मुंबई/नई दिल्ली। चुनाव आयोग और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर शुक्रवार को मुंबई और दिल्ली में विरोध प्रदर्शन देखने को मिला। मुंबई के शिवाजी पार्क में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) और अन्य सिविल सोसाइटी संगठनों के कार्यकर्ताओं ने SIR प्रक्रिया में कथित गड़बड़ियों का आरोप लगाते हुए प्रदर्शन किया। वहीं दिल्ली में स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (SFI) और डेमोक्रेटिक यूथ फेडरेशन ऑफ इंडिया (DYFI) के सदस्यों ने विपक्षी नेताओं के साथ मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने की मांग उठाई। प्रदर्शनकारियों के आरोपों को चुनाव आयोग ने खारिज किया है।
मुंबई के शिवाजी पार्क में हुए प्रदर्शन को देखते हुए भारी पुलिस बल तैनात किया गया था। CJP और दूसरे संगठनों से जुड़े प्रदर्शनकारी चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और SIR प्रक्रिया को लेकर सवाल उठा रहे थे। प्रदर्शनकारियों ने दावा किया कि मतदाता सूची के पुनरीक्षण के दौरान अनियमितताएं हुई हैं और इसके लिए चुनाव आयोग को जवाब देना चाहिए।
CJP प्रवक्ता सौरभ दास ने प्रदर्शन के दौरान मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ बेहद तीखी टिप्पणी की। उन्होंने ज्ञानेश कुमार को “देशद्रोही” और “असली राष्ट्र-विरोधी” बताते हुए उन्हें पद से हटाने की मांग की। ये शब्द दास के राजनीतिक आरोप हैं। उन्होंने दावा किया कि मुंबई से शुरू हुआ यह विरोध देश के दूसरे हिस्सों में भी समर्थन हासिल करेगा।
सौरभ दास ने कहा कि मुंबई के युवा एक बार फिर सड़कों पर उतरे हैं और शिवाजी पार्क में हो रहा प्रदर्शन बड़े आंदोलन की शुरुआत है। CJP की ओर से मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे के साथ SIR प्रक्रिया को लेकर भी विरोध दर्ज कराया गया। संगठन ने इससे पहले घोषणा की थी कि वह 2 अक्टूबर से देशव्यापी आंदोलन शुरू करेगा।
CJP के संस्थापक अभिजीत दिपके ने भी मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग करते हुए देश के अलग-अलग हिस्सों में प्रदर्शन करने की बात कही थी। संगठन ने कहा है कि उसका आंदोलन स्वतंत्र रूप से चलाया जाएगा। मुंबई में गांधी जयंती के दिन शिवाजी पार्क से अभियान शुरू करने की घोषणा पहले ही की गई थी।
मुंबई में विरोध प्रदर्शन के मद्देनजर पुलिस ने शिवाजी पार्क और आसपास के इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी रखी। प्रदर्शन स्थल पर बड़ी संख्या में पुलिसकर्मी मौजूद रहे। इससे पहले CJP के प्रस्तावित प्रदर्शन को अनुमति देने को लेकर भी विवाद सामने आया था। संगठन ने पुलिस की ओर से अनुमति नहीं मिलने के बाद ‘जेल भरो आंदोलन’ की घोषणा की थी।
इसी मुद्दे को लेकर राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में भी विरोध प्रदर्शन हुआ। जंतर-मंतर के पास SFI और DYFI के कार्यकर्ताओं ने चुनाव आयोग और SIR प्रक्रिया के खिलाफ प्रदर्शन किया। प्रदर्शन में कुछ विपक्षी नेता भी शामिल हुए और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को हटाने की मांग की।
दिल्ली में प्रस्तावित प्रदर्शन को पुलिस की अनुमति नहीं मिली थी। इसके बावजूद प्रदर्शनकारी जंतर-मंतर के आसपास जुटे। स्थिति को देखते हुए मध्य दिल्ली में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी की गई और बड़ी संख्या में सुरक्षाकर्मियों की तैनाती की गई। जंतर-मंतर की ओर जाने वाले रास्तों पर बैरिकेडिंग भी की गई।
दिल्ली पुलिस ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS), 2023 की धारा 163 के तहत प्रतिबंधात्मक आदेश लागू किए थे। बिना अनुमति के लोगों के जुटने को रोकने के लिए सुरक्षा व्यवस्था बढ़ाई गई। जंतर-मंतर और आसपास के इलाकों में पुलिस के साथ अतिरिक्त सुरक्षा बल भी तैनात किए गए।
दिल्ली में प्रदर्शन के दौरान SFI और DYFI के साथ वाम दलों के नेता भी शामिल हुए। CPI(M) महासचिव एम.ए. बेबी और पार्टी नेता वृंदा करात ने चुनाव आयोग तथा SIR प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाए। नेताओं ने मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने और मतदाता सूची पुनरीक्षण से जुड़ी चिंताओं पर कार्रवाई की मांग की। ये मांगें और आरोप प्रदर्शनकारी पक्ष की ओर से रखे गए।
मुंबई और दिल्ली में हुए इन प्रदर्शनों का मुख्य मुद्दा SIR प्रक्रिया और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली रही। प्रदर्शनकारी संगठनों का आरोप है कि मतदाता सूची के पुनरीक्षण में पात्र मतदाताओं के नाम हटने का खतरा है और प्रक्रिया को लेकर पर्याप्त पारदर्शिता नहीं है। दूसरी ओर चुनाव आयोग ने अपने खिलाफ लगाए जा रहे पक्षपात और अनियमितता के आरोपों को खारिज किया है।
SIR को लेकर राजनीतिक दलों और विभिन्न संगठनों के बीच पिछले कुछ समय से विवाद जारी है। विपक्षी दलों ने मतदाता सूची में बदलाव और नाम हटाए जाने की प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं। चुनाव आयोग का कहना है कि मतदाता सूची को सही और अद्यतन रखने के लिए पुनरीक्षण किया जा रहा है और पात्र मतदाताओं को सूची में शामिल करने के लिए निर्धारित प्रक्रिया उपलब्ध है।
इसी विवाद के बीच चुनाव आयोग ने SIR पूरा कर चुके राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में छूटे हुए पात्र मतदाताओं की पहचान और पंजीकरण में मदद के लिए विशेष अभियान चलाने का निर्देश भी दिया है। इसका उद्देश्य ऐसे पात्र लोगों तक पहुंचना है जिनका नाम पुनरीक्षण के बाद मतदाता सूची में शामिल नहीं हो पाया है।
मुंबई के शिवाजी पार्क और दिल्ली के जंतर-मंतर के पास शुक्रवार को हुए प्रदर्शनों ने SIR और चुनाव आयोग को लेकर जारी राजनीतिक बहस को फिर केंद्र में ला दिया। CJP ने मुंबई से अपने आंदोलन की शुरुआत करते हुए इसे देश के दूसरे हिस्सों तक ले जाने की बात कही है, जबकि दिल्ली में छात्र और युवा संगठनों के साथ विपक्षी नेताओं ने मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने की मांग उठाई।
दोनों शहरों में सुरक्षा व्यवस्था के बीच हुए विरोध प्रदर्शनों में चुनाव आयोग से जवाबदेही और SIR प्रक्रिया को लेकर उठाए गए सवाल प्रमुख रहे। वहीं चुनाव आयोग की ओर से अनियमितता और राजनीतिक पक्षपात के आरोपों से इनकार किया गया है। ऐसे में SIR और मतदाता सूची से जुड़ा विवाद आने वाले दिनों में भी राजनीतिक और सार्वजनिक बहस का विषय बना रह सकता है।
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