मुंबई। राजनीति में व्यस्त कार्यक्रम, लगातार बैठकें, यात्राएं और लोगों से मुलाकात के बीच खुद के लिए समय निकालना आसान नहीं होता। लेकिन महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के लिए फिटनेस लंबे समय से उनकी जीवनशैली का अहम हिस्सा रही है। उनकी दिनचर्या और वर्कआउट को लेकर साल 2019 में प्रकाशित ‘द वीक’ की एक रिपोर्ट एक बार फिर चर्चा में है, जिसमें बताया गया था कि किस तरह शिंदे अपने व्यस्त राजनीतिक शेड्यूल के बावजूद एक्सरसाइज के लिए समय निकालते हैं।

एकनाथ शिंदे का मानना है कि फिट रहने के लिए सबसे जरूरी चीज समय तय करना नहीं, बल्कि अपनी दिनचर्या में निरंतरता बनाए रखना है। उनका कहना है कि काम कितना भी व्यस्त क्यों न हो, स्वास्थ्य के लिए समय निकालना जरूरी है।

वर्कआउट के लिए तय समय नहीं, लेकिन अनुशासन जरूरी

‘द वीक’ को दिए गए एक पुराने इंटरव्यू में एकनाथ शिंदे ने बताया था कि उनका वर्कआउट किसी एक निश्चित समय पर निर्भर नहीं रहता।

उन्होंने कहा था कि उनका ध्यान इस बात पर रहता है कि दिन में किसी भी तरह एक्सरसाइज की जाए। इसके लिए उन्हें कभी सुबह जल्दी उठना पड़ता है तो कभी दिनभर के व्यस्त कार्यक्रम के बाद समय निकालना पड़ता है।

शिंदे के अनुसार, फिटनेस बनाए रखने के लिए समय से ज्यादा महत्वपूर्ण नियमितता है। अगर व्यक्ति अपनी दिनचर्या को लेकर प्रतिबद्ध है तो वह व्यस्त जीवन में भी स्वास्थ्य का ध्यान रख सकता है।

राजनीति के दबाव के बीच फिटनेस पर फोकस

एकनाथ शिंदे का राजनीतिक जीवन काफी व्यस्त रहा है। लगातार जनसभाएं, प्रशासनिक बैठकें और संगठनात्मक जिम्मेदारियों के बीच समय निकालना चुनौतीपूर्ण होता है।

इसके बावजूद उन्होंने फिटनेस को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाए रखा। उनका मानना है कि शारीरिक रूप से स्वस्थ रहने से काम करने की क्षमता बढ़ती है और तनाव कम होता है।

राजनीतिक जीवन में लंबे समय तक सक्रिय रहने के लिए ऊर्जा और स्वास्थ्य बेहद जरूरी हैं।

सुबह जल्दी उठने से लेकर देर रात तक की दिनचर्या

शिंदे की दिनचर्या को लेकर सामने आई जानकारी के अनुसार, वे कई बार अपने व्यस्त कार्यक्रमों के बावजूद एक्सरसाइज के लिए समय निकाल लेते हैं।

अगर सुबह का समय व्यस्त हो तो वे दिन के दूसरे हिस्से में वर्कआउट करते हैं। उनका लक्ष्य केवल यह होता है कि फिटनेस रूटीन में कोई लंबा अंतर न आए।

उनके अनुसार, फिटनेस किसी एक दिन या एक समय की चीज नहीं है, बल्कि यह लगातार किए जाने वाले प्रयासों का परिणाम है।

स्वास्थ्य को लेकर जागरूक रहने का संदेश

एकनाथ शिंदे की फिटनेस दिनचर्या लोगों के लिए भी एक संदेश देती है कि व्यस्त जीवन में भी स्वास्थ्य को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में लोग अक्सर काम के दबाव के कारण एक्सरसाइज को टाल देते हैं। लेकिन शिंदे का उदाहरण बताता है कि अगर इच्छा और अनुशासन हो तो व्यस्त कार्यक्रम में भी फिटनेस के लिए समय निकाला जा सकता है।

वर्कआउट से मिलती है ऊर्जा

फिटनेस विशेषज्ञों के अनुसार, नियमित व्यायाम से शरीर स्वस्थ रहने के साथ मानसिक मजबूती भी बढ़ती है। इससे तनाव कम होता है और काम करने की क्षमता बेहतर होती है।

राजनीति जैसे क्षेत्र में जहां लगातार मानसिक और शारीरिक दबाव रहता है, वहां फिटनेस की भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो जाती है।

पुराने इंटरव्यू की फिर चर्चा

‘द वीक’ की साल 2019 की रिपोर्ट में एकनाथ शिंदे की फिटनेस आदतों का जिक्र किया गया था। अब यह रिपोर्ट फिर से चर्चा में है क्योंकि इसमें उनके फिटनेस मंत्र और अनुशासन को लेकर जानकारी सामने आती है।

रिपोर्ट में बताया गया था कि शिंदे के लिए एक्सरसाइज किसी खास समय की मोहताज नहीं थी, बल्कि यह उनकी नियमित जीवनशैली का हिस्सा थी।

युवाओं के लिए प्रेरणा

फिटनेस को लेकर शिंदे का नजरिया युवाओं के लिए भी प्रेरणादायक माना जा सकता है। उनका कहना है कि लक्ष्य यह होना चाहिए कि शरीर को सक्रिय रखा जाए और स्वास्थ्य को प्राथमिकता दी जाए।

उन्होंने यह संदेश दिया कि चाहे व्यक्ति किसी भी क्षेत्र में काम करता हो, उसे अपने स्वास्थ्य के लिए समय जरूर निकालना चाहिए।

लगातार प्रयास ही सफलता की कुंजी

एकनाथ शिंदे के फिटनेस मंत्र का सबसे महत्वपूर्ण पहलू निरंतरता है। उनका मानना है कि एक्सरसाइज के लिए कोई एक सही समय नहीं होता, बल्कि जरूरी यह है कि व्यक्ति इसे अपनी आदत बनाए।

उनका कहना है कि काम की व्यस्तता के बावजूद अगर फिटनेस को प्राथमिकता दी जाए तो बेहतर स्वास्थ्य बनाए रखा जा सकता है।

फिटनेस और नेतृत्व का संबंध

एक सक्रिय और स्वस्थ शरीर नेतृत्व क्षमता को भी प्रभावित करता है। बेहतर ऊर्जा, निर्णय लेने की क्षमता और लंबे समय तक काम करने की क्षमता के लिए स्वास्थ्य महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

एकनाथ शिंदे की फिटनेस दिनचर्या इस बात का उदाहरण है कि जिम्मेदारियों के बीच भी स्वास्थ्य को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए।

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