महाराष्ट्र

पुणे दौरे से पहले कांग्रेस नेताओं की हिरासत, यूथ कांग्रेस ने जताया विरोध

Kavita2
1 Aug 2026 4:59 PM IST
पुणे दौरे से पहले कांग्रेस नेताओं की हिरासत, यूथ कांग्रेस ने जताया विरोध
x

पुणे: केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल के शनिवार को पुणे दौरे से पहले महाराष्ट्र यूथ कांग्रेस और पुणे शहर कांग्रेस के कई पदाधिकारियों को पुलिस ने एहतियातन हिरासत में ले लिया। कांग्रेस नेताओं ने पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि उन्हें बिना किसी विरोध प्रदर्शन के करीब 16 घंटे तक हिरासत में रखा गया और इस दौरान उनके मोबाइल फोन भी जब्त कर लिए गए।

कांग्रेस संगठनों का कहना है कि यह कार्रवाई लोकतांत्रिक अधिकारों का उल्लंघन है, जबकि पुलिस की ओर से इसे सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के लिए उठाया गया एहतियाती कदम बताया गया है।

आधी रात के बाद घरों पर पहुंची पुलिस

महाराष्ट्र यूथ कांग्रेस के अनुसार, पुलिसकर्मी शनिवार की आधी रात के आसपास कई नेताओं के घरों पर पहुंचे। नेताओं का कहना है कि उन्हें हिरासत में लेने का कारण हाई-प्रोफाइल दौरे के दौरान किसी भी तरह की कानून-व्यवस्था की समस्या को रोकना बताया गया।

यूथ कांग्रेस ने दावा किया कि संगठन के कई पदाधिकारियों को पुलिस अपने साथ ले गई और उन्हें लंबे समय तक हिरासत में रखा गया। नेताओं के अनुसार, रिहाई से पहले उन्हें लगभग 16 घंटे तक पुलिस हिरासत में रहना पड़ा।

मोबाइल फोन जब्त करने का आरोप

कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि हिरासत के दौरान पुलिस ने उनके मोबाइल फोन भी अपने कब्जे में ले लिए। उनका कहना है कि इस तरह की कार्रवाई से राजनीतिक कार्यकर्ताओं की गतिविधियों पर नजर रखने और उनकी आवाज को दबाने की कोशिश की जा रही है।

यूथ कांग्रेस ने कहा कि किसी भी विरोध या प्रदर्शन से पहले ही कार्यकर्ताओं को हिरासत में लेना लोकतांत्रिक प्रक्रिया के लिए चिंता का विषय है।

यूथ कांग्रेस ने जताई नाराजगी

महाराष्ट्र यूथ कांग्रेस ने पुलिस कार्रवाई की आलोचना करते हुए कहा कि शांतिपूर्ण विरोध और असहमति व्यक्त करना संविधान द्वारा दिए गए मौलिक अधिकारों का हिस्सा है।

संगठन ने आरोप लगाया कि राजनीतिक कार्यकर्ताओं को केवल आशंका के आधार पर घंटों हिरासत में रखना उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में सरकार और प्रशासन के फैसलों पर सवाल उठाने का अधिकार नागरिकों को प्राप्त है।

यूथ कांग्रेस ने यह भी कहा कि किसी संभावित विरोध को रोकने के लिए पहले से ही नेताओं को हिरासत में लेना लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है।

सुरक्षा व्यवस्था के तहत कार्रवाई

कांग्रेस के आरोपों के बीच, पुलिस की ओर से इस कार्रवाई को सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के उद्देश्य से किया गया कदम बताया गया है।

अमित शाह और अजीत डोभाल जैसे शीर्ष सुरक्षा अधिकारियों के दौरे को देखते हुए प्रशासन किसी भी अप्रिय स्थिति से बचने के लिए सतर्क था। ऐसे वीआईपी दौरों के दौरान पुलिस अक्सर संभावित विरोध या कानून-व्यवस्था से जुड़ी स्थिति को ध्यान में रखते हुए एहतियाती कदम उठाती है।

हालांकि, कांग्रेस नेताओं का कहना है कि शांतिपूर्ण राजनीतिक गतिविधियों को रोकना उचित नहीं है।

राजनीतिक माहौल गरमाया

पुणे में हुई इस कार्रवाई के बाद राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। कांग्रेस ने इसे लेकर सरकार और पुलिस प्रशासन पर निशाना साधा है, जबकि प्रशासन की ओर से सुरक्षा कारणों को प्राथमिकता दी जा रही है।

मामला ऐसे समय सामने आया है जब केंद्र सरकार के वरिष्ठ नेता और सुरक्षा अधिकारी पुणे दौरे पर थे। इस वजह से सुरक्षा इंतजाम भी सामान्य दिनों की तुलना में अधिक कड़े थे।

लोकतांत्रिक अधिकारों पर बहस

इस घटना ने एक बार फिर राजनीतिक विरोध, सुरक्षा व्यवस्था और नागरिक अधिकारों के बीच संतुलन को लेकर बहस शुरू कर दी है।

जहां प्रशासन का तर्क है कि बड़े नेताओं के दौरे के दौरान सुरक्षा बनाए रखना जरूरी होता है, वहीं विपक्षी दलों का कहना है कि सुरक्षा के नाम पर राजनीतिक कार्यकर्ताओं की स्वतंत्रता सीमित नहीं की जानी चाहिए।

कांग्रेस नेताओं ने मांग की है कि हिरासत में लिए जाने और मोबाइल फोन जब्त करने की कार्रवाई की समीक्षा की जाए। उन्होंने कहा कि शांतिपूर्ण विरोध करने वालों के अधिकारों का सम्मान किया जाना चाहिए।

आगे की स्थिति

फिलहाल इस मामले में कांग्रेस और पुलिस के बीच आरोप-प्रत्यारोप जारी हैं। कांग्रेस जहां इसे लोकतांत्रिक अधिकारों पर हमला बता रही है, वहीं प्रशासन सुरक्षा व्यवस्था के तहत उठाए गए कदमों का हवाला दे रहा है।

अमित शाह और अजीत डोभाल का पुणे दौरा शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हो गया, लेकिन उससे पहले हुई पुलिस कार्रवाई राजनीतिक चर्चा का विषय बन गई है।

Next Story