है। यहां प्याज के भंडारण, खरीद और वितरण से जुड़ी गतिविधियां बड़े पैमाने पर होती हैं। ऐसे में किसी बड़े गोदाम में प्याज खराब होने की शिकायत सामने आने पर किसानों और व्यापारियों के बीच भी चिंता पैदा होना स्वाभाविक है। किसानों के लिए प्याज की कीमत और भंडारण की व्यवस्था सीधे उनकी आय से जुड़ी होती है।
छावा क्रांतिवीर सेना के पदाधिकारियों ने कहा कि खराब प्याज को लंबे समय तक गोदाम में रखने से न केवल सरकारी या संस्थागत स्तर पर आर्थिक नुकसान हो सकता है, बल्कि आसपास के वातावरण पर भी असर पड़ सकता है। सड़े हुए प्याज से दुर्गंध के साथ मक्खियों और अन्य कीटों की समस्या पैदा होने की आशंका रहती है। इसलिए खराब कृषि उपज का समय पर निस्तारण किया जाना जरूरी है।
संगठन की ओर से जिला ग्रामीण प्रमुख नवनाथ वैराल, तालुका प्रमुख प्रफुल्ल गायकवाड़, तालुका कार्यकारी अध्यक्ष अन्ना सोमासे, तालुका उपाध्यक्ष संदीप पवार सहित वैभव भाड, सोपान लांडगे और गोरख कोटमे ने इस मुद्दे पर प्रशासन से जवाब मांगा है। पदाधिकारियों ने कहा कि केवल निरीक्षण करने से समस्या का समाधान नहीं होगा, बल्कि खराब प्याज के स्टॉक का आधिकारिक आकलन और आवश्यक कार्रवाई भी होनी चाहिए।
पंचनामा नहीं बनाए जाने का मुद्दा संगठन के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण है। संगठन का कहना है कि मौके पर मौजूद अधिकारियों ने स्थिति देखी, लेकिन इसके बावजूद दस्तावेजी प्रक्रिया पूरी नहीं की गई। इससे भविष्य में यह निर्धारित करना मुश्किल हो सकता है कि निरीक्षण के समय वास्तव में कितनी मात्रा में प्याज खराब अवस्था में था।
संगठन ने प्रशासन से मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए और गोदाम में मौजूद प्याज के स्टॉक का रिकॉर्ड मिलान किया जाए। यदि रिकॉर्ड में दर्ज मात्रा और मौके पर मौजूद वास्तविक स्टॉक में अंतर पाया जाता है, तो उसकी भी जांच की जानी चाहिए।
इसके साथ ही यह भी महत्वपूर्ण है कि प्याज को किन परिस्थितियों में रखा गया था। गोदाम में तापमान, वेंटिलेशन, नमी और भंडारण क्षमता जैसी व्यवस्थाओं की स्थिति क्या थी, इन सभी पहलुओं की जांच से प्याज खराब होने के कारणों का पता लगाया जा सकता है। यदि भंडारण व्यवस्था में कोई कमी थी तो उसे दूर करने की जरूरत होगी।
स्थानीय स्तर पर यह मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि प्याज खराब होने से किसानों और संबंधित संस्थाओं को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है। यदि बड़ी मात्रा में प्याज उपयोग के योग्य नहीं रहा है तो उसके नुकसान का आकलन करना और जिम्मेदारी तय करना जरूरी होगा।
फिलहाल छावा क्रांतिवीर सेना के आरोपों के बाद प्रशासन की अगली कार्रवाई पर नजर बनी हुई है। संगठन ने स्पष्ट किया है कि वह मामले को लेकर अधिकारियों से जवाब मांगता रहेगा और खराब प्याज के स्टॉक का उचित रिकॉर्ड तैयार करने की मांग करेगा।
हालांकि, गोदाम में रखे प्याज की वास्तविक मात्रा, उसके खराब होने की स्थिति और नुकसान के संबंध में अंतिम स्थिति प्रशासनिक जांच और आधिकारिक रिकॉर्ड के आधार पर ही स्पष्ट होगी। फिलहाल संगठन के निरीक्षण और लगाए गए आरोपों ने NAFED के गोदाम में प्याज के भंडारण और निगरानी व्यवस्था पर सवाल जरूर खड़े कर दिए हैं।
अब प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती पूरे मामले की तथ्यात्मक जांच कर स्थिति स्पष्ट करने की है। यदि बड़ी मात्रा में प्याज वास्तव में खराब पाया जाता है तो उसके निस्तारण के साथ-साथ भविष्य में ऐसी स्थिति न बने, इसके लिए भंडारण व्यवस्था को मजबूत करना भी आवश्यक होगा। वहीं पंचनामा नहीं बनाए जाने के आरोप की भी जांच कर संबंधित अधिकारियों से स्पष्टीकरण लिया जाना जरूरी माना जा रहा है।