महाराष्ट्र: भ्रष्टाचार के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) ने वन विभाग के एक अधिकारी को रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार किया है। इस कार्रवाई की सबसे खास बात यह रही कि अधिकारी को पकड़ने के लिए ACB ने एक अनोखा तरीका अपनाया। टीम ने 40 लाख रुपये के नकली नोटों का इस्तेमाल कर रिश्वतखोरी का जाल बिछाया और आरोपी अधिकारी को उसी में फंसा लिया।
मामला छत्रपति संभाजीनगर का है, जहां ACB की टीम ने सामाजिक वानिकी प्रभाग के प्रथम श्रेणी अधिकारी श्रीनिवास लिंगन्ना लखमावाड़ को गिरफ्तार किया है। 40 वर्षीय लखमावाड़ पर आरोप है कि उन्होंने एक अधिकारी से 45 लाख रुपये की रिश्वत मांगी थी। ACB अधिकारियों के मुताबिक आरोपी को नगर नाका, कैनाल रोड स्थित उसके आवास से पकड़ा गया।
जानकारी के अनुसार, 29 जुलाई को एक रेंज फॉरेस्ट ऑफिसर ने ACB में लिखित शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि श्रीनिवास लिंगन्ना लखमावाड़ ने वृक्षारोपण निधि के वितरण की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए 45 लाख रुपये की मांग की थी।
शिकायतकर्ता ने यह भी आरोप लगाया कि आरोपी अधिकारी ने रिश्वत देने के बदले कई विभागीय मामलों में मदद करने का आश्वासन दिया था। इसमें निलंबन का प्रस्ताव आगे नहीं बढ़ाने, रुकी हुई दो इंक्रीमेंट जारी करवाने और नर्सरी विकास कार्यों से जुड़ी जांच रोकने का भरोसा शामिल था।
शिकायत मिलने के बाद ACB ने मामले की जांच शुरू की। अधिकारियों ने पहले शिकायत की सत्यता जांचने के लिए वेरिफिकेशन कराया। इस दौरान रिश्वत मांगने की बात सही पाई गई। इसके बाद आरोपी अधिकारी को पकड़ने के लिए ट्रैप की योजना बनाई गई।
ACB ने आरोपी के लिए एक पार्सल तैयार किया, जिसमें कुल 45 लाख रुपये दिखाए गए। इसमें 5 लाख रुपये के असली नोट रखे गए थे, जबकि बाकी 40 लाख रुपये नकली नोट थे। अधिकारियों ने इस पूरे ऑपरेशन को बेहद गोपनीय तरीके से अंजाम दिया।
जैसे ही श्रीनिवास लिंगन्ना लखमावाड़ ने रिश्वत के रूप में यह पार्सल स्वीकार किया, पहले से तैयार बैठी ACB की टीम ने तुरंत कार्रवाई करते हुए उसे पकड़ लिया। टीम ने मौके से संबंधित सबूत भी जुटाए हैं।
ACB अधिकारियों का कहना है कि आरोपी के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत कार्रवाई की जा रही है। मामले में शिवाजीनगर पुलिस स्टेशन में केस दर्ज करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। एफआईआर दर्ज होने के बाद आरोपी की औपचारिक गिरफ्तारी और आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
इस कार्रवाई को भ्रष्टाचार के खिलाफ ACB की बड़ी सफलता माना जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि सरकारी विभागों में रिश्वतखोरी को रोकने के लिए लगातार निगरानी रखी जा रही है और शिकायत मिलने पर तत्काल कार्रवाई की जाती है।
वहीं, इस मामले ने एक बार फिर सरकारी विभागों में भ्रष्टाचार के मुद्दे को सामने ला दिया है। ACB अब यह भी जांच कर रही है कि आरोपी अधिकारी पहले भी किसी अन्य मामले में शामिल रहा है या नहीं। साथ ही रिश्वत की मांग और विभागीय कामकाज से जुड़े सभी पहलुओं की जांच की जा रही है।