बीड: पूर्व मंत्री और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के नेता धनंजय मुंडे ने मराठवाड़ा में बारिश की कमी से पैदा हुई गंभीर स्थिति पर चिंता जताते हुए मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को पत्र लिखा है। उन्होंने सरकार से 17 सितंबर या उसके आसपास छत्रपति संभाजीनगर में राज्य मंत्रिमंडल की विशेष बैठक आयोजित करने का आग्रह किया है। मुंडे का कहना है कि क्षेत्र में सूखे जैसे हालात बन रहे हैं और किसानों को राहत देने के लिए तत्काल नीतिगत एवं वित्तीय फैसले लेने की जरूरत है।
धनंजय मुंडे ने अपने पत्र में कहा कि मौजूदा खरीफ सीजन के दौरान लंबे समय तक पर्याप्त बारिश नहीं होने से फसलों को भारी नुकसान पहुंचा है। किसानों ने महंगे बीज, उर्वरक, कीटनाशक और मजदूरी पर खर्च कर बुआई की थी, लेकिन वर्षा में लंबे अंतराल के कारण फसलें सूखने लगी हैं। इससे किसानों की उत्पादन लागत डूबने और कर्ज का बोझ बढ़ने का खतरा पैदा हो गया है।
उन्होंने मुख्यमंत्री से प्रभावित किसानों के लिए तत्काल वित्तीय सहायता पैकेज घोषित करने की मांग की है। मुंडे ने कहा कि समय रहते राहत नहीं मिली तो किसानों की आर्थिक स्थिति और खराब हो सकती है। सरकार को नुकसान का आकलन कराने के साथ पात्र किसानों के खातों में जल्द सहायता राशि पहुंचानी चाहिए। फसल बीमा के दावों का निपटारा भी सरल और समयबद्ध तरीके से किया जाना चाहिए।
उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक, मराठवाड़ा के जिलों में औसत बारिश की कमी करीब 33 से 34 प्रतिशत तक पहुंच गई है। सितंबर शुरू होने के बावजूद बारिश की स्थिति संतोषजनक नहीं होने से सोयाबीन, कपास, तुअर, मूंग, उड़द, मक्का और अन्य खरीफ फसलों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है। कई इलाकों में बुआई के बाद बारिश रुकने से अंकुरित फसलें सूख गईं, जबकि कुछ स्थानों पर पौधों की वृद्धि रुक गई है।
मुंडे ने स्थिति को देखते हुए मराठवाड़ा को सूखा प्रभावित घोषित करने की प्रक्रिया शुरू करने की मांग भी उठाई है। उन्होंने कहा कि सरकार को जमीनी स्तर पर फसलों का सर्वेक्षण कराना चाहिए और राजस्व तथा कृषि विभाग की संयुक्त टीमों को प्रभावित गांवों में भेजना चाहिए। सर्वेक्षण और पंचनामे के आधार पर किसानों को वास्तविक नुकसान के अनुरूप मुआवजा मिलना चाहिए।
फसल संकट के अलावा क्षेत्र में पेयजल और पशुओं के चारे को लेकर भी चिंता बढ़ रही है। पर्याप्त बारिश नहीं होने से कई कुओं, छोटे बांधों और जलाशयों का जलस्तर अपेक्षित रूप से नहीं बढ़ा है। यदि आने वाले दिनों में अच्छी बारिश नहीं हुई तो गर्मी शुरू होने से पहले ही ग्रामीण इलाकों में पानी की समस्या गंभीर हो सकती है। गांवों में टैंकरों से पानी पहुंचाने की जरूरत बढ़ने की आशंका भी जताई जा रही है।
पशुपालकों के सामने हरे और सूखे चारे का संकट खड़ा हो सकता है। खरीफ फसलों के खराब होने से पशुओं के लिए उपलब्ध चारे की मात्रा कम हो जाती है। मुंडे ने सरकार से संभावित चारा संकट के लिए अभी से तैयारी करने का आग्रह किया है। इसमें चारा डिपो स्थापित करना, दूसरे क्षेत्रों से चारे की आपूर्ति और पशुपालकों को आर्थिक सहायता देने जैसे कदम शामिल हो सकते हैं।
धनंजय मुंडे ने विशेष कैबिनेट बैठक के लिए 17 सितंबर के आसपास की तारीख सुझाई है। इस दिन मराठवाड़ा मुक्ति संग्राम दिवस मनाया जाता है। उनका कहना है कि क्षेत्र के ऐतिहासिक महत्व वाले अवसर पर छत्रपति संभाजीनगर में मंत्रिमंडल की बैठक आयोजित कर सरकार किसानों, ग्रामीण परिवारों और स्थानीय जनता के लिए ठोस राहत फैसले ले सकती है।
मुंडे के अनुसार, विशेष बैठक में अल्पकालिक राहत के साथ मराठवाड़ा की दीर्घकालिक जल समस्या पर भी चर्चा होनी चाहिए। क्षेत्र में बार-बार आने वाले सूखे से निपटने के लिए सिंचाई परियोजनाओं, जल संरक्षण, नदी जोड़ने की योजनाओं, छोटे बांधों के पुनर्जीवन और भूजल स्तर सुधारने के उपायों पर समयबद्ध योजना तैयार करने की आवश्यकता है।
मराठवाड़ा लंबे समय से अनियमित बारिश और जल संकट की समस्या का सामना करता रहा है। यहां खेती का बड़ा हिस्सा मानसून पर निर्भर है। बारिश में कमी या लंबे अंतराल का सीधा असर फसल उत्पादन पर पड़ता है। सिंचाई सुविधाओं का समान विस्तार नहीं होने के कारण छोटे और सीमांत किसान सबसे अधिक प्रभावित होते हैं। फसल खराब होने की स्थिति में उनके लिए अगली बुआई, परिवार का खर्च और पुराने कर्ज की किस्त चुकाना मुश्किल हो जाता है।
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने बारिश की कमी वाले क्षेत्रों में तत्काल फसल सर्वेक्षण और नुकसान के पंचनामे कराने के निर्देश दिए हैं। रिपोर्टों के अनुसार, किसानों को प्रतिदिन 12 घंटे बिजली उपलब्ध कराने की दिशा में भी अधिकारियों को निर्देशित किया गया है। सरकार की ओर से परिस्थितियों की समीक्षा की जा रही है, लेकिन किसानों और राजनीतिक दलों की ओर से तत्काल राहत की मांग लगातार तेज हो रही है।
धनंजय मुंडे ने कहा कि केवल प्रशासनिक सर्वेक्षण पर्याप्त नहीं होगा। किसानों को बीज और उर्वरक पर हुए खर्च की भरपाई, फसल ऋण में राहत, बीमा भुगतान तथा अगली फसल के लिए आर्थिक सहायता भी मिलनी चाहिए। इसके साथ ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार उपलब्ध कराने के लिए रोजगार गारंटी से जुड़े कार्यों को बड़े स्तर पर शुरू किया जा सकता है।
विशेष कैबिनेट बैठक की मांग ऐसे समय उठी है, जब विपक्ष भी सूखा घोषित करने की मांग कर रहा है। राज्य के कृषि मंत्री के अनुसार मुख्यमंत्री परिस्थितियों की समीक्षा कर रहे हैं। अब सभी की नजर सरकार के अगले कदम पर है। यदि बारिश की स्थिति में सुधार नहीं होता है तो सरकार को फसल राहत, पेयजल आपूर्ति, चारा उपलब्धता और ग्रामीण रोजगार के लिए व्यापक आपात योजना लागू करनी पड़ सकती है।