महाराष्ट्र

आवारा कुत्ते के काटने के आंकड़ों पर विवाद, KDMC अधिकारी को कारण बताओ नोटिस

Kavita2
12 Aug 2026 2:00 PM IST
आवारा कुत्ते के काटने के आंकड़ों पर विवाद, KDMC अधिकारी को कारण बताओ नोटिस
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कल्याण। महाराष्ट्र के कल्याण पश्चिम स्थित खड़कपाड़ा इलाके में एक आवारा कुत्ते के हमले के बाद सामने आए आंकड़ों को लेकर अब सवाल उठने लगे हैं। एक ओर मीडिया में आवारा कुत्ते के करीब 110 से 130 लोगों को काटने की जानकारी सामने आई, वहीं कल्याण-डोंबिवली महानगरपालिका (KDMC) के आधिकारिक रिकॉर्ड में इसी घटना के बाद रुक्मिणीबाई अस्पताल में 58 मरीजों के इलाज का उल्लेख है। दोनों आंकड़ों में बड़े अंतर के बाद नगर निकाय ने मामले को गंभीरता से लेते हुए संबंधित अधिकारी को कारण बताओ नोटिस जारी किया है।

मामला रविवार का बताया जा रहा है। कल्याण पश्चिम के खड़कपाड़ा इलाके में संदीप होटल के पास एक आवारा कुत्ते ने कई लोगों पर हमला किया। घटना के बाद इलाके में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। कुत्ते के काटने और हमले की खबर फैलने के बाद बड़ी संख्या में लोग उपचार के लिए रुक्मिणीबाई अस्पताल पहुंचे।

KDMC के रिकॉर्ड के अनुसार, घटना के बाद अस्पताल में कुल 58 मरीजों का कुत्ते के काटने का उपचार किया गया। यह आंकड़ा नगर निकाय की ओर से जारी कारण बताओ नोटिस में दर्ज जानकारी के आधार पर सामने आया है। अस्पताल के आधिकारिक रिकॉर्ड और मीडिया में बताए गए आंकड़े के बीच अंतर सामने आने के बाद अब प्रशासन ने इसकी जांच शुरू कर दी है।

वहीं, KDMC के मेडिकल ऑफिसर डॉ. संदीप पगारे ने कथित तौर पर मीडिया से बातचीत में कहा था कि आवारा कुत्ते ने करीब 110 से 130 लोगों को काटा था। उन्होंने यह भी बताया था कि प्रभावित लोगों का उपचार रुक्मिणीबाई अस्पताल में किया जा रहा है। यही बयान अब विवाद का केंद्र बन गया है।

आधिकारिक रिकॉर्ड में 58 मरीज दर्ज होने और मीडिया को 110 से 130 लोगों के प्रभावित होने की जानकारी दिए जाने के बीच का अंतर लगभग दोगुना है। ऐसे में नगर निकाय ने यह जानने की कोशिश शुरू की है कि दोनों आंकड़ों में इतना बड़ा अंतर क्यों है। क्या कुछ मरीजों का इलाज अस्पताल के रिकॉर्ड में दर्ज नहीं हुआ या फिर मीडिया को दी गई संख्या अनुमान के आधार पर बताई गई थी, इसकी जांच की जा रही है।

'लोकसत्ता' की रिपोर्ट के अनुसार, KDMC की मेडिकल हेल्थ ऑफिसर डॉ. दीपा शुक्ला ने इस मामले में डॉ. संदीप पगारे को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। नोटिस में उनसे 24 घंटे के भीतर जवाब मांगा गया है। अधिकारी से यह स्पष्ट करने को कहा गया है कि अस्पताल के रिकॉर्ड और मीडिया में दिए गए आंकड़ों में इतना अंतर किस वजह से आया।

इस मामले ने केवल आंकड़ों के अंतर को लेकर ही नहीं, बल्कि शहर में आवारा कुत्तों की समस्या को लेकर भी चर्चा तेज कर दी है। किसी एक आवारा कुत्ते के हमले में बड़ी संख्या में लोगों के घायल होने की खबर सामने आने के बाद स्थानीय लोगों में चिंता बढ़ना स्वाभाविक है। खासकर बाजार, होटल और व्यस्त इलाकों में आवारा कुत्तों की मौजूदगी नागरिकों की सुरक्षा से जुड़ा विषय बन जाती है।

घटना के बाद प्रभावित लोगों को उपचार के लिए अस्पताल पहुंचाया गया। कुत्ते के काटने की स्थिति में समय पर चिकित्सा सहायता लेना जरूरी होता है। ऐसे मामलों में अस्पतालों पर भी अचानक मरीजों की संख्या बढ़ने से अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है। हालांकि इस घटना में अस्पताल के रिकॉर्ड के अनुसार 58 मरीजों का उपचार किया गया।

दूसरी ओर, यदि वास्तव में 110 से 130 लोग कुत्ते के हमले से प्रभावित हुए थे, तो यह घटना अपेक्षाकृत बड़े स्तर की मानी जाएगी। इसलिए नगर निकाय के लिए सही आंकड़ा सामने लाना महत्वपूर्ण है। इससे न केवल घटना की गंभीरता का आकलन किया जा सकेगा, बल्कि भविष्य में ऐसे मामलों से निपटने के लिए उचित व्यवस्था भी की जा सकेगी।

नगर निकाय की ओर से जारी नोटिस के बाद अब डॉ. पगारे के जवाब पर भी नजर रहेगी। उनके जवाब से यह स्पष्ट हो सकता है कि मीडिया को दी गई संख्या किस आधार पर बताई गई थी। साथ ही यह भी सामने आ सकता है कि अस्पताल के रिकॉर्ड में दर्ज मरीजों के अलावा किसी अन्य स्वास्थ्य केंद्र में इलाज कराने वाले लोगों को भी कुल आंकड़े में शामिल किया गया था या नहीं।

ऐसे मामलों में आधिकारिक आंकड़ों की विश्वसनीयता बेहद महत्वपूर्ण होती है। किसी घटना में प्रभावित लोगों की संख्या अधिक या कम बताने से जनता के बीच भ्रम की स्थिति पैदा हो सकती है। खासकर स्वास्थ्य और सुरक्षा से जुड़े मामलों में सही जानकारी प्रशासन की कार्यप्रणाली और जनता के भरोसे के लिए आवश्यक होती है।

खड़कपाड़ा की घटना ने KDMC के सामने आवारा कुत्तों से निपटने की चुनौती को भी सामने ला दिया है। शहरों में आवारा कुत्तों की संख्या, उनके टीकाकरण और नसबंदी के साथ-साथ लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करना स्थानीय निकायों की जिम्मेदारी का महत्वपूर्ण हिस्सा है। किसी इलाके में कुत्ते के हमले की घटना होने पर तत्काल कार्रवाई के साथ यह भी सुनिश्चित करना जरूरी होता है कि संबंधित क्षेत्र में नागरिक सुरक्षित रहें।

स्थानीय लोगों के बीच घटना को लेकर चिंता का माहौल है। लोगों की मांग रहती है कि ऐसे इलाकों में आवारा कुत्तों को लेकर प्रभावी कदम उठाए जाएं और बार-बार होने वाली घटनाओं को रोका जाए। हालांकि इस मामले में आगे की कार्रवाई आधिकारिक जांच और संबंधित अधिकारी के जवाब के आधार पर तय होगी।

फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि खड़कपाड़ा में आवारा कुत्ते के हमले से वास्तव में कितने लोग प्रभावित हुए। KDMC के रिकॉर्ड में 58 मरीजों का उपचार दर्ज है, जबकि मेडिकल ऑफिसर के कथित बयान में संख्या 110 से 130 बताई गई। आंकड़ों के इस अंतर को लेकर जारी कारण बताओ नोटिस के बाद अब प्रशासनिक जांच महत्वपूर्ण हो गई है।

डॉ. दीपा शुक्ला की ओर से जारी नोटिस में 24 घंटे के भीतर जवाब मांगे जाने के बाद मामले में जल्द स्पष्टीकरण मिलने की उम्मीद है। इसके बाद यह साफ हो सकेगा कि बड़ा आंकड़ा किस आधार पर सामने आया और अस्पताल के आधिकारिक रिकॉर्ड में कम संख्या क्यों दर्ज है।

घटना ने एक बार फिर यह भी दिखाया है कि स्थानीय स्तर पर स्वास्थ्य और सुरक्षा से जुड़ी घटनाओं की सूचना देते समय आधिकारिक आंकड़ों और सार्वजनिक बयानों में समन्वय बेहद जरूरी है। फिलहाल KDMC की जांच और अधिकारी के जवाब के बाद ही इस पूरे मामले की वास्तविक तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी।

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