Mumbai मुंबई। शिवसेना (यूबीटी) के प्रवक्ता आनंद दुबे ने नीट पेपर लीक मामले, छात्रों के आंदोलन और दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहे प्रदर्शन को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि यदि किसी भी आंदोलन में कहीं कोई अनियमितता या देश विरोधी गतिविधि सामने आती है तो पुलिस को निष्पक्ष कार्रवाई करनी चाहिए। कानून अपना काम करे और दोषियों को गिरफ्तार किया जाए, लेकिन इस बहाने शांतिपूर्ण और छात्रों के हित में चल रहे आंदोलन को प्रभावित या बदनाम नहीं किया जाना चाहिए।
आनंद दुबे ने कहा कि नीट पेपर लीक का मुद्दा केवल दिल्ली तक सीमित नहीं है, बल्कि बिहार, प्रयागराज और महाराष्ट्र सहित देश के कई राज्यों में छात्र इस मामले को लेकर आंदोलन कर रहे हैं। यह छात्रों के भविष्य से जुड़ा गंभीर विषय है और सरकार को उनकी चिंताओं को गंभीरता से सुनना चाहिए। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा नीट पेपर लीक मामले पर जारी वीडियो संदेश पर प्रतिक्रिया देते हुए आनंद दुबे ने कहा कि इस विषय पर प्रधानमंत्री की प्रतिक्रिया काफी देर से आई है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने अपने संदेश में फास्ट ट्रैक कोर्ट के मुद्दे को कैबिनेट में उठाने की बात कही है।
केंद्र सरकार पर तंज कसते हुए आनंद दुबे ने कहा कि देश की व्यवस्था में सुधार की आवश्यकता है। पेपर लीक की घटनाएं कोई नई बात नहीं हैं और समय-समय पर ऐसी घटनाएं सामने आती रही हैं, जो व्यवस्था में गंभीर खामियों की ओर इशारा करती हैं। छात्रों की मुख्य मांग यही है कि परीक्षा प्रणाली को पारदर्शी और विश्वसनीय बनाया जाए। उन्होंने कहा कि सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने अपना अनशन समाप्त कर दिया है, लेकिन छात्रों की मांग अब भी कायम है कि केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान अपने पद से इस्तीफा दें।
आनंद दुबे ने कहा कि इस मुद्दे पर जितनी अधिक देरी होगी, उतना ही देश और छात्रों का नुकसान होगा। उन्होंने सरकार से मांग की कि इस विषय पर संसद में विस्तृत चर्चा कराई जाए और मामले का जल्द समाधान निकाला जाए। आनंद दुबे ने बताया कि शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे और महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) प्रमुख राज ठाकरे 26 जुलाई को शिवतीर्थ से सिद्धिविनायक मंदिर तक मार्च निकालेंगे। उन्होंने कहा कि इस मार्च का उद्देश्य छात्रों की सुरक्षा, उनके उज्ज्वल भविष्य और देश को मौजूदा संकट से जल्द बाहर निकालने की कामना करना है।
उन्होंने कहा कि यह रैली किसी राजनीतिक दल विशेष के लिए नहीं, बल्कि परीक्षा प्रणाली में भ्रष्टाचार के खिलाफ जन आंदोलन है। उन्होंने सभी लोगों से इसमें शामिल होने की अपील करते हुए कहा कि लोकतांत्रिक तरीके से प्रदर्शन करना विपक्ष और जनता का अधिकार है, जबकि मांगों को स्वीकार करना या न करना सरकार का निर्णय है।