नासिक। केंद्र सरकार की ओर से महंगाई नियंत्रण और बाजार में प्याज की उपलब्धता बनाए रखने के लिए तैयार किए गए बफर स्टॉक को लेकर महाराष्ट्र के लासलगांव से चिंता बढ़ाने वाली खबर सामने आई है। यहां करोड़ों रुपये में खरीदा गया प्याज अब खराब होने लगा है। गोदामों में रखे प्याज में कीड़े पड़ने और सड़ने की शिकायतों के बाद सरकारी स्टॉक के प्रबंधन पर सवाल उठने लगे हैं।

जानकारी के अनुसार, केंद्र सरकार ने प्राइस स्टेबिलाइजेशन फंड (PSF) के तहत NAFED और NCCF के माध्यम से 15 मई से बड़े पैमाने पर प्याज खरीद अभियान शुरू किया था। इस अभियान का उद्देश्य प्याज की कीमतों में अचानक बढ़ोतरी को रोकना और जरूरत पड़ने पर बाजार में प्याज की आपूर्ति करना था।

लेकिन अब नासिक जिले के लासलगांव में रखे गए इसी स्टॉक का एक हिस्सा खराब होने की खबर सामने आई है।

CWC गोदाम में सड़ रहा प्याज

लासलगांव के मनमाड रोड स्थित सेंट्रल वेयरहाउसिंग कॉरपोरेशन (CWC) के गोदाम में रखा काफी मात्रा में प्याज खराब हो गया है।

स्थानीय लोगों और सूत्रों के अनुसार, गोदाम में रखे प्याज में सड़न शुरू हो गई है। कई बोरी प्याज में कीड़े लग गए हैं और आसपास के क्षेत्र में तेज दुर्गंध फैल रही है।

बताया जा रहा है कि खराब हो रहे प्याज से काले रंग का बदबूदार तरल पदार्थ भी निकल रहा है, जिससे आसपास के लोगों को परेशानी हो रही है।

बफर स्टॉक की गुणवत्ता पर सवाल

सरकार ने प्याज की कीमतों को नियंत्रित करने के लिए बड़ी मात्रा में खरीद की थी। ऐसे में स्टॉक का खराब होना भंडारण व्यवस्था और प्रबंधन पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।

विशेषज्ञों का कहना है कि प्याज जैसी जल्दी खराब होने वाली फसल के लिए उचित तापमान, हवा की व्यवस्था और समय-समय पर निगरानी बेहद जरूरी होती है।

यदि भंडारण व्यवस्था में कमी रहती है तो बड़ी मात्रा में प्याज खराब हो सकता है, जिससे सरकारी धन का नुकसान होता है।

1.20 लाख टन प्याज की हुई थी खरीद

जानकारी के मुताबिक, करीब साढ़े तीन महीने चले इस खरीद अभियान के दौरान लगभग 1.20 लाख टन प्याज खरीदा गया था।

इस प्याज की खरीद कीमत करीब 1,235 रुपये से 2,345 रुपये प्रति क्विंटल के बीच रही थी।

खरीदे गए प्याज को नासिक जिले के अलग-अलग गोदामों में रखा गया था, ताकि जरूरत पड़ने पर इसे बाजार में उतारा जा सके।

किसानों और व्यापारियों की चिंता बढ़ी

लासलगांव देश की प्रमुख प्याज मंडियों में शामिल है। यहां प्याज की खरीद-बिक्री बड़े स्तर पर होती है।

स्थानीय किसानों और व्यापारियों का कहना है कि यदि सरकारी स्टॉक सही तरीके से नहीं संभाला गया तो इसका असर प्याज बाजार पर पड़ सकता है।

उन्होंने मांग की है कि गोदामों में रखे प्याज की नियमित जांच होनी चाहिए और खराब हो रहे स्टॉक को लेकर जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए।

कीमत नियंत्रण के उद्देश्य से बनाया गया था स्टॉक

सरकार ने बफर स्टॉक की व्यवस्था इसलिए की थी ताकि प्याज की कीमतों में अचानक उछाल आने पर बाजार में आपूर्ति बढ़ाई जा सके।

प्याज की कीमतें बढ़ने के समय सरकार इस स्टॉक का इस्तेमाल कर उपभोक्ताओं को राहत देने का प्रयास करती है।

लेकिन यदि स्टॉक ही खराब हो जाता है तो इस उद्देश्य पर असर पड़ सकता है।

भंडारण व्यवस्था पर विशेषज्ञों की राय

कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि प्याज को लंबे समय तक सुरक्षित रखने के लिए वैज्ञानिक तरीके अपनाने जरूरी हैं।

प्याज को नमी से बचाना, हवा का उचित प्रवाह बनाए रखना और खराब प्याज को समय रहते अलग करना जरूरी होता है।

उन्होंने कहा कि बड़े पैमाने पर खरीद के साथ-साथ भंडारण की व्यवस्था पर भी उतना ही ध्यान दिया जाना चाहिए।

प्रशासनिक स्तर पर जांच की मांग

लासलगांव में प्याज खराब होने की खबर के बाद अब इसकी जांच की मांग उठ रही है।

यह पता लगाने की जरूरत है कि इतनी बड़ी मात्रा में प्याज खराब कैसे हुआ और इसके लिए जिम्मेदार कौन है।

सरकारी एजेंसियों को स्टॉक की स्थिति, भंडारण व्यवस्था और रखरखाव की प्रक्रिया की समीक्षा करनी होगी।

आगे की कार्रवाई पर नजर

फिलहाल खराब हुए प्याज की वास्तविक मात्रा और नुकसान का पूरा आंकड़ा सामने नहीं आया है।

हालांकि, यह मामला सरकारी बफर स्टॉक प्रबंधन के लिए एक बड़ी चुनौती के रूप में सामने आया है।

प्याज की कीमतों को नियंत्रित करने के लिए शुरू की गई योजना में यदि भंडारण स्तर पर लापरवाही हुई है तो इसका असर सरकार की नीति और किसानों दोनों पर पड़ सकता है। अब सभी की नजर इस बात पर है कि संबंधित विभाग इस मामले में क्या कदम उठाते हैं।

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